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ऊर्जा संकट में फंसा देश

तूफान आने पर रेत में सिर घुसाने की शुतुरमुर्गी प्रवृत्ति कितनी घातक होती है, यह बात अब शायद मोदी सरकार को समझ आ रही होगी

ऊर्जा संकट में फंसा देश
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तूफान आने पर रेत में सिर घुसाने की शुतुरमुर्गी प्रवृत्ति कितनी घातक होती है, यह बात अब शायद मोदी सरकार को समझ आ रही होगी। पिछले 12 सालों से देश को सब चंगा सी मोड में डाल कर रखा गया है। जनता का ध्यान भटकाने के लिए नित नए शिगूफे छेड़ दिए जाते हैं। लेकिन न वादों से पेट भरता है, न शिगूफों से असली समस्याओं का वास्तविक हल निकलता है। इसके लिए काम करने की जरूरत पड़ती है, जो मोदी सरकार ने किया नहीं। बल्कि जो बने-बनाए काम थे, उन्हें और बिगाड़ दिया। जिसका खामियाजा अब जनता भुगत रही है। यही कारण है कि 11 दिन पहले ईरान पर किया गया हमला अब भारत की आम जनता के लिए परेशानी का सबब बन गया है। ईरान पर हमले और पूरे पश्चिम एशिया में युद्ध के प्रभाव के कारण ईंधन आपूर्ति में बाधा आने लगी है, जिससे भारत में एलपीजी संकट गहरा गया है। हालांकि देश को कई बड़े पत्रकार और मीडिया घराने ये बता रहे हैं कि पाकिस्तान में ऊर्जा का कितना बड़ा संकट खड़ा हो गया है कि वहां स्कूलों, कार्यालयों में उपस्थिति 50 प्रतिशत तक घटा दी गई है, और महंगाई बढ़ने का खतरा है। लेकिन पाकिस्तान के बिगड़े हालात दिखाकर हम अपनी मुश्किल आसान नहीं कर सकते। इसलिए जो सच है, उसका सामना करना ही होगा। गनीमत है कि सरकार ने इस दिशा में पहला कदम बढ़ाया है।

सरकार ने देश में घरेलू कुकिंग गैस की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम (एस्मा) लागू कर दिया है। सरकारी आदेश के मुताबिक कुछ क्षेत्रों को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी। इनमें घरेलू पीएनजी सप्लाई, ट्रांसपोर्ट के लिए सीएनजी, एलपीजी, पाइपलाइन कंप्रेसर फ्यूल और आवश्यक पाइपलाइन ऑपरेशनल जरूरतें शामिल हैं। केंद्र सरकार ने गैस बुकिंग का समय 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया है।

दरअसल इससे पहले देश के कई शहरों में सिलेंडर के महंगे होने और कालाबाजारी की खबरें आने लगीं। सरकार ने तो अपनी तरफ से 60 रूपए घरेलू गैस में 115 रूपए कमर्शियल सिलेंडर में बढ़ाए हैं। लेकिन उपभोक्ताओं को इनकी कहीं ज्यादा कीमत अदा करनी पड़ रही है, जो जाहिर तौर पर कालाबाजारी में लिप्त लोगों की देन है। नैशनल रेस्टोरेंट असोसिएशन ऑफ इंडिया के मुताबिक सरकार ने कहा है कि रेस्टोरेंट इंडस्ट्री के लिए कमर्शियल एलपीजी सिलिंडर की सप्लाई पर कोई रोक नहीं है, लेकिन जमीनी सच्चाई अलग है। सप्लायर सप्लाई करने में असमर्थता जता रहे हैं। इससे रेस्टोरेंट इंडस्ट्री पर बुरा असर पड़ रहा है। हमारा अनुरोध है कि तत्काल हस्तक्षेप किया जाए। इस बीच बंगलुरु में एलपीजी आपूर्ति रुकने से कई रेस्तरां के बंद होने की खबर के बीच कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखकर होटलों और रेस्तरां के लिए पर्याप्त कमर्शियल एलपीजी आपूर्ति सुनिश्चित करने और तेल कंपनियों को आपूर्ति बाधाएं दूर करने का आग्रह किया है।

