तुर्किये की मध्यस्थता की पेशकश के बीच अमेरिकी धमकी पर ईरान ने चेताया, किसी भी हमले का देंगे तत्काल जवाब
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान पर हमले की संभावना से इनकार नहीं किया है। उन्होंने ईरान पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी देते हुए अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन और गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स को मध्य एशिया के समुद्री क्षेत्र में तैनात किया है।
तेहरान/वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में ईरान को लेकर तनाव तेजी से बढ़ता दिख रहा है। एक ओर अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई के संकेत देते हुए क्षेत्र में अपनी नौसैनिक मौजूदगी बढ़ा दी है, वहीं ईरान ने साफ कर दिया है कि किसी भी आक्रामक कदम का “तत्काल और निर्णायक” जवाब दिया जाएगा। यूरोपीय संघ द्वारा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को ब्लैकलिस्ट करने के बाद हालात और जटिल हो गए हैं।
ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि यूरोपीय देश उसके रिवोल्यूशनरी गार्ड को आतंकवादी संगठन घोषित करते हैं, तो वह जवाबी कार्रवाई में संबंधित देशों की सैन्य शक्तियों को भी “आतंकी” करार दे सकता है।
यूरोपीय संघ से सीधी टकराहट
ईरान के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी ने कहा कि यूरोपीय देशों को अपने फैसलों के परिणाम भुगतने होंगे। ईयू द्वारा IRGC को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के संकेतों के बाद तेहरान ने सख्त रुख अपनाया है। इससे पहले यूरोपीय संघ ने ईरान के आंतरिक मंत्री इश्कंदर मोमेनी सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों और न्यायिक संस्थानों पर प्रतिबंध लगाए थे। अमेरिका ने भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित दमनात्मक कार्रवाई के आरोपों के चलते मोमेनी पर नए प्रतिबंधों की घोषणा की है।
अमेरिका की सैन्य तैयारी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान पर हमले की संभावना से इनकार नहीं किया है। उन्होंने ईरान पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी देते हुए अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन और गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स को मध्य एशिया के समुद्री क्षेत्र में तैनात किया है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई करेगा या कूटनीतिक दबाव की रणनीति अपनाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान पर हमला केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर अस्थिरता बढ़ा सकता है।
परमाणु होड़ की आशंका
विश्लेषकों के अनुसार, यदि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई होती है, तो इससे परमाणु हथियारों की दौड़ तेज हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु अप्रसार व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ सकता है। सऊदी अरब पहले ही संकेत दे चुका है कि यदि ईरान परमाणु हथियार विकसित करता है, तो वह भी समान कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। इससे पूरे पश्चिम एशिया में सामरिक संतुलन बिगड़ सकता है।
ईरान: युद्ध नहीं चाहते, पर जवाब देंगे
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति से बातचीत में कहा कि उनका देश युद्ध नहीं चाहता, लेकिन किसी भी हमले का जवाब देने में पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि संवाद के दरवाजे खुले हैं, पर बातचीत सम्मानजनक शर्तों पर ही संभव है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरकची, जो तुर्किये के दौरे पर हैं, ने कहा कि ईरान अमेरिका से बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन यह वार्ता “धमकियों के साये” में नहीं हो सकती। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान अपनी रक्षा क्षमताओं, खासकर मिसाइल कार्यक्रम, पर समझौता नहीं करेगा। अमेरिका की प्रमुख शर्त यह रही है कि ईरान अपने मिसाइल कार्यक्रम को सीमित या समाप्त करे, जिसे तेहरान पहले ही खारिज कर चुका है।
तुर्किये की मध्यस्थता की पेशकश
इस बढ़ते तनाव के बीच तुर्किये ने मध्यस्थता की पेशकश की है। राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप एर्दोआन ने ईरानी राष्ट्रपति से बातचीत में अमेरिका और ईरान के बीच संवाद बहाल करने की कोशिश करने का संकेत दिया है। तुर्किये ने ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य हस्तक्षेप का विरोध किया है और चेतावनी दी है कि इससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है।
आंतरिक अस्थिरता भी बढ़ी चिंता
ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच हजारों लोगों की मौत की खबरें सामने आई हैं। कुछ रिपोर्टों में 6479 लोगों के मारे जाने का दावा किया गया है, हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि कठिन है। इन घटनाओं को लेकर पश्चिमी देशों ने तेहरान पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगाए हैं और प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाया है।
टकराव के बीच फंसा पश्चिम एशिया
वर्तमान स्थिति में पश्चिम एशिया कूटनीति और सैन्य टकराव के बीच झूलता नजर आ रहा है। एक ओर अमेरिका दबाव की रणनीति अपना रहा है, दूसरी ओर ईरान प्रतिरोध की मुद्रा में है। यूरोप के साथ संबंधों में भी खटास बढ़ती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्यस्थता प्रयास सफल नहीं होते, तो क्षेत्रीय संघर्ष व्यापक रूप ले सकता है। फिलहाल दुनिया की निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या वॉशिंगटन और तेहरान कूटनीतिक समाधान की राह चुनेंगे या हालात और बिगड़ेंगे।