रूस ने जेलेंस्की को दिया मॉस्को आने का न्योता, युद्ध के बीच शांति वार्ता की कोशिशें तेज
रूसी और यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडलों के बीच वार्ता का अगला दौर रविवार को अबू धाबी में निर्धारित है। माना जा रहा है कि इस बैठक में मानवीय मुद्दों, युद्धबंदियों की अदला-बदली और बुनियादी ढांचे पर हमलों को लेकर चर्चा हो सकती है। हालांकि, क्रेमलिन ने उन खबरों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि दोनों देश एक-दूसरे के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले रोकने पर सहमत हो गए हैं।
मॉस्को/कीव। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच कूटनीतिक हलचल तेज होती दिख रही है। क्रेमलिन ने गुरुवार को कहा कि उसने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की को शांति वार्ता के लिए मॉस्को आने का निमंत्रण दोहराया है। क्रेमलिन के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव ने कहा कि यदि जेलेंस्की मॉस्को आते हैं, तो उनकी सुरक्षा की पूरी गारंटी दी जाएगी। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अब तक कीव की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के बीच युद्ध में मारे गए सैनिकों के शवों का आदान-प्रदान हुआ है और नए दौर की वार्ता की तैयारी की जा रही है।
अबू धाबी में वार्ता का नया दौर
रूसी और यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडलों के बीच वार्ता का अगला दौर रविवार को अबू धाबी में निर्धारित है। माना जा रहा है कि इस बैठक में मानवीय मुद्दों, युद्धबंदियों की अदला-बदली और बुनियादी ढांचे पर हमलों को लेकर चर्चा हो सकती है। हालांकि, क्रेमलिन ने उन खबरों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि दोनों देश एक-दूसरे के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले रोकने पर सहमत हो गए हैं। रूस का कहना है कि इस तरह की अटकलों पर आधिकारिक बयान देना जल्दबाजी होगी।
सूमी क्षेत्र में एक और गांव पर कब्जा
युद्ध के मोर्चे पर भी गतिविधियां जारी हैं। रूसी रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उसकी सेनाओं ने यूक्रेन के सूमी क्षेत्र में स्थित बिला बेरेजा गांव पर कब्जा कर लिया है। सूमी क्षेत्र रूस की सीमा से सटा हुआ है और यहां हाल के महीनों में झड़पें तेज हुई हैं। रूस का कहना है कि यह कार्रवाई उसकी सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है, जबकि यूक्रेन ने इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है।
जापोरिजिया में ड्रोन हमला, तीन की मौत
दूसरी ओर, यूक्रेन के दक्षिण-पूर्वी जापोरिजिया क्षेत्र में रूसी ड्रोन हमले में तीन लोगों की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए। मृतकों में 26 और 50 वर्ष की दो महिलाएं तथा 62 वर्षीय एक पुरुष शामिल हैं। यूक्रेन की वायु सेना के अनुसार, रूस ने रात भर में 105 ड्रोन दागे, जिनमें से 84 को मार गिराया गया। आपातकालीन सेवा के अधिकारियों ने बताया कि एक निजी इमारत पूरी तरह नष्ट हो गई। जापोरिजिया के गवर्नर इवान फेडोरोव ने कहा कि पिछले 24 घंटों में रूस ने इस क्षेत्र की 34 बस्तियों पर 841 हमले किए हैं। इस क्षेत्र के बड़े हिस्से पर रूस पहले ही कब्जा कर चुका है और हाल के दिनों में उसने अपनी पकड़ और मजबूत की है।
कादिरोव का युद्ध तेज करने का आह्वान
जहां एक ओर शांति वार्ता की कोशिशें चल रही हैं, वहीं रूस के चेचन्या गणराज्य के क्रेमलिन समर्थित नेता रमजान कादिरोव ने युद्ध को और तेज करने की वकालत की है। उन्होंने कहा कि रूस को “निर्णायक जीत” के लिए सैन्य दबाव बढ़ाना चाहिए। कादिरोव की यह टिप्पणी उन कट्टरपंथी हलकों की सोच को दर्शाती है, जो मानते हैं कि युद्ध के मैदान में रूस की स्थिति मजबूत है और अब समझौते के बजाय आक्रामक रणनीति अपनानी चाहिए।
2022 के बाद से जारी संघर्ष
जापोरिजिया उन चार यूक्रेनी क्षेत्रों में से एक है, जिन पर रूस ने 2022 में पूर्ण पैमाने पर आक्रमण शुरू करने के बाद से कब्जा करने का दावा किया है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इन क्षेत्रों के विलय को मान्यता नहीं दी है। युद्ध के तीसरे वर्ष में प्रवेश कर चुके इस संघर्ष ने हजारों लोगों की जान ली है और लाखों को विस्थापित किया है। दोनों पक्ष समय-समय पर वार्ता की बात करते रहे हैं, लेकिन जमीनी हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं।
शांति की संभावना या रणनीतिक दबाव?
विश्लेषकों का मानना है कि जेलेंस्की को मास्को बुलाने का प्रस्ताव एक प्रतीकात्मक कूटनीतिक कदम हो सकता है। यूक्रेन अब तक इस बात पर जोर देता रहा है कि किसी भी वार्ता से पहले रूस को कब्जे वाले क्षेत्रों से पीछे हटना होगा। वहीं, रूस का कहना है कि नए “क्षेत्रीय यथार्थ” को स्वीकार किए बिना समाधान संभव नहीं है। अबू धाबी में होने वाली वार्ता को लेकर उम्मीदें और संदेह दोनों बने हुए हैं। एक ओर सैनिकों के शवों का आदान-प्रदान जैसे मानवीय कदम सकारात्मक संकेत देते हैं, तो दूसरी ओर लगातार हो रहे ड्रोन हमले और क्षेत्रीय कब्जे के दावे बताते हैं कि जमीनी स्तर पर संघर्ष जारी है।
अबू धाबी में वार्ता पर टिकी निगाहें
रूस द्वारा जेलेंस्की को दिया गया निमंत्रण, कादिरोव की आक्रामक टिप्पणी, सूमी और जापोरिजिया में बढ़ती सैन्य गतिविधियां ये सभी संकेत देते हैं कि युद्ध और कूटनीति साथ-साथ चल रहे हैं। अब नजरें अबू धाबी में प्रस्तावित वार्ता पर टिकी हैं। क्या यह संवाद किसी ठोस प्रगति का रास्ता खोलेगा, या फिर संघर्ष की रेखाएं और गहरी होंगी यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल, युद्ध और शांति के बीच संतुलन की कोशिशें जारी हैं, लेकिन जमीन पर हालात अब भी अस्थिर बने हुए हैं।