गौरतलब है कि बीते दिन मुंबई में कमर्शियल गैस की सप्लाई रुक गई है। कोलकाता में गैस स्टेशनों के बाहर सीएनजी गाड़ियों की लंबी कतारें दिख रही हैं, दिल्ली, नोएडा समेत कई शहरों में घरेलू उपभोक्ताओं को भी सिलेंडर खरीदने में दिक्कत हो रही है, पुणे में गैस सिलेंडर से चलने वाले शवदाह गृह फिलहाल बंद किए गए हैं, जबकि बेंगलुरु में होटलों के बंद होने की आशंका है। यह सब विशाल हिमखंड की केवल ऊपरी परत है, भीतर-भीतर और कितनी आपाधापी मच सकती है, इसका अनुमान शायद सरकार को नहीं है, या वह देखना ही नहीं चाहती। क्योंकि कालाबाजारी केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी, इसका दायरा बढ़ेगा, जिससे महंगाई बढ़ेगी और आमदनी कम होने से खर्च पूरे करने के लिए अनैतिक रास्तों को अपनाने के बहाने लोगों को मिलेंगे। कम शब्दों में कहें तो देश में भ्रष्टाचार और अपराध दोनों के बढ़ने की आशंका है, क्योंकि यह सारी व्यवस्था एक कड़ी से दूसरी कड़ी को जोड़ती है। इसलिए जितने जल्दी समस्या को स्वीकार किया जाए और समाधान निकालने की तरफ बढ़ा जाए, उतना बेहतर।

वैसे मंगलवार को संसद में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात तो की है, लेकिन यह किस बारे में थी, इसका खुलासा नहीं हुआ है। मुमकिन है सरकार ईरान युद्ध के बीच खड़े हुए तेल संकट के बारे में ही आपस में चर्चा कर रही हो। हालांकि विपक्ष ने सोमवार को भी इस तरफ से सरकार को आगाह किया था और सदन में चर्चा की मांग की थी, मगर सरकार तैयार नहीं हुई। लेकिन अब सरकार ने एस्मा लागू किया है तो देखना होगा कि इससे कितनी राहत मिलती है।

इधर दुनिया के दूसरे हिस्सों पर भी तेल आपूर्ति रुकने का असर दिखने लगा है। दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी सऊदी अरामको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमीन एच नासिर ने कहा कि अगर इजरायल/अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई जारी रहती है तो इसका दुनिया के तेल बाजारों पर भयावह असर हो सकता है। उन्होंने कहा कि इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर काफी बुरा प्रभाव पड़ सकता है। रॉयटर्स के मुताबिक नासिर ने कहा कि इस लड़ाई के कारण अब तक 180 मिलियन बैरल कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित हो चुकी है।

अमेरिका भी ईंधन महंगा हो चुका है और लोगों का गुस्सा अब ट्रंप सरकार पर फूट रहा है। इधर ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि वह होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही में बाधा डालने की कोशिश न करे। यह दुनिया के लिए ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। उन्होंने कहा, 'होर्मुज स्ट्रेट सुरक्षित रहेगा। अगर ईरान ने वहां किसी तरह की बाधा डालने की कोशिश की, तो उसे और भी कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।' ट्रंप ने यह भी घोषणा की कि अमेरिका खाड़ी क्षेत्र में चलने वाले वाणिज्यिक तेल टैंकरों को पॉलिटिकल रिस्क इंश्योरेंस उपलब्ध कराएगा। जब ट्रंप से पूछा गया कि यह संघर्ष कितने समय तक चल सकता है, तो उन्होंने संकेत दिया कि सैन्य कार्रवाई जल्द समाप्त हो सकती है।

अब ट्रंप कुछ भी दावा करें, सच यही है कि एक अविचारित, अनैतिक युद्ध ने दुनिया को बड़े संकट में डाल दिया है। कर रहे हैं...


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