यूरोप में महंगाई और आवास संकट से भड़का गुस्सा, फ्रांस से पुर्तगाल तक सड़कों पर उतरे लाखों लोग

फ्रांस की राजधानी पेरिस से लेकर अल्बानिया के तिराना, इटली के शहरों, स्पेन के मैड्रिड और पुर्तगाल के लिस्बन तक विरोध-प्रदर्शन उग्र होते जा रहे हैं। कई जगह प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं, आंसू गैस छोड़ी गई और गिरफ्तारियां की गईं।;

Update: 2026-10-26 08:18 GMT

पेरिस/तिराना/रोम/मैड्रिड/लिस्बन : यूरोप के कई देशों में बढ़ती महंगाई, महंगे मकान, आसमान छूते किराये और सरकारी नीतियों के खिलाफ लोगों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दे रहा है। फ्रांस, अल्बानिया, इटली, स्पेन और पुर्तगाल में विरोध-प्रदर्शनों के दौरान तनाव की स्थिति बनी। कई जगह पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं, आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया और सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में अशांति के लिए आव्रजन नीतियों को जिम्मेदार ठहराते हुए नया विवाद खड़ा कर दिया है।

फ्रांस में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन, हजारों गिरफ्तार

फ्रांस में सरकार की नीतियों के खिलाफ हुए प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। फ्रांसीसी गृह मंत्रालय के मुताबिक, देशभर में करीब 4.10 लाख लोग सड़कों पर उतरे, जबकि सीजीटी यूनियन ने प्रदर्शनकारियों की संख्या आठ लाख बताई। पेरिस में भी बड़े पैमाने पर विरोध दर्ज किया गया। प्रदर्शनों के दौरान पेरिस, ल्योन, लिले और मार्सिले समेत कई शहरों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों की खबरें आईं। पुलिस ने देशभर में करीब 1,314 लोगों को गिरफ्तार किया। राजधानी पेरिस में 65 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई। प्रदर्शनकारियों पर निगरानी के लिए हेलीकॉप्टरों और ड्रोन का इस्तेमाल भी किया गया। वहीं, येलो वेस्ट आंदोलन से जुड़े समूहों और विभिन्न श्रमिक संगठनों ने 31 अक्टूबर और 5 नवंबर को दोबारा देशव्यापी प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। पुलिस यूनियनों ने भी चिंता जताई है कि लंबे समय तक पूरे देश में पर्याप्त पुलिसकर्मियों की तैनाती करना मुश्किल हो सकता है।

अल्बानिया में हिंसक हुआ सरकार विरोधी आंदोलन

अल्बानिया की राजधानी तिराना में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हालात तनावपूर्ण हो गए। अधिकारियों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों को निशाना बनाया और कुछ स्थानों पर आग लगाने की कोशिश की। पुलिस पर भी वस्तुएं फेंकी गईं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया। प्रदर्शन के दौरान 300 से अधिक प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के घायल होने की जानकारी सामने आई। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 2,500 अधिकारियों को तैनात किया गया था। प्रधानमंत्री एडी रामा के कार्यालय के पास भी आगजनी का प्रयास किया गया।


इटली में रोम और ट्यूरिन में झड़पें

इटली में भी हजारों लोगों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया। सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए लगभग 5,000 पुलिसकर्मियों के साथ सेना के 500 जवान तैनात किए गए। मिलान में स्थिति अपेक्षाकृत शांत रही, लेकिन रोम और ट्यूरिन में छिटपुट झड़पें हुईं। रोम में प्रदर्शनकारियों ने ऐतिहासिक कोलोसियम में प्रवेश करने की कोशिश भी की। आठ शहरों में नौ लोगों की गिरफ्तारी और 371 लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी गई। हिरासत में लिए गए लोगों में 110 नाबालिग भी शामिल बताए गए।

स्पेन में पेंशन और आवास संकट के खिलाफ आवाज

स्पेन की राजधानी मैड्रिड में प्रदर्शनकारियों ने पेंशन व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई। उनकी प्रमुख मांगों में महंगाई के अनुरूप पेंशन बढ़ाना, न्यूनतम पेंशन में सुधार करना और पेंशन व्यवस्था के निजीकरण के खिलाफ सुरक्षा उपाय शामिल हैं। इसके साथ ही आवास संकट के खिलाफ प्यूर्टा डेल सोल चौक पर शुरू हुआ विरोध शिविर भी आंदोलन का प्रमुख केंद्र बन गया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि महंगे किराये और घर खरीदने की बढ़ती लागत आम लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।

पुर्तगाल में किराये और बेदखली के नियमों पर विरोध

पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में आवास संकट के खिलाफ लगाए गए विरोध शिविर को पुलिस ने रविवार तड़के हटा दिया। इस कार्रवाई के दौरान गिरफ्तारियां हुईं और कुछ लोगों को मामूली चोटें आईं। प्रदर्शनकारी किराये पर नियंत्रण बनाए रखने और घरों से बेदखली की प्रक्रिया आसान बनाने वाले प्रस्तावित बदलावों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि आवास से जुड़े फैसलों में आम नागरिकों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

ट्रंप ने आव्रजन को ठहराया जिम्मेदार

यूरोप में विरोध-प्रदर्शनों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए वहां की आव्रजन नीतियों की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि फ्रांस ने ऐसे लोगों को देश में आने दिया, जो उसकी संस्कृति और विरासत का सम्मान नहीं करते। जार्जिया में शनिवार को बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि फ्रांस ने अपने दरवाजे ऐसे लोगों के लिए खोल दिए हैं, जो देश से नफरत करते हैं। उन्होंने अमेरिका की आव्रजन नीति का बचाव करते हुए कहा कि उनका प्रशासन ऐसी स्थिति से बचने के लिए कदम उठा रहा है। हालांकि, फ्रांस में विरोध-प्रदर्शनों के पीछे महंगाई, आवास संकट, पेंशन और सरकारी नीतियों जैसे कई मुद्दे सामने आए हैं। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पहले भी ट्रंप की ऐसी टिप्पणियों को खारिज कर चुके हैं।

आर्थिक दबाव बना यूरोप की बड़ी चुनौती

यूरोप के अलग-अलग देशों में जारी प्रदर्शनों से स्पष्ट है कि महंगाई, आवास की बढ़ती कीमतें और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। हालांकि, प्रत्येक देश में विरोध के कारण अलग-अलग हैं, लेकिन आम नागरिकों की आर्थिक परेशानियां इन आंदोलनों में प्रमुखता से दिखाई दे रही हैं।

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