एचडीएफसी चेयरमैन का इस्तीफा चिंताजनक
पूरी दुनिया में इस समय ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के छेड़े गए युद्ध के कारण आर्थिक संकट कायम हो गया है
पूरी दुनिया में इस समय ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के छेड़े गए युद्ध के कारण आर्थिक संकट कायम हो गया है। तेल और गैस की आपूर्ति में बाधा पड़ने का असर तमाम क्षेत्रों में पड़ रहा है। ये युद्ध कब और कैसे रुकेगा और जो नुकसान दुनिया को हो रहा है, उसकी भरपाई कैसे होगी, इन कठिन सवालों से बाकी देशों के साथ भारत भी जूझ रहा है। लेकिन इस बीच भारतीय अर्थव्यवस्था में एक और घबराहट भरी हलचल देखने मिली। जिसकी वजह से एक दिन में एचडीएफसी को शेयर बाजार में एक लाख करोड़ रूपए का घाटा उठाना पड़ा है। इतना बड़ा घाटा भले ही कंपनी के नाम दर्ज है, मगर इसका भुगतान आखिरकार बैंक के खाताधारकों को ही किसी न किसी तरह से करना पड़ेगा।
दरअसल देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंक एचडीएफसी के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने बुधवार देर रात बोर्ड से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने बैंक के अंदर कुछ घटनाओं को अपने व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप न बताते हुए इस्तीफा दिया। यह महज एक शीर्ष पदाधिकारी का पद छोड़ने जैसी सामान्य घटना नहीं है। बल्कि इसमें असली सवाल नैतिकता और भरोसे का है। अतनु चक्रवर्ती ने अपने इस्तीफा पत्र में लिखा है कि, 'पिछले दो वर्षों में बैंक के अंदर जो कुछ घटनाएं और चलन मैंने देखा है, वे मेरे व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं हैं। यही मेरे इस फैसले का आधार है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 'मेरे इस्तीफे का कोई अन्य सामग्री कारण नहीं है, सिवाय ऊपर बताए गए के।'
उन्होंने कहा कि बीते दो सालों में बैंक के अंदर ऐसी घटनाएं हुई है, जो तौर तरीके अपनाए गए, वो उनसे सहमत नहीं हैं। उन्होंने बैंक के कॉरपोरेट गवर्नेंस पर सवाल उठाते हुए पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस आकस्मिक इस्तीफे और उसमें बताए कारणों ने निवेशकों का भरोसा हिला दिया, और इसका नतीजा ये रहा कि बैंक के शेयर 8 प्रतिशत तक टूट गए। स्थिति इतनी बिगड़ी की रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को तुरंत दखल देना पड़ा। आरबीआई ने साफ किया कि बैंक की वित्तीय स्थिति मजबूत है, गवर्नेंस में कोई बड़ी चिंता नहीं है। वहीं बैंक मैनेजमेंट ने तुरंत कदम उठाते हुए केकी मिस्त्री को अंतरिम पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त कर दिया है। मिस्त्री ने भी पद संभालते ही बयान जारी किया और कहा कि बैंक के अंदर किसी तरह का शक्तिसंघर्ष नहीं है।
अब शुक्रवार को एचडीएफसी के शेयर संभलते हैं या नहीं, ये देखना होगा। लेकिन गुरुवार को जो गिरावट आई है, वह कोविड के बाद एचडीएफसी के स्टॉक में दूसरी बड़ी गिरावट कही जा रही है। शेयर गिरने के चलते बैंक के मार्केट कैप में एक लाख करोड़ रुपये की बड़ी गिरावट आई है। अतनु चक्रवर्ती ने इस्तीफे में ये तो बताया है कि बैंक के भीतर कुछ ऐसा चल रहा है, जो उन्हें नागवार गुजरा, लेकिन खुलकर फिलहाल उन्होंने किसी गड़बड़ी की तरफ इशारा नहीं किया है। ऐसे में आरबीआई को अब और ज्यादा सतर्क रहते हुए पूरे मामले को समझने और तह तक पहुंचने की जरूरत है।
