चीन के सबसे बड़े बांध पर मंडराया खतरा! ब्रह्मपुत्र में बढ़ सकता है बाढ़ का जोखिम, भूकंप की भी आशंका

चीन दक्षिण-पूर्वी तिब्बत के मेडोग क्षेत्र में इस विशाल जलविद्युत परियोजना को विकसित कर रहा है। इस पर लगभग 168 अरब डॉलर खर्च होने का अनुमान है। परियोजना से करीब 60 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।;

Update: 2026-10-27 07:05 GMT

बीजिंग/नई दिल्ली: चीन के तिब्बत क्षेत्र में ब्रह्मपुत्र नदी पर बनाई जा रही दुनिया की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं में शामिल मेगा बांध योजना को लेकर अब चीनी वैज्ञानिकों ने ही गंभीर चिंताएं जताई हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन के कारण नदी के प्रवाह में बदलाव आ सकता है। इससे अत्यधिक जलप्रवाह और बाढ़ जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ने की आशंका है। इसके अलावा, प्रस्तावित बांध के नीचे सक्रिय भूगर्भीय दरारों की मौजूदगी भूकंप, भूस्खलन और जमीन धंसने जैसे जोखिमों को भी गंभीर बनाती है। इस परियोजना का असर केवल चीन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत और दक्षिण एशिया के दूसरे क्षेत्रों की जल सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।

700 साल के आंकड़ों से सामने आई नदी के बहाव की कहानी

हांगकांग के समाचार पत्र साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की 26 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी विज्ञान अकादमी और युन्नान विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने दक्षिण-पूर्वी तिब्बती पठार में पेड़ों के छल्लों से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण किया। इसकी मदद से वैज्ञानिकों ने वर्ष 1325 से 2020 तक नदी के प्रवाह का ऐतिहासिक रिकॉर्ड तैयार किया। इसके बाद जलवायु संबंधी आंकड़ों और कंप्यूटर मॉडल के जरिए भविष्य में नदी के व्यवहार का अनुमान लगाया गया। आठ अक्टूबर को चाइना साइंस बुलेटिन में प्रकाशित इस अध्ययन में आशंका जताई गई कि आने वाले समय में नदी के प्रवाह और अत्यधिक पानी वाली घटनाओं में वृद्धि हो सकती है। शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया कि जल संसाधनों के विकास, बांधों के निर्माण और पानी के भंडारण की योजना बनाते समय जलवायु परिवर्तन से पैदा होने वाली परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है। उनके अनुसार, पुराने जल प्रवाह के आंकड़ों के आधार पर भविष्य की योजना बनाना पर्याप्त नहीं हो सकता।

तिब्बती पठार की गर्मी बढ़ा रही मुश्किलें

तिब्बती पठार को दुनिया के उन क्षेत्रों में गिना जाता है, जहां तापमान वैश्विक औसत की तुलना में तेजी से बढ़ रहा है। तापमान में वृद्धि का असर हिमनदों, बर्फ के भंडार और जलचक्र पर पड़ रहा है। इससे नदियों में पानी की उपलब्धता और उसके मौसमी प्रवाह में बदलाव की आशंका बढ़ती है। तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी को यारलुंग त्सांगपो कहा जाता है। भारत में प्रवेश करने के बाद यही नदी ब्रह्मपुत्र के नाम से जानी जाती है। यह पूर्वोत्तर भारत के लिए महत्वपूर्ण जलस्रोत है और असम समेत कई क्षेत्रों की कृषि, आजीविका तथा पारिस्थितिकी से जुड़ी हुई है। यदि नदी के प्रवाह में बड़े बदलाव आते हैं, तो इसका असर बाढ़ प्रबंधन, जल संसाधनों के उपयोग और नदी पर निर्भर आबादी पर पड़ सकता है। हालांकि, इन संभावित प्रभावों की वास्तविक गंभीरता भविष्य के जलवायु परिदृश्यों और परियोजना के संचालन पर निर्भर करेगी।

बांध के नीचे सक्रिय भूगर्भीय दरारों से भूकंप का खतरा

परियोजना को लेकर चिंता केवल जलवायु परिवर्तन तक सीमित नहीं है। जुलाई में चीनी भूवैज्ञानिकों ने प्रस्तावित बांध के नीचे मौजूद सक्रिय भूगर्भीय दरारों से जुड़े जोखिमों पर भी सवाल उठाए थे। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, विशेषज्ञों ने भूस्खलन और जमीन धंसने की आशंकाओं को कम करने के लिए ढलानों को मजबूत बनाने तथा अन्य सुरक्षा उपाय अपनाने की सिफारिश की थी। भूगर्भीय रूप से सक्रिय क्षेत्रों में विशाल बांधों का निर्माण विशेष सावधानी की मांग करता है। ऐसे स्थानों पर भूकंप, चट्टानों के खिसकने और भूस्खलन जैसी घटनाएं परियोजना की सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकती हैं। हालांकि, इन जोखिमों के आधार पर किसी बड़े हादसे की निश्चित भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। इसके लिए विस्तृत भूवैज्ञानिक अध्ययन और लगातार निगरानी जरूरी है।

168 अरब डॉलर की परियोजना

चीन दक्षिण-पूर्वी तिब्बत के मेडोग क्षेत्र में इस विशाल जलविद्युत परियोजना को विकसित कर रहा है। इस पर लगभग 168 अरब डॉलर खर्च होने का अनुमान है। परियोजना से करीब 60 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसका उद्देश्य चीन की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देना है। हालांकि, परियोजना का विशाल आकार और दुर्गम भौगोलिक स्थिति इसके निर्माण, सुरक्षा और पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर सवाल खड़े करते हैं।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह परियोजना?

ब्रह्मपुत्र नदी भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए रणनीतिक और पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है। चीन में नदी के ऊपरी हिस्से पर बड़े पैमाने पर बांध निर्माण होने से भारत में जल प्रवाह, बाढ़ की पूर्व चेतावनी और नदी प्रबंधन से संबंधित चिंताएं पैदा हो सकती हैं। इसलिए परियोजना के संभावित प्रभावों का आकलन करने के साथ भारत और चीन के बीच नदी संबंधी आंकड़ों का आदान-प्रदान तथा आपदा प्रबंधन पर सहयोग भी महत्वपूर्ण है। फिलहाल वैज्ञानिक अध्ययन जलवायु और भूगर्भीय जोखिमों पर ध्यान देने की जरूरत रेखांकित करता है। परियोजना की वास्तविक सुरक्षा और इसके निचले क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन विस्तृत तकनीकी जानकारी के आधार पर ही किया जा सकेगा।

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