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अदूरदर्शी सरकार होने का खामियाजा
कुर्सी है तुम्हारा ये जनाज़ा तो नहीं है।कुछ कर नहीं सकते तो उतर क्यों नहीं जाते।। इरतिज़ा निशात का लिखा ये शेर आज भारत के हुक्मरानों को बतौर नसीहत...

कुर्सी है तुम्हारा ये जनाज़ा तो नहीं है।कुछ कर नहीं सकते तो उतर क्यों नहीं जाते।। इरतिज़ा निशात का लिखा ये शेर आज भारत के हुक्मरानों को बतौर नसीहत...