महुआ मोईत्रा पर हमला चिंताजनक

महुआ मोइत्रा बुधवार को नादिया में टीएमसी ममता बनर्जी गुट के कार्यकर्ताओं की मीटिंग में शामिल होने गईं थी।;

By :  DB Desk
Update: 2026-07-02 21:30 GMT

प.बंगाल में सत्ता परिवर्तन के साथ ही विपक्ष से बदले की राजनीति का ऐसा दौर शुरु हुआ है, जो न केवल बंगाल के लोगों के लिए बल्कि पूरे देश के लिए चिंता का विषय होना चाहिए। तृणमूल कांग्रेस को हरा कर भाजपा ने भारी बहुमत से जीत हासिल की और सरकार बना ली। इसके बाद टीएमसी में बड़ी फूट भी डाली जा चुकी है, जिसमें करीब 60 विधायक और 20 सांसद ममता बनर्जी के खिलाफ हो गए हैं। 20 सांसदों ने तो एनसीपीआई नाम की अनजान सी पार्टी में विलय भी कर लिया। इसी तरह कई पार्षदों को भी भाजपा ने तोड़ लिया है। अपने विरोधी को पूरी तरह कुचलने के लिए उसे कमजोर करने की रणनीति यहीं तक सीमित रहती तब भी समझ आता कि भाजपा राजनीति के चलते ऐसा कर रही है। लेकिन जिस तरह ममता बनर्जी के साथ बने रहने वाले नेताओं पर हमले हो रहे हैं, वह किसी नजरिए से राजनीति नहीं है, बल्कि विशुद्ध गुंडागर्दी है। टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर भीड़ ने जैसा हमला किया था, वह वीडियो सार्वजनिक है, जिसमें नजर आ रहा है कि अभिषेक बनर्जी को बाकायदा हेलमेट पहनकर खुद को चोटिल होने से बचाना पड़ा। इसके बाद कुणाल घोष पर भी अंडे फेंककर हमला हुआ। अब टीएमसी की महिला सांसद महुआ मोईत्रा भाजपा के निशाने पर आई हैं।

महुआ मोइत्रा बुधवार को नादिया में टीएमसी ममता बनर्जी गुट के कार्यकर्ताओं की मीटिंग में शामिल होने गईं थी। तभी पार्टी ऑफिस पर प्रदर्शनकारियों ने अंडों और टमाटर की बौछार कर दी। इस हमले के दौरान महुआ मोईत्रा ने इसका वीडियो ही बना लिया और साथ ही टीएमसी का झंडा लहराकर जतला दिया कि वे ऐसे हमलों से डरने वाली नहीं हैं। गौरतलब है कि बुधवार 1 जुलाई को दोपहर करीब साढ़े तीन बजे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने एक वीडियो पोस्ट शेयर किया। वीडियो में महुआ मोइत्रा पार्टी ऑफिस बिल्डिंग की खिड़की से लोगों को अंडे फेंकते हुए दिखा रही हैं। उन्होंने वीडियो पोस्ट में आरोप लगाते हुए कहा, भाजपा समर्थक एक घंटे से ज्यादा समय से लगातार पार्टी ऑफिस की खिड़की को निशाना बनाकर अंडे और सब्जियां फेंक रहे हैं। मैंने डीजीपी से भी बात की है। पुलिस काफी देर के बाद मौके पर पहुंची, लेकिन पुलिस ने हमला करने वाले लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं की और सिर्फ तमाशा देखती रही। घटना के बाद उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि वह डटी रहेंगी और टीएमसी का यह झंडा भी लहराता रहेगा। भाजपा किसी हालत में उन्हें चुप कराने में कामयाब नहीं हो पाएगी।

बंगाल के ये हालत क्यों और कैसे बने इसके लिए अब भाजपा के शीर्ष नेताओं को जवाब देना ही होगा। क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खुद कहा था कि बदला नहीं बदलाव की राजनीति होगी, लेकिन 4 मई को परिणाम आने के साथ ही जिस तरह पहले टीएमसी के दफ्तरों पर हमले हुए और अब नेताओं पर हमले हो रहे हैं, उसे किसी तरह सभ्य समाज और लोकतांत्रिक राजनीति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

हैरानी की बात यह है कि बंगाल भाजपा के नेता इस घटना पर शर्मिंदगी महसूस करने की जगह बेतुके बयान दे रहे हैं। जब महुआ मोइत्रा ने कहा कि हमले भाजपा की शह पर हो रहे हैं, हमला करने वाले लोगों ने भाजपा का झंडा थामा हुआ था और साथ ही उन्होंने उन 16 लोगों के नाम बताए और कहा कि ये सभी उन पर हुई भीड़ की हिंसा के पीछे थे। इस पर बंगाल भाजपा के अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने पलटवार करते हुए कहा कि यह टीएमसी की अंदरुनी लड़ाई का परिणाम है। उन्होंने कहा कि पुलिस कैसे पहचान सकती है कि किसके पास जेब में अंडे हैं? इसे पकड़ने के लिए कोई मशीन नहीं है। मेटल डिटेक्टर अंडे का पता नहीं लगाते, तो क्या हम कोई नई मशीन लाएं। इससे बंगाल की छवि खराब हो रही है। वहीं पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखर्जी ने कहा कि उन्हें भगवान का शुक्रिया अदा करना चाहिए कि सिर्फ अंडा फेंका गया है। आगे लोग उन पर क्या-क्या फेंकने वाले हैं ये देखिएगा। कानून व्यवस्था पर सवाल उठाने पर उन्होंने कहा कि तो क्या उन पर फूल बरसाएं। अंडा फेंकने में क्या लॉ एंड ऑर्डर। भाजपा के मंत्री ने दावा किया कि टीएमसी नेताओं पर आम नागरिक अंडे फेंक रहे हैं।

इस तरह के बयान साबित कर रहे हैं कि भाजपा को इस बात का कोई अफसोस नहीं है कि जिस राज्य ने उसे पहली बार सत्ता सौंपी है, वहां के लोग सरेआम गुंडागर्दी करने में नहीं हिचक रहे हैं, निर्वाचित प्रतिनिधियों पर हमले कर रहे हैं और यहां तक कि महिला सांसद पर वार करने से नहीं झिझक रहे हैं। बंगाल की पहचान सभ्य, प्रगतिशील, अध्ययनशील, तार्किक बुद्धि संपन्न, सांस्कृतिक रूझान वाले राज्य की रही है। पहले कांग्रेस, फिर वामदल और तृणमूल कांग्रेस की सरकारें यहां रहीं। राजनैतिक लड़ाई-झगड़े भी हुए, लेकिन इस तरह की इतनी ज्यादा घटनाएं नहीं हुईं। पहले क्यों नहीं हुईं और अब क्यों हो रही हैं, यह बंगाल के समाज को तो सोचना ही होगा, बाकी देश भी विचार करे कि बदले की राजनीति से आखिर किसको फायदा होने वाला है।

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