तेहरान : यमन के हूती लड़ाकों और सऊदी अरब के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के बीच ईरान ने क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक पहल की है। सोमवार को तेहरान में मक्का सुरक्षा समझौते में शामिल देशों के प्रतिनिधियों की बैठक हुई। इसमें ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने क्षेत्रीय सहयोग और मुस्लिम देशों की एकजुटता पर जोर दिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य सऊदी अरब और हूती लड़ाकों के बीच बढ़ते संघर्ष को रोकने तथा क्षेत्र में शांति बहाल करने के रास्ते तलाशना था। हालांकि, यह बैठक ऐसे समय हुई, जब दोनों पक्षों के बीच हमले तेज होने और पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की खबरें सामने आईं।
पेजेश्कियान ने क्षेत्रीय एकजुटता पर दिया जोर
तेहरान में हुई बैठक के दौरान ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि क्षेत्रीय देशों को बाहरी दबाव और प्रतिबंधों की चिंता किए बिना शांति एवं सुरक्षा के लिए सहयोग बढ़ाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि देशों को एक-दूसरे के हितों का सम्मान करते हुए साझा चुनौतियों का मिलकर सामना करना चाहिए। बैठक के बाद प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति पेजेश्कियान और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची से भी मुलाकात की। इस दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थिति और संघर्ष को समाप्त करने के संभावित उपायों पर चर्चा हुई। चारों देशों की ओर से जारी संयुक्त बयान में क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए आपसी संपर्क तथा सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई गई। बयान के मुताबिक, संबंधित देशों के नेता और प्रतिनिधि भविष्य में भी नियमित रूप से बैठकें करते रहेंगे। हालांकि, संघर्ष समाप्त करने के लिए किसी ठोस युद्धविराम समझौते की घोषणा नहीं की गई।
बैठक में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये की भागीदारी
इस बैठक में सऊदी अरब की ओर से रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान शामिल हुए, जो युवराज मोहम्मद बिन सलमान के छोटे भाई हैं। पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने किया, जबकि तुर्किये की ओर से खुफिया प्रमुख इब्राहीम कलीन ने हिस्सा लिया। ईरान की तरफ से सर्वोच्च सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई बैठक में शामिल हुए। सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने इस पहल को क्षेत्रीय तनाव समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। मंत्रालय ने निकट भविष्य में सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद जताई। इस बैठक को संभव बनाने में कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता की भूमिका बताई गई है। दोनों देश पहले भी क्षेत्रीय विवादों में बातचीत को आगे बढ़ाने के प्रयास करते रहे हैं। हालांकि, कूटनीतिक बातचीत की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित पक्ष जमीन पर सैन्य गतिविधियों को रोकने के लिए कितने प्रभावी कदम उठाते हैं।
रियाद और सऊदी तेल ठिकानों पर हमलों का दावा
तेहरान में बैठक से कुछ घंटे पहले हूती लड़ाकों ने सऊदी अरब के रियाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और महत्वपूर्ण तेल प्रतिष्ठानों पर हमले किए जाने का दावा किया। हूती ने सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को भी निशाना बनाने की बात कही। यह पाइपलाइन सऊदी अरब के ऊर्जा परिवहन नेटवर्क का अहम हिस्सा है। महत्वपूर्ण ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने की खबरों ने क्षेत्रीय सुरक्षा और तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
सऊदी अरब की जवाबी कार्रवाई, सना पर हवाई हमले
हूती के हमलों के बाद सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने यमन की राजधानी सना पर हवाई हमले किए। गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलीकी ने दावा किया कि इन हमलों में हूती लड़ाकों के हथियारों और मिसाइलों के भंडार को निशाना बनाया गया। दूसरी ओर, हूती के एक प्रवक्ता ने सऊदी अरब समर्थित यमनी सेना के अदन स्थित ठिकाने और लहज प्रांत के अल-वहत क्षेत्र पर मिसाइल हमलों का दावा किया। हूती पक्ष के मुताबिक, इन हमलों में कई सैनिक मारे गए तथा सैन्य वाहनों और हथियारों के भंडार को नुकसान पहुंचा।
ईरान की भूमिका पर भी निगाहें
ईरान हूती आंदोलन का प्रमुख समर्थक माना जाता है। ऐसे में तेहरान की ओर से शांति वार्ता की पहल क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण है। हालांकि, ईरान और हूती के संबंधों को देखते हुए सऊदी अरब तथा अन्य देशों के लिए इस पहल की विश्वसनीयता और व्यावहारिक परिणाम भी अहम होंगे। बैठक ऐसे समय हुई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान पर हमले की धमकी दिए जाने की खबरें भी सामने आईं। इससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका है।