वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर आक्रामक कूटनीतिक तेवर दिखाते हुए एक साथ तीन देशों ब्रिटेन, क्यूबा कनाडा को निशाने पर लिया है। क्यूबा पर तेल आपूर्ति को लेकर टैरिफ की धमकी, कनाडा के विमानों के सर्टिफिकेशन और आयात पर भारी शुल्क की चेतावनी, तथा ब्रिटेन की चीन से बढ़ती नजदीकी पर तीखी टिप्पणी—इन कदमों ने वैश्विक स्तर पर नई हलचल पैदा कर दी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कड़ा रुख ऐसे समय में सामने आया है जब ट्रंप प्रशासन घरेलू मोर्चे पर दबाव झेल रहा है। इमिग्रेशन कार्रवाई को लेकर देश में विरोध बढ़ रहा है, वहीं डेमोक्रेट पार्टी के साथ टकराव के चलते संघीय सरकार पर शटडाउन का खतरा भी मंडरा रहा है। ऐसे में ट्रंप का यह बहुस्तरीय आक्रामक रुख ध्यान भटकाने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।
ब्रिटेन-चीन ‘रीसेट’ पर ट्रंप की तल्खी
ट्रंप ने ब्रिटेन को चीन के साथ बढ़ते आर्थिक संबंधों को लेकर चेतावनी दी है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि बीजिंग के साथ व्यापार बढ़ाना “खतरनाक” साबित हो सकता है। हालांकि उन्होंने अपने बयान का विस्तृत आधार सार्वजनिक नहीं किया। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने चीन यात्रा के दौरान राष्ट्रपति शी चिनफिंग से करीब तीन घंटे की लंबी बातचीत की। इस मुलाकात के बाद स्टार्मर ने दोनों देशों के रिश्तों में “रीसेट” का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन को चीन के बाजार तक बेहतर पहुंच, कम टैरिफ, निवेश समझौते और वीजा-मुक्त यात्रा जैसे मुद्दों पर प्रगति की उम्मीद है।
स्टार्मर 2018 के बाद चीन का दौरा करने वाले पहले ब्रिटिश प्रधानमंत्री हैं। ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था फिलहाल कमजोर वृद्धि दर और निवेश की कमी से जूझ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे में लंदन बीजिंग के साथ आर्थिक सहयोग को अवसर के रूप में देख रहा है।
ब्रिटेन के एक मंत्री ने ट्रंप की टिप्पणी से असहमति जताते हुए कहा कि ब्रिटेन चीन के साथ संबंध खुली आंखों से आगे बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री स्टार्मर ने भी स्पष्ट किया कि ब्रिटेन को अमेरिका और चीन में से किसी एक को चुनने की जरूरत नहीं है। उनका कहना है कि राष्ट्रीय हित सर्वोपरि है और संतुलित विदेश नीति अपनाई जाएगी। विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका को आशंका है कि यदि उसके पारंपरिक सहयोगी चीन के साथ आर्थिक रूप से और गहरे जुड़ते हैं, तो इससे वैश्विक शक्ति संतुलन पर असर पड़ सकता है।
क्यूबा पर टैरिफ की धमकी, मेक्सिको ने रोकी तेल आपूर्ति
ट्रंप ने क्यूबा को “राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा” बताते हुए घोषणा की है कि जो भी देश क्यूबा को तेल सप्लाई करेगा, उस पर अमेरिका नए टैरिफ लगाएगा। इसके लिए उन्होंने राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करते हुए एक कार्यकारी आदेश को मंजूरी दी है। हालांकि आदेश में टैरिफ की दर या सीधे प्रभावित देशों का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। क्यूबा की सरकारी मीडिया ने इस कदम को आक्रामक और जनविरोधी बताया है। हवाना का कहना है कि तेल आपूर्ति बाधित होने से देश में बिजली उत्पादन, कृषि कार्य, पेयजल आपूर्ति और स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती हैं।
ट्रंप प्रशासन पहले भी क्यूबा पर कड़े प्रतिबंध लगाता रहा है। हाल के महीनों में उन्होंने दावा किया है कि क्यूबा की आर्थिक स्थिति तेजी से बिगड़ रही है। पहले क्यूबा को वेनेजुएला से पर्याप्त तेल मिलता था, लेकिन वेनेजुएला पर कार्रवाई और क्षेत्रीय अस्थिरता के बाद आपूर्ति कम हो गई है। इस बीच, मेक्सिको ने क्यूबा को तेल की आपूर्ति अस्थायी रूप से रोक दी है। आंकड़ों के अनुसार, क्यूबा को मिलने वाली कुल तेल आपूर्ति में मेक्सिको की हिस्सेदारी 44 प्रतिशत, वेनेजुएला की 33 प्रतिशत और रूस की लगभग 10 प्रतिशत थी।
मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय अमेरिका के दबाव में नहीं, बल्कि मेक्सिको का “संप्रभु फैसला” है। उन्होंने कहा कि भविष्य में आपूर्ति बहाल करने पर स्थिति के अनुसार निर्णय लिया जाएगा। क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज कैनेल ने अमेरिकी कदम की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका को क्यूबा पर किसी प्रकार का समझौता थोपने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
कनाडा के विमानों पर 50% टैरिफ की चेतावनी
ट्रंप ने कनाडा के खिलाफ भी सख्त आर्थिक कदम उठाने के संकेत दिए हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि कनाडा ने अमेरिकी कंपनी गल्फस्ट्रीम के कुछ बिजनेस जेट विमानों को मंजूरी नहीं दी, तो अमेरिका कनाडा में बने विमानों पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकता है। ट्रंप ने इंटरनेट मीडिया पर लिखा कि गल्फस्ट्रीम के विमानों को तुरंत स्वीकृति नहीं मिली तो कनाडा से आने वाले विमानों पर भारी शुल्क लगाया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने बांबार्डियर के ग्लोबल एक्सप्रेस विमानों का सर्टिफिकेशन रद करने की संभावना भी जताई है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को लेकर पहले से तनाव है। विमानन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि आर्थिक या राजनीतिक कारणों से विमानों का सर्टिफिकेशन रद किया गया, तो इससे वैश्विक विमानन सुरक्षा ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में 5,000 से अधिक कनाडा-निर्मित विमान पंजीकृत हैं। कई अमेरिकी क्षेत्रीय एयरलाइंस कनाडा में बने विमानों पर निर्भर हैं। ऐसे में संभावित टैरिफ छोटे शहरों की हवाई कनेक्टिविटी को प्रभावित कर सकते हैं। बांबार्डियर ने बयान जारी कर कहा है कि वह अमेरिकी और कनाडाई सरकारों के संपर्क में है और उम्मीद है कि मामला बातचीत से सुलझ जाएगा।
अल्बर्टा अलगाववाद पर भी सियासी हलचल
ट्रंप प्रशासन ने कनाडा पर दबाव बढ़ाने के क्रम में अल्बर्टा प्रांत के अलगाववादी समूह ‘अल्बर्टा प्रॉस्पैरिटी प्रोजेक्ट’ के साथ तीन बैठकें की हैं। यह समूह कनाडा के पश्चिमी प्रांत को अलग देश बनाने के लिए जनमत संग्रह की मांग कर रहा है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इन बैठकों पर सवाल उठाते हुए अमेरिका से कनाडा की संप्रभुता का सम्मान करने को कहा है। कार्नी ने कहा कि ट्रंप के साथ हर मुलाकात में उन्होंने इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख रखा है। उन्होंने यह भी कहा कि अल्बर्टा के मामले में ट्रंप ने उनसे सीधे तौर पर कभी चर्चा नहीं की। विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका किसी प्रांत के अलगाववादी आंदोलन से संवाद करता है, तो यह द्विपक्षीय संबंधों में संवेदनशील मोड़ साबित हो सकता है।
घरेलू दबाव और वैश्विक आक्रामकता
ट्रंप का यह आक्रामक रुख ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका के भीतर इमिग्रेशन नीति को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हैं। डेमोक्रेट पार्टी के साथ बजट और नीतिगत टकराव के कारण संघीय सरकार पर शटडाउन का खतरा भी बना हुआ है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि ट्रंप अक्सर घरेलू आलोचनाओं के बीच अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर सख्त बयान देकर अपने समर्थक आधार को मजबूत करने की कोशिश करते हैं। हालांकि, आलोचकों का तर्क है कि इस तरह की टैरिफ-आधारित कूटनीति से अमेरिका के पारंपरिक सहयोगियों के साथ संबंध और जटिल हो सकते हैं।
कूटनीतिक हलकों में अनिश्चितता
ब्रिटेन, क्यूबा और कनाडा के साथ उभरते तनाव ने वैश्विक बाजारों और कूटनीतिक हलकों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। फिलहाल इन घोषणाओं का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या अमेरिका औपचारिक रूप से टैरिफ लागू करता है या बातचीत के जरिए समाधान निकलता है। स्पष्ट है कि ट्रंप प्रशासन ने वैश्विक मंच पर सख्त रुख अपनाया है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या यह रणनीति अमेरिका को कूटनीतिक बढ़त दिलाएगी या उसके पारंपरिक साझेदारों के साथ दूरी बढ़ाएगी।