मोदी सरकार में बच्चों का भविष्य खतरे में!

नरेन्द्र मोदी के हिंदू-मुस्लिम एजेंडे को धर्म की रक्षा मानना और हिंदू जाग गया है जैसे बेतुके दावों पर यकीन करके इस देश ने किस तरह अपना भविष्य बर्बाद कर लिया है;

By :  Deshbandhu
Update: 2026-05-26 21:15 GMT

नरेन्द्र मोदी के हिंदू-मुस्लिम एजेंडे को धर्म की रक्षा मानना और हिंदू जाग गया है जैसे बेतुके दावों पर यकीन करके इस देश ने किस तरह अपना भविष्य बर्बाद कर लिया है, उसका ताजा उदाहरण सीबीएसई के बारहवीं परीक्षा के नतीजे हैं। भारत जैसे देश में शिक्षा व्यवस्था ऐसी ही है, जिसमें विद्यार्थियों की योग्यता का पैमाना परीक्षाओं में हासिल किए अंक ही होते हैं। तीन घंटे का एक प्रश्नपत्र कोई छात्र कैसे हल करता है और कितने अंक हासिल करता है, वही उसका भविष्य तय करता है। इसमें उसकी बाकी काबिलियत, साल भर की मेहनत, किसी सवाल को अलग तरह से देखने का नजरिया यह सब बेमानी हो जाता है। ऐसी व्यवस्था में बारहवीं कक्षा के परिणाम कितने अहम होते हैं, यह सब जानते हैं। कायदे से तो इस पूरी घिसी-पिटी व्यवस्था को ही दुरुस्त करने की जरूरत है, ताकि नयी पीढ़ी दुनिया में अपना स्थान बना पाए। लेकिन मोदी सरकार ने तो इस व्यवस्था को और बर्बाद करने का काम किया है। पाठक जानते हैं कि इस साल मूल्यांकन प्रणाली को त्रुटिरहित बनाने और परीक्षा परिणाम जल्द घोषित करने के नाम पर ऑनस्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली का इस्तेमाल किया गया। एनसीईआरटी के पूर्व निदेशक कृष्ण कुमार जैसे कुछ शिक्षाविदों व जानकारों ने तब भी आशंका जताई थी कि ओएसएम को बिना जांचे-परखे, जल्दबाजी में अपनाया गया है। लेकिन सीबीएसई ने इस पर ध्यान नहीं दिया। जब परिणाम आए तो बहुत से बच्चों ने निराशा जताई कि उन्हें उम्मीद के अनुरूप अंक नहीं मिले, इसलिए उन्होंने ओएसएम को ही जिम्मेदार ठहराया।

लेकिन बीते दो दिनों में तो एक ऐसी गड़बड़ी सामने आई जिसके बाद सवाल उठते हैं कि क्या सीबीएसई पर क्या कोई गिरोह हावी है, जो बच्चों का भविष्य दांव पर लगाकर मुनाफा कमा रहा है। दरअसल वेदांत नाम के एक बच्चे ने सोशल मीडिया पर लिखा कि फिजिक्स की जो उत्तरपुस्तिका उसकी बताई गई है, वह दरअसल उसकी है ही नहीं। उसके अक्षर और सीबीएसई की तरफ से दी गई उत्तरपुस्तिका में लिखे गए अक्षर बिल्कुल मेल नहीं खाते थे। वेदांत की शिकायत सामने आने पर एबीपी न्यूज की पत्रकार अजातिका सिंह ने उसके घर जाकर बातचीत की, जिसमें वेदांत ने अपनी तरफ से सबूत भी दिखाए कि वह किस तरह उत्तर लिखता है और इसमें कितने अलग तरीके से उत्तर दिए गए हैं। एक पत्रकार ने अपना कर्तव्य निभाया और मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया। लेकिन इससे पहले डीडी न्यूज के पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने वेदांत की पोस्ट पर लिखा कि 'क्या पाकिस्तानियों ने भी सीबीएसई के एग्ज़ाम्स दिए हैं?' दरअसल वेदांत की लोकेशन साउथ एशिया बताई गई तो दूरदर्शन के पत्रकार ने उसे सीधे पाकिस्तानी कह दिया। भाजपा समर्थक कई और लोगों ने वेदांत को जॉर्ज सोरोस के लिए काम करने वाला, पाकिस्तानी, देशद्रोही और न जाने क्या-क्या कहा।

