यरुशलम: इस्राइल के आम चुनाव के शुरुआती रुझानों ने देश की राजनीति में सस्पेंस बढ़ा दिया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाला गठबंधन और विपक्षी गठबंधन बहुमत के आंकड़े से दूर नजर आ रहे हैं। शुरुआती मतगणना में नेतन्याहू के गठबंधन को 55 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि विपक्षी गठबंधन 49 सीटों पर आगे बताया जा रहा है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू के प्रदर्शन का श्रेय अपने समर्थन को दिया है। हालांकि, मतगणना पूरी होने तक तस्वीर बदलने की संभावना बनी हुई है। इस चुनाव के नतीजे न केवल नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य, बल्कि इस्राइल की सुरक्षा नीति और क्षेत्रीय कूटनीति की दिशा भी तय कर सकते हैं।
शुरुआती रुझानों में किसी को बहुमत नहीं
स्थानीय समय के अनुसार सुबह 7:43 बजे तक 55.4 प्रतिशत मतों की गिनती पूरी हो चुकी थी। शुरुआती आंकड़ों में नेतन्याहू के गठबंधन को 55 और विपक्षी गठबंधन को 49 सीटें मिलने का अनुमान सामने आया। वहीं, संयुक्त अरब सूची को 12 और राम पार्टी को चार सीटें मिलने की संभावना जताई गई। इस्राइल की संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए किसी गठबंधन को कम से कम 61 सांसदों का समर्थन हासिल करना जरूरी है। शुरुआती रुझानों में कोई भी गठबंधन इस आंकड़े तक पहुंचता नहीं दिख रहा है। ऐसे में सरकार गठन के लिए छोटे दलों का समर्थन निर्णायक साबित हो सकता है।
एग्जिट पोल और मतगणना के रुझानों में अंतर
मंगलवार को मतदान समाप्त होने के बाद जारी एग्जिट पोल में विपक्षी गठबंधन को मामूली बढ़त दिखाई गई थी। चैनल 12, चैनल 13 और सरकारी प्रसारक कान के अनुमानों में विपक्ष को 51 से 53 सीटें, जबकि नेतन्याहू के गठबंधन को 50 से 52 सीटें मिलने की संभावना जताई गई थी। इसके विपरीत, आई24न्यूज के एग्जिट पोल में नेतन्याहू के गठबंधन को 55 और विपक्ष को 49 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया था। शुरुआती मतगणना के आंकड़े इसी अनुमान के करीब दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, अंतिम परिणामों के लिए सभी मतों की गिनती जरूरी है। सैनिकों और अन्य पात्र मतदाताओं के कुछ मतों की अलग प्रक्रिया के तहत जांच की जाती है। दोहरे लिफाफों में डाले गए मतों की जांच के दौरान यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि किसी मतदाता ने एक से अधिक बार मतदान न किया हो।
ट्रंप ने नेतन्याहू की सफलता का श्रेय अपने समर्थन को दिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर इरविंग सी. श्वार्ट्ज की एक टिप्पणी साझा की। इसमें दावा किया गया था कि ट्रंप के समर्थन के बाद नेतन्याहू के चुनावी प्रदर्शन में सुधार आया और संभावित बड़ी हार की आशंका कम हो गई। इससे पहले टेक्सास में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा था कि एग्जिट पोल में नेतन्याहू अच्छा प्रदर्शन करते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके समर्थन से इस्राइली प्रधानमंत्री को काफी मदद मिली होगी। ट्रंप की इस प्रतिक्रिया से इस्राइल चुनाव में अमेरिकी समर्थन की भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, चुनावी नतीजों पर इस समर्थन के वास्तविक प्रभाव का आकलन अंतिम परिणाम आने के बाद ही किया जा सकेगा।
भारत-पाकिस्तान संघर्ष पर ट्रंप ने फिर किया दावा
इस्राइल चुनाव के बीच ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष रुकवाने में अपनी भूमिका का दावा भी दोहराया। टेक्सास के कॉर्पस क्रिस्टी में मध्यावधि चुनाव की रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों पर 250 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी देकर उन्होंने तनाव कम करने की कोशिश की थी। ट्रंप ने दावा किया कि जिन आठ युद्धों को समाप्त कराने की बात वह करते हैं, उनमें से पांच मामलों में व्यापार संबंधी दबाव की भूमिका रही। हालांकि, भारत ने पहले भी भारत-पाकिस्तान संघर्षविराम में किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के दावे को खारिज करते हुए कहा है कि संघर्षविराम दोनों देशों के बीच सीधे हुए संवाद से संभव हुआ था।
सरकार गठन में अरब दल निभा सकते हैं अहम भूमिका
नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को एग्जिट पोल में सबसे बड़ी एकल पार्टी के रूप में उभरते हुए दिखाया गया था। इसके बावजूद गठबंधन के लिए बहुमत जुटाना आसान नहीं माना जा रहा है। विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट ने वैकल्पिक सरकार बनाने की कोशिश करने की बात कही है। यदि दोनों प्रमुख गठबंधन बहुमत से दूर रहते हैं, तो अरब नेतृत्व वाले दल सरकार गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। एग्जिट पोल में इन दलों को कुल 16 से 18 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया था। वर्ष 2021 में राम पार्टी इस्राइल की गठबंधन सरकार में शामिल हुई थी।
सुरक्षा और नेतृत्व की जवाबदेही पर टिकी नजरें
7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में हुए हमले के बाद यह इस्राइल का पहला आम चुनाव है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था, सरकार की जवाबदेही और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता प्रमुख चुनावी मुद्दे बने हुए हैं। करीब 19 वर्षों से इस्राइली राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभा रहे नेतन्याहू को पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। अब सभी की निगाहें अंतिम चुनाव परिणामों और संभावित गठबंधन पर टिकी हैं। बहुमत का आंकड़ा हासिल करने में विफल रहने वाले गठबंधन के लिए छोटे दलों का समर्थन निर्णायक हो सकता है।