सरकार से तीसरे दौर की वार्ता से पहले सीजेपी का अल्टीमेटम, कहा- शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर फैसला नहीं हुआ तो करेंगे बड़ा ऐलान
सरकार और CJP के बीच तीसरे दौर की बातचीत से पहले संगठन ने केंद्र को चेतावनी दी। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, मुआवजे और दर्ज मामलों की वापसी को लेकर CJP अपने रुख पर कायम है।;
'देशभर में बढ़ रहा है असंतोष'
एक समाचार चैनल से बातचीत में आशुतोष रंका ने कहा कि यह मामला अब केवल एक संगठन का आंदोलन नहीं रह गया है, बल्कि देशभर के छात्रों और युवाओं की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। उन्होंने दावा किया कि पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर लोगों में लगातार नाराजगी बढ़ रही है।
रंका ने कहा कि सरकार जितनी देर करेगी, जनता का असंतोष उतना ही बढ़ेगा। उनके अनुसार, यह ऐसा विषय है जिसे लंबे समय तक टालना संभव नहीं है क्योंकि विभिन्न राज्यों में छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।
तीन प्रमुख मांगों पर अड़ा संगठन
CJP ने एक बार फिर अपनी प्रमुख मांगों को दोहराते हुए कहा कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार जवाबदेही तय नहीं करती। संगठन की प्रमुख मांगें हैं:
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।
परीक्षा विवाद से प्रभावित परिवारों के लिए उचित मुआवजा।
आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लिया जाए।
रंका ने दावा किया कि सरकार के साथ हुई पिछली बैठकों में दूसरी और तीसरी मांग पर सकारात्मक संकेत मिले हैं, लेकिन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के मुद्दे पर अभी तक अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
'इस्तीफे पर कोई समझौता नहीं'
CJP प्रवक्ता ने स्पष्ट कहा कि संगठन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग से पीछे हटने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रतिनिधियों ने यह भरोसा दिया है कि इस मांग को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष रखा जाएगा, लेकिन जब तक कोई ठोस फैसला सामने नहीं आता, आंदोलन जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में सुधार और जवाबदेही पर चर्चा तभी सार्थक होगी, जब इस पूरे विवाद की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
सरकार की कार्रवाई के समय पर भी उठाए सवाल
रंका ने प्रधानमंत्री द्वारा हाल में परीक्षा प्रणाली को लेकर दिए गए बयानों का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि यदि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही थी तो शुरुआती दौर में तेजी से कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगें लंबे समय से सामने थीं और सरकार की प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत देर से आई।
तीसरे दौर की वार्ता पर टिकी निगाहें
सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच तीसरे दौर की बातचीत को लेकर सभी की निगाहें टिकी हैं। संगठन का कहना है कि यदि वार्ता में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए नई रणनीति की घोषणा की जाएगी।
उधर, केंद्र सरकार लगातार कह रही है कि वह परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक के मामलों में सख्त कार्रवाई और छात्रों की चिंताओं पर संवाद के लिए तैयार है। हालांकि, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अब तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।