भारतीय समाज नफरती राजनीति से ग्रस्त होकर मानसिक तौर पर कितना बीमार हो चुका है, यह उसका नायाब उदाहरण है। साउथ एशिया में ही भारत भी आता है, लेकिन चूंकि वेदांत की शिकायत से सीबीएसई और अंतत: मोदी सरकार की पोल खुल रही थी, इसलिए एक 17 साल के बच्चे की ट्रोलिंग में पढ़े-लिखे लोगों को हिचक नहीं हुई। वेदांत के अभिभावकों की पीढ़ी के तमाम लोगों के लिए यह गंभीर चेतावनी है कि उन्हें कितना सोच-समझकर वोट देना चाहिए। अगर वे मंदिर-मस्जिद के नाम पर वोट देते हैं, तो तय मानिए कि नफरत का अगला शिकार उनकी अपनी संतान होगी। बहरहाल, वेदांत के समर्थन में समाज में बड़े पैमाने पर लोगों ने आवाज उठाई, एक वकील ने उसके लिए केस तक लड़ने का प्रस्ताव दिया, इसके बाद अशोक श्रीवास्तव ने अपना ट्वीट डिलीट किया और किंतु-परंतु के साथ अफसोस जाहिर किया। हालांकि इसका यह अर्थ कतई नहीं है कि आईंदा किसी और मासूम को सही शिकायत पर ऐसे ट्रोल नहीं किया जाएगा। इस सरकार में निर्दोष को कटघरे में खड़ा करना ही सबसे आसान काम हो गया है।

वेदांत मामले में राहत इस बात की है कि सीबीएसई ने अपनी गलती मान ली है और सोमवार रात ट्वीट किया कि 'डियर वेदांत, फिजिक्स आंसर शीट को लेकर जो आपकी चिंता थी उस पर हमारा ध्यान दिलाने के लिए धन्यवाद। समीक्षा के बाद मामले की जांच कर ली गई है और आपकी आंसर शीट की सही कॉपी आपके रजिस्टर्ड ईमेल पते पर भेज दी गई है। साथ ही, आवश्यकता अनुसार आपके परिणाम को अपडेट करने की प्रक्रिया भी की जा रही है। हम आपके धैर्य की सराहना करते हैं और आपको अपने निरंतर सहयोग का आश्वासन देते हैं।'

इस ट्वीट में कहीं भी सीबीएसई ने एक छात्र को मानसिक संताप देने के लिए माफी नहीं मांगी, उल्टा उसके धैर्य की सराहना की। सीबीएसई में बैठे लोग, शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान और उन सबके ऊपर बैठे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बता दें कि छात्रों के पास धैर्य रखने के अलावा और रास्ता ही क्या है। ये लोग माफी मांगना शुरु करें तो अंतहीन सिलसिला चलेगा, क्योंकि अकेले वेदांत नहीं, कई छात्रों के साथ इसी तरह की गड़बड़ी हुई है। एक छात्रा ने बताया कि उत्तरपुस्तिका में पहला पृष्ठ बस उसका है, बाकी किसी पृष्ठ किसी और छात्र के लगे हुए हैं। ध्यान रहे कि जिन छात्रों के पास परिवार का संबल है, अच्छी आर्थिक स्थिति है, वे ही पुनर्मूल्यांकन के लिए फीस देने की स्थिति में होते हैं और गड़बड़ी मिलने पर सोशल मीडिया पर अपनी शिकायत दर्ज करा पाते हैं। भारत के ग्रामीण और आदिवासी अंचलों के छात्र क्या ऐसा कर पा रहे होंगे, यह भी विचारणीय है। क्या उनके साथ ऐसी ही धोखाधड़ी नहीं हुई होगी। क्या सीबीएसई समूचा मूल्यांकन फिर से करवाने की हिम्मत दिखाएगा या साल भर के प्रदर्शन के आधार पर सभी बच्चों को अंक दिए जाएंगे। किस तरह बच्चों के साथ न्याय होगा, यह गंभीर सवाल है। उससे भी गहन गंभीर बात यह है कि प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री कब तक अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ेंगे। नीट पेपर लीक के बाद कई बच्चों ने अपनी जान दे दी और सरकार के माथे पर एक शिकन नहीं आई। अब बारहवीं के छात्रों के साथ ऐसा खतरनाक खेल खेला गया है। मुमकिन है किसी सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी से भीतर-भीतर कोई सौदेबाजी हुई हो, जिसमें उनके फायदे के लिए बच्चों का भविष्य दांव पर लगाया गया है।

बता दें कि निसर्गा अधिकारी नाम के युवक ने 22 मई को ट्वीट लिखा कि- मैंने फरवरी में सीबीएसई के ओएसएम पोर्टल को हैक कर लिया था और ष्टश्वक्रञ्ज.ढ्ढठ्ठ को इसकी खामियों की सूचना दी थी, लेकिन वे उनमें से अधिकांश को ठीक नहीं कर पाए। मैंने इस बारे में एक विस्तृत ब्लॉग पोस्ट लिखा है। सवाल ये है कि जब सीबीएसई को बता दिया गया था कि उसका मूल्यांकन पोर्टल हैक हो सकता है, फिर भी उसने सुधारात्मक कदम क्यों नहीं उठाए। क्या मोदी सरकार के हाथ में बच्चों का भविष्य सुरक्षित है, यह भी समाज को सोचना होगा। 

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