भारत-EU की 'मदर आफ आल डील्स' से पाकिस्तान में हड़कंप, यूरोपीय बाजार में खत्म हो सकती है कीमत वाली बढ़त

जहां भारत में इसे निर्यात और निवेश के लिए बड़ा अवसर माना जा रहा है, वहीं पाकिस्तान के लिए यह समझौता चिंता का विषय बन गया है। पाकिस्तान को आशंका है कि यूरोपीय बाजार में उसकी वर्षों पुरानी शुल्क-आधारित प्रतिस्पर्धी बढ़त अब खत्म हो सकती है।

Update: 2026-02-02 08:14 GMT
नई दिल्ली/इस्लामाबाद। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच 27 जनवरी को हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) ने दक्षिण एशिया की व्यापारिक प्रतिस्पर्धा में नई हलचल पैदा कर दी है। करीब दो दशकों की लंबी वार्ता के बाद अंतिम रूप पाए इस समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है। यह करार दुनिया की लगभग एक-चौथाई आबादी और वैश्विक जीडीपी के 25 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करने वाली दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ता है।

जहां भारत में इसे निर्यात और निवेश के लिए बड़ा अवसर माना जा रहा है, वहीं पाकिस्तान के लिए यह समझौता चिंता का विषय बन गया है। पाकिस्तान को आशंका है कि यूरोपीय बाजार में उसकी वर्षों पुरानी शुल्क-आधारित प्रतिस्पर्धी बढ़त अब खत्म हो सकती है।

जीएसपी+ के सहारे थी बढ़त

पाकिस्तान को अब तक यूरोपीय संघ की जीएसपी+ (जनरलाइज्ड स्कीम ऑफ प्रिफरेंसेज प्लस) योजना का लाभ मिलता रहा है। इस योजना के तहत उसके लगभग 66 प्रतिशत निर्यात उत्पादों पर यूरोप में शून्य शुल्क लगता था। खासकर टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट्स जैसे श्रम-प्रधान उत्पादों में पाकिस्तान को बड़ी राहत मिलती रही है। दूसरी ओर, भारत को उन्हीं उत्पादों पर 9 से 12 प्रतिशत तक शुल्क देना पड़ता था। इसके बावजूद भारत का निर्यात यूरोप में पाकिस्तान के करीब ही रहा। आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान का यूरोप को निर्यात करीब 6.2 अरब डॉलर है, जबकि भारत का निर्यात 5.6 अरब डॉलर के आसपास है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शुल्क समान हो जाएं, तो भारत अपनी उत्पादन क्षमता और विविध उत्पाद श्रृंखला के दम पर तेजी से आगे निकल सकता है।

एफटीए से खत्म होगी शुल्क असमानता

भारत-ईयू एफटीए लागू होने के बाद भारत को भी यूरोपीय बाजार में लगभग पूरी तरह शुल्क-मुक्त पहुंच मिल जाएगी। इसका मतलब है कि पाकिस्तान की अब तक की ‘कीमत वाली बढ़त’ समाप्त हो जाएगी। भारत के करीब 95 प्रतिशत श्रम-प्रधान उत्पाद जैसे कपड़ा, परिधान, चमड़ा और इंजीनियरिंग सामान बिना शुल्क के यूरोपीय बाजार में प्रवेश पा सकेंगे। इससे भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।

जीएसपी+ दर्जे पर अनिश्चितता

पाकिस्तान की चिंता केवल भारत-ईयू समझौते तक सीमित नहीं है। उसे 2014 में जीएसपी+ का दर्जा मिला था, जिसकी अवधि दिसंबर 2027 के बाद समाप्त हो सकती है। यदि यूरोपीय संघ इस दर्जे को आगे नहीं बढ़ाता, तो पाकिस्तान को मिलने वाली विशेष व्यापारिक रियायतें पूरी तरह खत्म हो सकती हैं। चूंकि ईयू पाकिस्तान का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है, इसलिए यह स्थिति उसके लिए गंभीर आर्थिक चुनौती बन सकती है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान ने इस मुद्दे को लेकर ईयू अधिकारियों से संपर्क किया है ताकि संभावित प्रभाव का आकलन किया जा सके और नुकसान कम करने के उपाय तलाशे जा सकें।

पाकिस्तानी उद्योग जगत में बेचैनी

पाकिस्तान के उद्योग संगठनों ने इस समझौते पर चिंता जताई है। आल पाकिस्तान टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन (एपीटीएमए) के प्रमुख कमरान अरशद ने कहा है कि भारत अब यूरोपीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएगा और कई क्षेत्रों में पाकिस्तान से आगे निकल सकता है। पूर्व वाणिज्य मंत्री डॉ. गोहर एजाज ने चेतावनी दी है कि यदि व्यापारिक परिस्थितियां पाकिस्तान के पक्ष में नहीं रहीं, तो लगभग एक करोड़ नौकरियों पर खतरा आ सकता है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में टेक्सटाइल सेक्टर का बड़ा योगदान है और बड़ी संख्या में लोग इस उद्योग पर निर्भर हैं।

भारत को संभावित लाभ

भारत के लिए यह समझौता निर्यात विस्तार और निवेश आकर्षित करने का बड़ा अवसर माना जा रहा है।
95 प्रतिशत श्रम-प्रधान उत्पादों को शुल्क-मुक्त प्रवेश
इंजीनियरिंग, ऑटो कंपोनेंट्स, फार्मा और कृषि उत्पादों के लिए बेहतर बाजार पहुंच
निवेश और तकनीकी सहयोग के नए अवसर
इसके अलावा, यूरोप से आयात होने वाली लग्जरी कारें और वाइन जैसी वस्तुएं भारत में सस्ती हो सकती हैं, जिससे उपभोक्ताओं को भी लाभ मिलेगा।

वैश्विक व्यापार पर असर

भारत-ईयू एफटीए केवल द्विपक्षीय समझौता नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार संतुलन में बदलाव का संकेत भी है। यह करार उस समय हुआ है जब दुनिया में संरक्षणवाद और व्यापारिक तनाव बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अधिक मजबूती से स्थापित करेगा। वहीं, पाकिस्तान को अपनी व्यापार नीति और निर्यात रणनीति पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।

परिदृश्य में बड़ा बदलाव

भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता दक्षिण एशिया के व्यापारिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव ला सकता है। जहां भारत के लिए यह अवसरों का द्वार खोलता है, वहीं पाकिस्तान के लिए यह प्रतिस्पर्धा की नई चुनौती लेकर आया है। आने वाले वर्षों में यह स्पष्ट होगा कि पाकिस्तान अपनी व्यापारिक रणनीति में किस तरह के सुधार करता है और भारत इस समझौते का कितना प्रभावी लाभ उठा पाता है। फिलहाल, यूरोपीय बाजार में प्रतिस्पर्धा का नया अध्याय शुरू हो चुका है।

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