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ललित सुरजन की कलम से - कलम पर भरोसा रखने की ज़रुरत
'अगर हमें ठीक-ठीक याद है तो 1908 में कांग्रेस पार्टी के सूरत अधिवेशन में नरमपंथियों और गरमपंथियों के बीच जूते चले थे। यह देश की राजनीति में जूते के...












