यूपी कैबिनेट का बड़ा फैसला: सरकारी वकीलों के मानदेय और भत्तों में बढ़ोतरी, नई दरों को मंजूरी

उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने सरकारी वकीलों के मानदेय और मासिक भत्तों में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। जिला शासकीय अधिवक्ता, अपर अधिवक्ता, महाधिवक्ता समेत विभिन्न विधि अधिकारियों की फीस और रिटेनर राशि में संशोधन किया गया है।;

Update: 2026-06-04 03:11 GMT
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के विधि अधिकारियों और सरकारी वकीलों को बड़ी राहत देते हुए उनके मानदेय और मासिक भत्तों में बढ़ोतरी का फैसला किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। सरकार का कहना है कि लंबे समय से लंबित इस मांग को देखते हुए विभिन्न श्रेणी के सरकारी अधिवक्ताओं की फीस और भत्तों में संशोधन किया गया है।

कैबिनेट बैठक के बाद वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि राज्य के जिला शासकीय अधिवक्ता, अपर जिला शासकीय अधिवक्ता, सहायक और उप शासकीय अधिवक्ता सहित नामित वकीलों, विशेष अधिवक्ताओं और दीवानी-फौजदारी मामलों में पैरवी करने वाले विधि अधिकारियों के मानदेय में वृद्धि की गई है।

जिला स्तर के सरकारी वकीलों को मिलेगा अधिक मानदेय

नए प्रावधानों के अनुसार जिला शासकीय अधिवक्ता को अब 14 हजार रुपये मासिक रिटेनर फीस के साथ 2500 रुपये प्रतिदिन बहस शुल्क मिलेगा। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता को 11 हजार रुपये मासिक रिटेनर और 2300 रुपये प्रतिदिन बहस शुल्क दिया जाएगा।

इसी प्रकार सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता को 10 हजार रुपये मासिक और 2300 रुपये प्रतिदिन बहस शुल्क मिलेगा, जबकि उप जिला शासकीय अधिवक्ता के लिए 9 हजार रुपये मासिक रिटेनर और 2000 रुपये प्रतिदिन बहस शुल्क निर्धारित किया गया है।

महाधिवक्ता और उच्च न्यायालय के अधिवक्ताओं की फीस भी बढ़ी

सरकार ने राज्य के महाधिवक्ता और उच्च न्यायालय में नियुक्त विधि अधिकारियों के मानदेय में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है। नए निर्णय के तहत महाधिवक्ता को 1.25 लाख रुपये मासिक रिटेनर फीस तथा 60 हजार रुपये प्रतिदिन बहस शुल्क मिलेगा।

अपर महाधिवक्ता को 50 हजार रुपये मासिक रिटेनर और 40 हजार रुपये प्रतिदिन बहस शुल्क निर्धारित किया गया है। वहीं सुप्रीम कोर्ट में राज्य की ओर से पैरवी करने वाले अपर महाधिवक्ता को 50 हजार रुपये मासिक तथा 50 हजार रुपये प्रतिदिन बहस शुल्क दिया जाएगा।

अन्य विधि अधिकारियों को भी लाभ

मुख्य स्थायी अधिवक्ता को अब 35 हजार रुपये मासिक रिटेनर और 12 हजार रुपये प्रतिदिन बहस शुल्क मिलेगा। इसके अलावा अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता, अपर शासकीय अधिवक्ता और अपर लोक अभियोजकों के लिए 20 हजार रुपये मासिक रिटेनर तथा 8 हजार रुपये प्रतिदिन बहस शुल्क तय किया गया है।

सरकार का मानना है कि इस निर्णय से सरकारी मुकदमों की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित होगी और अनुभवी अधिवक्ताओं को बेहतर प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही न्यायिक प्रक्रिया में राज्य का पक्ष अधिक मजबूती के साथ रखा जा सकेगा।

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