आशंकाओं को सही साबित किया सीजेपी ने

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान 'कॉकरोच' एवं 'परजीवी' शब्दों का इस्तेमाल मौखिक प्रतिक्रिया में किया;

By :  Deshbandhu
Update: 2026-06-07 21:30 GMT

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान 'कॉकरोच' एवं 'परजीवी' शब्दों का इस्तेमाल मौखिक प्रतिक्रिया में किया। जिसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी नाम का एक आंदोलन सोशल मीडिया पर खड़ा हुआ। महाराष्ट्र के संभाजीनगर निवासी अभिजीत दिपके तब अमेरिका में पढ़ रहे थे, उन्होंने वहीं से इसे बनाया और डिजिटली स्वरूप में अवतरित हुई कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की आखिरकार भौतिक उपस्थिति शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर दिखलाई पड़ी। परन्तु उसने अपने बाबत पहले से फैली आशंकाओं को खरा साबित किया। केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफा होने तक आंदोलन का हुंकार भरने वाली सीजेपी के पांव शाम ढलने के पहले ही उखड़ गये। दोपहर तकरीबन साढ़े तीन बजे आयोजकों ने यह कहकर धरना समेट लिया कि, 'कोई यह न समझे कि हम पीछे हट गये हैं। यदि प्रधान ने 7 दिनों में अपना त्यागपत्र न दिया तो अगले शनिवार को इसी स्थान पर आंदोलन होगा।' आयोजकों का दावा चाहे जो हो और हफ्ते भर बाद यह आंदोलन फिर से होगा कि नहीं, यह तो 13- 14 जून को ही पता चलेगा, परन्तु शनिवार के घटनाक्रम ने उन लोगों को सही साबित कर दिया जो इस संगठन एवं आंदोलन की विश्वसनीयता पर पहले से ऊंगली उठा रहे थे। हालांकि यह तथ्य भी सही है कि मंच पर मौजूद लोगों की विश्वसनीयता पर भले सवाल हों, लेकिन जंतर-मंतर पर जुटे लोगों का गुस्सा एकदम सच्चा था। ये सारे लोग छात्रों को न्याय मिले इसी उम्मीद से वहां पहुंचे थे।

बता दें कि जस्टिस सूर्यकांत के बयान से उपजी नाराजगी 22 मई को नीट पेपर लीक होने और फिर सीबीएसई मार्किंग में गड़बड़ी से और बढ़ गई। इसने नाराज़ छात्रों व युवाओं को इस आंदोलन की शुरुआत करने का अवसर प्रदान कर दिया। उल्लेखनीय है कि नीट परीक्षा में करीब 23 लाख परीक्षार्थी शामिल हुए थे। नीट के रद्द होने से कई छात्र-छात्राओं ने आत्महत्या तक कर ली। वहीं सीबीएसई में रिजल्ट से करीब 18 लाख बच्चों का भविष्य दांव पर लगा है।

ऐसे वक्त में दिपके ने ऐलान कर दिया कि धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सीजेपी प्रदर्शन करेगी और उसका नेतृत्व करने वे स्वयं दिल्ली आयेंगे। इसके लिये 6 जून की तारीख घोषित थी। सीजेपी बनने के तत्काल बाद एवं खासकर प्रदर्शन के ऐलान के काफी पहले से दिपके व सीजेपी को लेकर कई आशंकाएं व्यक्त की जाने लगीं। माना गया कि यह भारतीय जनता पार्टी का वैसा ही सहयोगी संगठन है जैसा 2011 में 'इंडिया अगेंस्ट करप्शन' नामक संगठन बना था जिसका रूपांतरण नवम्बर, 2012 में आम आदमी पार्टी के रूप में हुआ था और जो सक्रिय राजनीति में उतरी। उसने दिल्ली में तीन बार सरकारें बनाईं। हालांकि उसकी अब राजधानी में सरकार नहीं रही पर पंजाब में वह सत्ता में है। बहुत तेजी से राजनीतिक परिदृश्य पर उभरी आप का इतिहास चाहे आंदोलनकारी रहा हो, परन्तु अपनी यात्रा में उस पर यह दाग गहरे लग गया है कि वह अप्रत्यक्ष तौर पर भारतीय जनता पार्टी की सहायक है। कई राज्यों में वह चुनावों में उतरी लेकिन उसके चलते भाजपा को जीतने में मदद ही मिलती रही है।

चूंकि दिपके भी कभी आप से जुड़े थे, लोगों ने संदेह जताया कि सीजेपी को भी भाजपा का प्रश्रय है। इस शंका को शनिवार की सुबह बल मिला जब अभिजीत के दिल्ली हवाईअड्डे पर उतरते ही स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने उन्हें वहीं जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की लिखित अनुमति थमा दी। सीजेपी ने इसे पहली जीत बताई लेकिन माना गया कि हर तरह के सरकार विरोधी धरना-प्रदर्शनों को बेरहमी से कुचलने वाली दिल्ली पुलिस ने सीजेपी के साथ केन्द्र के इशारे पर ही नर्म व्यवहार किया। हालांकि इसे दिपके एवं सीजेपी के प्रवक्ता यह कहकर खारिज कर चुके हैं कि यह एक सामान्य व रूटीन नरेटिव है जो कोई भी राजनीतिक दल अपनी विरोधी पार्टी के लिये चलाता है।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी जिस तरह से हाथ में संविधान लेकर चलते हैं, उसी अंदाज़ में दिपके सुबह एयरपोर्ट से बाहर निकले व लोगों को बाबा आंबेडकर पर लिखी एक किताब दिखाकर उनका अभिवादन स्वीकार किया। दूसरी ओर धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते प्रदर्शन में संविधान निर्माता बाबा साहेब आंबेडकर के पोस्टर लहरा रहे थे और 'जय भीम' के नारे भी सतत गूंजते रहे। कई विश्लेषक मानते हैं कि कांग्रेस तथा राहुल गांधी की काट के तौर पर भाजपा दिपके को आगे बढ़ा रही है।

वैसे मंजूरी से उत्साहित होकर सुबह से ही बड़ी तादाद में युवा, छात्र, अन्य समर्थक जंतर-मंतर पर जुट गये थे। इस प्रदर्शन के जरिये सीजेपी ने अपने इर्द-गिर्द छाई धुंध को कई तरह से साफ करने का प्रयास किया। हालांकि अब तक शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर अपनी कार्यपद्धति व परम्परा के मुताबिक केन्द्र सरकार ने कोई संकेत नहीं दिये हैं। तो भी बहुतों का मानना है कि सीजेपी के रूप में हम एक सियासी दल के उद्भव को ही देख रहे हैं जो भाजपा का मददगार होगा। डिजिटल प्लेटफॉर्म से सड़क पर पहली बार उतरने वाले इस संगठन का स्वरूप जितना शंकास्पद है, उसका भविष्य उतना ही संदेहों के घेरे में है।

बहरहाल, कॉकरोच जनता पार्टी का ये आंदोलन किस मुकाम पर पहुंचेगा, इससे भाजपा को फायदा होगा या विपक्ष को, क्या ये आंदोलन राजनैतिक बदलाव लाएगा या फिर लोगों के गुस्से को निकालने के लिए सेफ्टी वॉल्व जैसा इस्तेमाल होगा और फिर उसी ढर्रे पर सरकार चलेगी, ऐसे कई सवाल इस समय खड़े हुए हैं, जिनके जवाब तलाशने के लिए इंतजार और धैर्य के साथ पैनी निगाह रखनी होगी।

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