दरअसल इस इस्तीफे के बाद आरबीआई ने कहा है कि 'एचडीएफसी बैंक डोमेस्टिक सिस्टमैटिकली इंपॉर्टेंट बैंक (ष्ठ-स्ढ्ढक्च) है जिसकी वित्तीय स्थिति मजबूत है। इसका प्रोफेशनल बोर्ड है और योग्य मैनेजमेंट टीम है। हमारे पीरियोडिकल एसेसमेंट के आधार पर बैंक के संचालन या गवर्नेंस को लेकर ऑन रिकॉर्ड किसी तरह की चिंता नहीं है। बैंक के पास पर्याप्त पूंजी है और पर्याप्त लिक्विडिटी के साथ बैंक की आर्थिक स्थिति संतोषप्रद है।' आरबीआई ने यह भी कहा कि केंद्रीय बैंक आगे एचडीएफसी बैंक के बोर्ड और मैनेजमेंट से संपर्क बनाए रखेगा। लेकिन क्या इस बयान के बाद निवेशकों का भरोसा बैंक पर वापस बनेगा और क्या इस बैंक के लाखों-करोड़ों ग्राहकों के मन में उठ रही शंकाएं दूर हो जाएंगी। क्योंकि बैंकों से पैसे लूटकर देश से भागने या फिर बैंकों के खुद को दिवालिया घोषित कर ग्राहकों की जमापूंजी हड़पने की कई घटनाओं के बाद इस देश का आम आदमी खुद को दूध का जला महसूस करने लगा है। इसलिए बैंकिंग क्षेत्र में जरा सी गड़बड़ी की आशंका उसे याद दिलाती है कि अब छाछ भी फूंक-फूंक कर पीना है। शेयर बाजार में गिरावट छाछ फूंकने जैसी ही है।
पाठकों की जानकारी के लिए बता दें कि 1985 बैच के गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारी अतनु चक्रवर्ती सेवानिवृत्ति के बाद मई 2021 में एचडीएफसी बैंक बोर्ड में शामिल हुए थे। उनके कार्यकाल के दौरान ही एचडीएफसी बैंक का एचडीएफसी के साथ विलय हुआ था, जिससे यह संपत्ति के आधार पर भारत का दूसरा सबसे बड़ा बैंक बना। एचडीएफसी और एचडीएफसी बैंक के बीच विलय करीब 40 अरब डॉलर का है। जो कि भारतीय कॉरपोरेट इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय लेनदेन है। इस विलय के बाद एचडीएफसी बैंक दुनिया का चौथा सबसे बड़ा बैंक बन गया है। एचडीएफसी को नयी ऊंचाइयों पर पहुंचाने का ही शायद परिणाम था कि उनकी नियुक्ति के तीन साल पूरे होने के बाद मई 2024 में दोबारा उनकी नियुक्ति तीन साल के लिए हुई, जिसकी समयसीमा 4 मई, 2027 को खत्म होने वाली थी। लेकिन अगले साल तक इंतजार न कर श्री चक्रवर्ती ने पहले ही इस्तीफा दे दिया।
आईएएस अधिकारी रहते हुए अतनु चक्रवर्ती ने वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों और विनिवेश सचिव के रूप में अहम भूमिका निभाई हैं। उनके पास पब्लिक पॉलिसी और वित्त प्रबंधन में काम का लंबा अनुभव भी है। जाहिर है उनके कारण एचडीएफसी को काफी लाभ पहुंचा, लेकिन अब उनके इस्तीफे के बाद जो गंभीर सवाल खड़े हुए हैं, क्या बैंक उन पर विचार करेगा। क्या देश को कभी ये पता चल पाएगा कि आखिर ऐसी कौन सी चीजें बैंक के भीतर चल रही थीं जिनकी वजह से श्री चक्रवर्ती को इस्तीफे जैसा बड़ा कदम उठाना पड़ा। हालांकि वे भी समझते होंगे कि उनके इस्तीफे के बाद शेयर बाजार पर क्या असर पड़ सकता है, फिर भी उन्होंने ये बड़ा कदम उठाया है। तो अब उन कारणों की पड़ताल और उनमें सुधार होना चाहिए। क्योंकि सवाल देश की आम जनता की पूंजी का है, जिसकी वजह से एचडीएफसी बड़ा बैंक बना हुआ है।