वाशिंगटन । अमेरिका की राजनीति में एक बार फिर हलचल तब तेज हो गई, जब पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने जेफरी एपस्टीन से जुड़े मामले में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) की जांच के सामने गवाही देने पर सहमति जता दी। यह सहमति ऐसे समय आई है जब हाउस ओवरसाइट कमेटी कांग्रेस की अवमानना के आरोपों पर वोट कराने की तैयारी कर रही थी। क्लिंटन दंपती के इस कदम को संभावित कानूनी टकराव को टालने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
शपथ के तहत डिपॉजिशन देने की सहमति
हाउस ओवरसाइट कमेटी के रिपब्लिकन अध्यक्ष जेम्स कॉमर ने पुष्टि की कि क्लिंटन दंपती के वकीलों ने ई-मेल के जरिए सूचित किया है कि दोनों आपसी सहमति से तय तारीखों पर शपथ के तहत डिपॉजिशन (Deposition) देने को तैयार हैं। डिपॉजिशन का अर्थ है कि गवाह शपथ लेकर औपचारिक रूप से बयान देता है, जिसका लिखित रिकॉर्ड तैयार किया जाता है और जिसे कानूनी कार्यवाही में इस्तेमाल किया जा सकता है।
कॉमर ने बताया कि क्लिंटन पक्ष ने अनुरोध किया है कि अवमानना की कार्रवाई रोकी जाए। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी तक कोई औपचारिक लिखित समझौता नहीं हुआ है, इसलिए कमेटी फिलहाल अवमानना की प्रक्रिया वापस नहीं ले रही है।
पहले क्या था क्लिंटन पक्ष का प्रस्ताव?
इस विवाद की पृष्ठभूमि में गवाही के स्वरूप को लेकर मतभेद प्रमुख कारण रहा। जेम्स कॉमर चाहते थे कि बिल और हिलेरी क्लिंटन दोनों कमेटी के सामने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर शपथ के तहत डिपॉजिशन दें। इसके जवाब में क्लिंटन पक्ष ने प्रस्ताव दिया था कि बिल क्लिंटन चार घंटे का ट्रांसक्राइब्ड इंटरव्यू देने को तैयार हैं, जबकि हिलेरी क्लिंटन शपथ पत्र (Affidavit) जमा कर सकती हैं। कॉमर ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए कहा था कि “कानूनी समन की शर्तें क्लिंटन तय नहीं कर सकते।” उनके अनुसार, यदि समन जारी हुआ है तो उसके तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना ही होगा।
अगस्त में जारी हुआ था समन
हाउस ओवरसाइट कमेटी ने अगस्त में क्लिंटन दंपती को समन जारी किया था। इसके बाद कई महीनों तक उनके वकीलों ने समन की वैधता और दायरे पर सवाल उठाए। जब कमेटी ने अवमानना की कार्यवाही को आगे बढ़ाने के संकेत दिए, तब दोनों पक्षों के बीच बातचीत तेज हुई। पिछले महीने कमेटी ने आपराधिक अवमानना के आरोपों को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया था। इस प्रक्रिया को कुछ डेमोक्रेट सांसदों ने भी पारदर्शिता के नाम पर समर्थन दिया था, जिससे यह मामला और राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो गया।
एपस्टीन केस क्या है?
यह पूरी जांच दोषी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन और उसके सहयोगियों से जुड़ी है। एपस्टीन पर नाबालिग लड़कियों की यौन तस्करी और शोषण के गंभीर आरोप थे। 2019 में न्यूयॉर्क की जेल में उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी, जिसे आधिकारिक रूप से आत्महत्या बताया गया। एपस्टीन के कई प्रभावशाली राजनीतिक, कारोबारी और सामाजिक हस्तियों से संबंध रहे थे। इसी कारण यह मामला अमेरिकी राजनीति में लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। बिल क्लिंटन के साथ एपस्टीन के पुराने संबंधों को लेकर सवाल उठते रहे हैं, क्योंकि क्लिंटन ने अतीत में एपस्टीन के निजी विमान से यात्रा की थी और कुछ कार्यक्रमों में उसके साथ देखे गए थे। हालांकि क्लिंटन पर किसी भी प्रकार की आपराधिक या अनुचित हरकत का आरोप नहीं है।
राजनीतिक टकराव
इस जांच को लेकर रिपब्लिकन और डेमोक्रेट नेताओं के बीच तीखा राजनीतिक मतभेद सामने आया है। रिपब्लिकन नेतृत्व का कहना है कि एपस्टीन नेटवर्क से जुड़े सभी प्रभावशाली लोगों से जवाबदेही तय करना आवश्यक है और क्लिंटन दंपती को भी जांच में सहयोग करना चाहिए। वहीं डेमोक्रेट्स का आरोप है कि यह जांच गंभीर तथ्यों से ज्यादा राजनीतिक उद्देश्य से चलाई जा रही है। क्लिंटन के प्रवक्ता एंजेल उरेना ने जेम्स कॉमर पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि क्लिंटन ने सद्भावना के साथ बातचीत की, लेकिन कमेटी ने लचीला रुख नहीं अपनाया।
डेमोक्रेटिक नेतृत्व की प्रतिक्रिया
हाउस में डेमोक्रेटिक नेता हकीम जेफ्रीज ने अवमानना प्रस्तावों का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि यह “गंभीर जांच नहीं, बल्कि एक राजनीतिक तमाशा” है। डेमोक्रेट्स का तर्क है कि यदि पारदर्शिता की बात की जा रही है, तो ट्रंप प्रशासन के दौरान न्याय विभाग (डीओजे) द्वारा एपस्टीन से जुड़ी फाइलों को समय पर सार्वजनिक न किए जाने की भी जांच होनी चाहिए। जेफ्रीज ने संकेत दिया है कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर आंतरिक चर्चा करेगी और सामूहिक रणनीति तय करेगी।
अवमानना का कानूनी पहलू
यदि किसी व्यक्ति को कांग्रेस के समन का पालन न करने पर दोषी ठहराया जाता है, तो उसे कांग्रेस की अवमानना का सामना करना पड़ सकता है। यह मामला आपराधिक प्रक्रिया तक भी पहुंच सकता है, जिसमें न्याय विभाग की भूमिका होती है। क्लिंटन दंपती द्वारा डिपॉजिशन देने की सहमति इस संभावित कानूनी जटिलता को टालने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि जब तक लिखित समझौता नहीं होता, तब तक अवमानना का खतरा पूरी तरह टला नहीं है।
अमेरिकी राजनीति पर व्यापक असर
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्लिंटन दंपती और हाउस ओवरसाइट कमेटी के बीच औपचारिक समझौता कब और किस शर्त पर होता है। यदि दोनों पक्ष सहमत होते हैं, तो डिपॉजिशन की तारीखें तय की जाएंगी और बयान दर्ज किए जाएंगे। यह भी महत्वपूर्ण होगा कि गवाही सार्वजनिक की जाएगी या बंद कमरे में होगी। जांच के निष्कर्ष और संभावित सिफारिशें अमेरिकी राजनीति पर व्यापक असर डाल सकती हैं, खासकर ऐसे समय में जब राजनीतिक ध्रुवीकरण पहले से ही गहरा है। फिलहाल, क्लिंटन दंपती की सहमति ने तत्काल टकराव को टाल दिया है, लेकिन एपस्टीन केस से जुड़ी राजनीतिक और कानूनी बहस अभी खत्म होने के आसार नहीं हैं।