पाकिस्तान के बाद बांग्लादेश चुनाव से पहले सुरक्षा अलर्ट: अमेरिकी दूतावास की चेतावनी, हिंसा की आशंकाएं गहराईं

अमेरिकी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी अलर्ट में कहा कि चुनावी अवधि के दौरान राजनीतिक हिंसा किसी भी रूप में सामने आ सकती है। शांतिपूर्ण रैलियां अचानक हिंसक हो सकती हैं और चरमपंथी संगठनों द्वारा हमलों का खतरा बना रह सकता है।

Update: 2026-01-30 21:44 GMT
ढाका/वॉशिंगटन। बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले 13वें संसदीय चुनाव और प्रस्तावित जनमत संग्रह से पहले राजनीतिक माहौल तनावपूर्ण होता जा रहा है। एक ओर चुनावी तैयारियां अंतिम चरण में हैं, वहीं दूसरी ओर हिंसा की घटनाओं और आशंकाओं ने चिंता बढ़ा दी है। इसी पृष्ठभूमि में ढाका स्थित अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा चेतावनी जारी करते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी है। इससे पहले अमेरिका ने पाकिस्तान को लेकर भी नई ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है।

शुक्रवार को बांग्लादेश में अमेरिका के राजदूत ब्रेंट टी. क्रिस्टेंसन ने जमात-ए-इस्लामी प्रमुख शफीकुर रहमान से मुलाकात कर आगामी चुनावों और राजनीतिक हालात पर चर्चा की। अमेरिकी दूतावास ने स्पष्ट किया कि अमेरिका बांग्लादेश की सभी राजनीतिक पार्टियों के साथ संवाद बनाए रखते हुए साझा शांति और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

300 सीटों पर चुनाव

बांग्लादेश में 300 संसदीय सीटों के लिए मतदान होना है। इस चुनाव में 50 से अधिक राजनीतिक दलों के लगभग 2000 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 16 देशों के 57 चुनाव पर्यवेक्षकों को आमंत्रित किया गया है। पुलिस के मुताबिक, 22 जनवरी से शुरू हुए चुनाव प्रचार के बाद से अब तक हिंसक घटनाओं में कम से कम चार लोगों की मौत हो चुकी है। विभिन्न इलाकों में झड़प, तोड़फोड़ और राजनीतिक टकराव की खबरें सामने आई हैं, जिससे चुनावी माहौल पर असर पड़ रहा है।

अमेरिकी दूतावास की सुरक्षा चेतावनी

अमेरिकी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी अलर्ट में कहा कि चुनावी अवधि के दौरान राजनीतिक हिंसा किसी भी रूप में सामने आ सकती है। शांतिपूर्ण रैलियां अचानक हिंसक हो सकती हैं और चरमपंथी संगठनों द्वारा हमलों का खतरा बना रह सकता है। चेतावनी में कहा गया है कि रैलियों, मतदान केंद्रों और धार्मिक स्थलों चर्च, मंदिर और मस्जिद को संभावित निशाना बनाया जा सकता है। अमेरिकी नागरिकों से अपील की गई है कि वे किसी भी प्रकार की रैली, प्रदर्शन या भीड़भाड़ वाले स्थानों से दूरी बनाए रखें। इसके अलावा, स्थानीय समाचारों पर नजर रखने, आसपास की गतिविधियों के प्रति सतर्क रहने और आपात स्थिति के लिए मोबाइल फोन पूरी तरह चार्ज रखने की सलाह दी गई है।

परिवहन पर सख्ती, हिंसा पर सरकार की चिंता

बांग्लादेश सरकार ने चुनाव के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाने का ऐलान किया है। 10 फरवरी से मोटरसाइकिलों पर रोक लगाने और 11 व 12 फरवरी को सभी प्रकार के परिवहन साधनों को बंद रखने का निर्णय लिया गया है। इस बीच, शेरपुर में हुई एक हिंसक घटना में जमात-ए-इस्लामी के एक कार्यकर्ता की मौत के बाद अंतरिम सरकार ने चिंता जताई है। मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के प्रेस विंग ने बयान जारी कर कहा कि किसी भी प्रकार की जनहानि अस्वीकार्य है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरकार का कहना है कि चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष कराने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

