वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच क्यूबा को लेकर भी आक्रामक बयान दिया है। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान से सैन्य अभियान समाप्त कर लौटने के दौरान अमेरिकी युद्धपोत क्यूबा के तट के पास रुक सकते हैं। फ्लोरिडा में चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए इस बयान से अमेरिका और क्यूबा के बीच तनाव बढ़ने की आशंका है। दूसरी ओर, ट्रंप ने ईरान को भी चेतावनी दी है कि यदि तेहरान वाशिंगटन के साथ किसी समझौते पर पहुंचने में विफल रहता है, तो अमेरिकी सेना दोबारा हमला कर सकती है। इस बीच, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान ने पूर्ण नियंत्रण होने का दावा किया है।
क्यूबा के तट पर युद्धपोत भेजने की ट्रंप की चेतावनी
फ्लोरिडा में चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप ने क्यूबा को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि ईरान से लौटते समय अमेरिका अपने युद्धपोतों में से एक को क्यूबा के तट से करीब 50 गज की दूरी पर रोक सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में क्यूबा के लोग हाथ ऊपर उठा लेंगे और इसके बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को वहां भेजा जाएगा। ट्रंप के इस बयान पर क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिग्ज ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि क्यूबा के प्रति अमेरिका की महत्वाकांक्षाओं से जुड़ी सभी धमकियों को खारिज किया जाता है। रोड्रिग्ज ने अपने बयान में क्यूबा के समुद्र तटों और वहां मौजूद नुकीली चूना पत्थर की चट्टानों का भी उल्लेख किया। दोनों देशों के बीच लंबे समय से राजनीतिक मतभेद रहे हैं। ऐसे में ट्रंप की ताजा टिप्पणी को क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
समझौता नहीं हुआ तो ईरान पर फिर हमला संभव
ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू करने की संभावना से भी इनकार नहीं किया है। उनका कहना है कि यदि तेहरान अमेरिका के साथ समझौता करने में नाकाम रहता है, तो अमेरिकी सेना एक और हमला कर सकती है। वाशिंगटन की ओर से ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना सैन्य अभियान का प्रमुख उद्देश्य बताया गया है। ट्रंप ने यह भी स्वीकार किया कि ईरान के साथ युद्ध के कारण तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, उनके मुताबिक, ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए यह कीमत चुकाना उचित है। इस बयान से स्पष्ट है कि अमेरिकी प्रशासन ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अपने रुख में नरमी के संकेत नहीं दे रहा है। हालांकि, आगे सैन्य कार्रवाई होगी या बातचीत के जरिए कोई समाधान निकलेगा, यह दोनों देशों के बीच होने वाली कूटनीतिक गतिविधियों पर निर्भर करेगा।
अमेरिकी दूतावासों में कर्मचारियों की संख्या घटाने की तैयारी
ईरान से जुड़े सुरक्षा खतरे के बीच अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपने राजनयिक कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी कदम उठाए हैं। एसोसिएटेड प्रेस (एपी) की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया और अन्य क्षेत्रों में अमेरिकी कर्मियों को निशाना बनाने की ईरान की कथित कोशिशों से संबंधित खुफिया जानकारी मिलने के बाद अमेरिकी विदेश विभाग क्षेत्र के चार अमेरिकी दूतावासों में कर्मचारियों की संख्या कम कर रहा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब क्षेत्र में सैन्य तनाव लगातार बना हुआ है। अमेरिकी कर्मियों और राजनयिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा वाशिंगटन के लिए बड़ी चिंता बन गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का पूर्ण नियंत्रण होने का दावा
इस बीच, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसका पूरा नियंत्रण है। ईरानी पक्ष के अनुसार, उसके नियमों के तहत इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। यह दावा ऐसे समय आया है, जब ईरानी नौसेना ने आरोप लगाया कि कच्चे तेल से लदे दो सुपरटैंकर समुद्री बारूदी सुरंगों की चपेट में आ गए। इन जहाजों में कुल 45 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल होने की बात कही गई है। ईरान के मुताबिक, ये टैंकर ऐसे दक्षिणी मार्ग से गुजरने की कोशिश कर रहे थे, जिसे तेहरान ने बिना अनुमति वाला रास्ता बताया है। हालांकि, इस घटना और जहाजों को हुए नुकसान की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। ईरान ने यह भी चेतावनी दी है कि वह अमेरिकी सैन्य जहाजों को फारस की खाड़ी में प्रवेश नहीं करने देगा। साथ ही, उसने अमेरिकी दावों को चुनौती दी है कि उसकी सैन्य क्षमताएं काफी कमजोर हो चुकी हैं।
वैश्विक तेल आपूर्ति पर संकट की आशंका
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां सैन्य तनाव बढ़ने या जहाजों की आवाजाही बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। ट्रंप के बयानों, ईरान की जवाबी चेतावनियों और समुद्री मार्ग पर नियंत्रण को लेकर जारी विवाद ने संकट को और जटिल बना दिया है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ती है या संघर्ष का दायरा और व्यापक होता है।