क्वेटा/इस्लामाबाद। पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में शनिवार को हिंसा ने नया और खतरनाक मोड़ ले लिया, जब बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने अपने बहुचर्चित ‘ऑपरेशन हेरोफ’ के दूसरे चरण की घोषणा करते हुए 14 शहरों में एक साथ 48 स्थानों पर हमले किए। संगठन ने दावा किया है कि इन हमलों में 84 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया गया, जबकि 18 सुरक्षा कर्मियों को बंदी बनाया गया है। हालांकि, बलूचिस्तान सरकार ने बीएलए के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में 70 विद्रोही मारे गए हैं और स्थिति नियंत्रण में है। दोनों पक्षों के दावों के बीच वास्तविक हताहतों की संख्या की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल संभव नहीं हो सकी है।
14 शहरों में समन्वित हमले
सरकारी प्रवक्ता शाहिद रिंद के अनुसार, शुक्रवार देर रात से शनिवार दोपहर तक विद्रोहियों ने क्वेटा, ग्वादर, मकरान, हुब, चमन, नसीराबाद और अन्य स्थानों पर सुरक्षा बलों, सरकारी एजेंसियों और कुछ नागरिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। राजधानी क्वेटा में कम से कम चार पुलिसकर्मियों की मौत की पुष्टि की गई है। बीएलए ने अपने बयान में कहा कि उसके लड़ाकों ने “दुश्मन के सैन्य, प्रशासनिक और सुरक्षा ढांचे” पर समन्वित तरीके से हमला किया। संगठन का दावा है कि कई सैन्य चौकियों और एक केंद्रीय सैन्य मुख्यालय पर अस्थायी रूप से कब्जा कर लिया गया, जबकि विभिन्न शहरों में सुरक्षा बलों की आवाजाही बाधित कर दी गई। संगठन ने यह भी कहा कि उसने प्रमुख राजमार्गों को बंद कर दिया, ताकि सेना की जवाबी कार्रवाई को रोका जा सके।
क्वेटा के बाजार पर कब्जे का दावा
बीएलए ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर दावा किया कि उसके लड़ाकों ने क्वेटा के एक प्रमुख बाजार क्षेत्र पर कुछ समय के लिए नियंत्रण स्थापित कर लिया था। वीडियो में हथियारबंद लोग बाजार इलाके में दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, इस दावे पर पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों की ओर से अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। एक संघीय मंत्री ने कहा कि सुरक्षा बल “पूरी तरह सतर्क” थे और उन्होंने हमलों को विफल कर दिया।
सरकार का दावा: 70 विद्रोही ढेर
बलूचिस्तान सरकार का कहना है कि सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में 70 विद्रोही मारे गए। मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि अभियान शुक्रवार रात से जारी है और शनिवार शाम तक भी कार्रवाई चल रही थी। सूचना मंत्री अताउल्ला तरार ने जियो न्यूज से बातचीत में कहा कि सुरक्षा बलों ने स्थिति को तेजी से नियंत्रित किया और बड़े नुकसान को टाल दिया। उन्होंने बीएलए के दावों को “प्रचार युद्ध” का हिस्सा बताया।
‘ऑपरेशन हेरोफ’ की पृष्ठभूमि
बीएलए ने ‘ऑपरेशन हेरोफ’ का पहला चरण अगस्त 2024 के अंत में शुरू किया था। उस चरण में प्रमुख राजमार्गों, सैन्य शिविरों और प्रशासनिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया था। दूसरे चरण की शुरुआत ऐसे समय हुई है जब हाल ही में पंजगुर और हरनाई में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के अभियान में 41 कथित बीएलए लड़ाकों के मारे जाने की खबर सामने आई थी। बीएलए ने इन कार्रवाइयों को “बलूच लोगों के खिलाफ दमन” करार दिया और बदले की चेतावनी दी थी।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का बयान
हमलों के बाद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बयान जारी कर सुरक्षा बलों की सराहना की और कहा कि देश से आतंकवाद के पूरी तरह खत्म होने तक लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने इन हमलों के पीछे भारत का हाथ होने का आरोप भी लगाया। पाकिस्तान पहले भी बलूचिस्तान में हिंसा के मामलों में भारत पर आरोप लगाता रहा है, जबकि भारत इन आरोपों को खारिज करता आया है।
बलूचिस्तान: संसाधनों से समृद्ध, विकास में पिछड़ा
भौगोलिक दृष्टि से पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत बलूचिस्तान प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है, लेकिन सामाजिक-आर्थिक सूचकांकों में यह देश के अन्य हिस्सों से काफी पीछे है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी ढांचे की कमी लंबे समय से यहां असंतोष का कारण रही है। प्रांत की सीमाएं अफगानिस्तान और ईरान से लगती हैं, जिससे सुरक्षा चुनौतियां और जटिल हो जाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि विकास और संसाधनों के बंटवारे को लेकर स्थानीय आबादी में गहरा असंतोष है, जिसे अलगाववादी संगठन अपने समर्थन आधार के रूप में इस्तेमाल करते हैं।
बीएलए का एजेंडा
बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) को पाकिस्तान, अमेरिका और कुछ अन्य देशों ने आतंकवादी संगठन घोषित किया है। इसकी स्थापना 2000 के दशक की शुरुआत में हुई और यह बलूचिस्तान की स्वतंत्रता की मांग करता है। बीएलए का आरोप है कि बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों विशेषकर गैस, खनिज और बंदरगाहों का शोषण किया जा रहा है और स्थानीय लोगों को उसका लाभ नहीं मिल रहा। संगठन अक्सर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों, सरकारी प्रतिष्ठानों और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) से जुड़े प्रोजेक्ट्स को निशाना बनाता है। गुरिल्ला रणनीति अपनाते हुए बीएलए पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में छिपकर हमले करता है और तुरंत पीछे हट जाता है।
CPEC और विदेशी निवेश पर असर
ग्वादर बंदरगाह और CPEC परियोजनाएं बलूचिस्तान में बड़े पैमाने पर चल रही हैं। हाल के वर्षों में अलगाववादियों ने विदेशी नागरिकों और परियोजनाओं से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया है। विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा हिंसा से विदेशी निवेश और चीन के साथ चल रही परियोजनाओं पर असर पड़ सकता है। सुरक्षा हालात बिगड़ने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की छवि भी प्रभावित हो सकती है।
बीएलए के ‘ऑपरेशन हेरोफ’ के दूसरे चरण ने बलूचिस्तान में सुरक्षा स्थिति को और नाजुक बना दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या स्थिति और बिगड़ती है या सरकार और विद्रोही गुटों के बीच किसी प्रकार की बातचीत की संभावना बनती है। फिलहाल, बलूचिस्तान एक बार फिर हिंसा और अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है, जिसका असर न केवल पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा पर, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता पर भी पड़ सकता है।