अल्पसंख्यक संगठनों की चिंता

चुनाव से पहले अल्पसंख्यक संगठनों ने भी अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद ने निष्पक्ष और सुरक्षित मतदान की मांग करते हुए सांप्रदायिक हिंसा पर रोक लगाने की अपील की है। परिषद ने मीडिया रिपोर्टों के आधार पर दावा किया कि जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच 522 सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं हुई हैं, जबकि अंतरिम सरकार ने ऐसे केवल 71 मामलों की पुष्टि की है। इस आंकड़ों के अंतर ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। हालांकि, चुनाव आयोग ने कहा है कि वह अल्पसंख्यकों के मताधिकार की रक्षा और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आयोग का दावा है कि सुरक्षा बलों की तैनाती और निगरानी तंत्र को मजबूत किया गया है।

पाकिस्तान को लेकर भी अमेरिका की नई ट्रैवल एडवाइजरी

बांग्लादेश के साथ-साथ अमेरिका ने पाकिस्तान को लेकर भी नई ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। वाशिंगटन स्थित विदेश विभाग ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अपने नागरिकों से पाकिस्तान की यात्रा पर पुनर्विचार करने को कहा है। पाकिस्तान को ‘लेवल 3’ (पुनर्विचार करें) श्रेणी में रखा गया है। एडवाइजरी में आतंकवाद, नागरिक अशांति और अपराध के उच्च जोखिम का उल्लेख किया गया है। विशेष रूप से बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों के लिए ‘लेवल 4’ (यात्रा न करें) की चेतावनी जारी की गई है। इन क्षेत्रों में हत्या, अपहरण और सशस्त्र हमलों के प्रयासों को आम बताया गया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने चेताया है कि आतंकवादी बिना किसी पूर्व सूचना के परिवहन केंद्रों, बाजारों, शॉपिंग मॉल, सैन्य ठिकानों, स्कूलों, अस्पतालों और धार्मिक स्थलों को निशाना बना सकते हैं।

सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी चेतावनी

ट्रैवल एडवाइजरी में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान में विदेशी नागरिकों को प्रदर्शनों में शामिल होने से बचना चाहिए। साथ ही इंटरनेट मीडिया पर पाकिस्तानी सरकार या सेना की आलोचना करने वाली पोस्ट डालने पर हिरासत का सामना करना पड़ सकता है। यह सलाह उन अमेरिकी नागरिकों पर भी लागू होती है जो पाकिस्तानी मूल के हैं।

दिलचस्प बात यह है कि एक ओर अमेरिका पाकिस्तान के साथ रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में कदम उठा रहा है, हाल ही में पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर को भोज पर आमंत्रित किया गया, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह भी दे रहा है।

क्षेत्रीय अस्थिरता और कूटनीतिक संतुलन

दक्षिण एशिया में हालिया घटनाक्रम ने क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। बांग्लादेश में चुनावी हिंसा की आशंका और पाकिस्तान में सुरक्षा जोखिमों के बीच अमेरिका की चेतावनियां संकेत देती हैं कि वाशिंगटन अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रुख अपना रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी प्रक्रियाएं किसी भी लोकतंत्र के लिए अहम होती हैं, लेकिन यदि सुरक्षा स्थिति कमजोर हो तो अंतरराष्ट्रीय छवि और आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। बांग्लादेश में आगामी मतदान को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें टिकी हैं। यदि चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होते हैं, तो यह देश की लोकतांत्रिक साख को मजबूत करेगा। वहीं किसी भी बड़े हिंसक घटनाक्रम से राजनीतिक संकट गहरा सकता है।

संवेदनशील मोड़ पर


बांग्लादेश में चुनावी प्रचार अपने अंतिम चरण में है और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं। अमेरिकी दूतावास की चेतावनी ने स्थिति की गंभीरता को रेखांकित किया है। दूसरी ओर, पाकिस्तान को लेकर जारी ट्रैवल एडवाइजरी भी इस क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियों की याद दिलाती है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि बांग्लादेश में चुनावी प्रक्रिया कितनी शांतिपूर्ण रहती है और क्या अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की मौजूदगी भरोसा बढ़ाने में मदद करती है। फिलहाल, क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा परिदृश्य दोनों ही संवेदनशील मोड़ पर खड़े हैं।

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