'आज की पीढ़ी हर बात का तर्क चाहती है': RSS प्रमुख मोहन भागवत ने परिवार, संवाद और भारतीय संस्कृति पर दिया बड़ा संदेश

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने नई पीढ़ी, परिवार, मातृत्व और भारतीय संस्कृति पर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज के बच्चे हर बात का तर्क चाहते हैं और परिवारों में संवाद बढ़ाने की जरूरत है।;

Update: 2026-07-25 03:52 GMT

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने नई पीढ़ी, परिवार व्यवस्था और भारतीय संस्कृति को लेकर महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए हैं। दिल्ली में आयोजित 'विश्व मंगलम् सभा' के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि समय बदलने के साथ बच्चों की सोच और अपेक्षाएं भी बदल गई हैं। आज के बच्चे केवल निर्देशों का पालन नहीं करते, बल्कि हर बात के पीछे का कारण और तर्क जानना चाहते हैं। ऐसे में अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखें और उन्हें पर्याप्त समय दें।

नई पीढ़ी को समझने की जरूरत

'युगानुकूल मातृत्व' कार्यक्रम के समापन सत्र में बोलते हुए मोहन भागवत ने कहा कि आज का युवा वर्ग जिज्ञासु है और हर विषय को समझने की इच्छा रखता है। उन्होंने कहा कि पहले के समय में बच्चे माता-पिता की बात बिना सवाल किए मान लेते थे, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। नई पीढ़ी हर निर्णय और विचार के पीछे तर्क तलाशती है, इसलिए केवल आदेश देने से काम नहीं चलेगा।

उन्होंने कहा कि माता-पिता को बच्चों के साथ खुलकर बातचीत करनी चाहिए, उनकी जिज्ञासाओं का धैर्यपूर्वक उत्तर देना चाहिए और ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए, जहां बच्चे बिना झिझक अपनी बात रख सकें।

परिवार में संवाद सबसे बड़ी जरूरत

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली के कारण परिवारों के बीच संवाद कम होता जा रहा है, जिसका असर रिश्तों पर पड़ रहा है। उनके अनुसार, परिवार की मजबूती केवल साथ रहने से नहीं, बल्कि एक-दूसरे को सुनने और समझने से आती है।

उन्होंने कहा कि बच्चों को प्यार, विश्वास और समय देना किसी भी परिवार की सबसे बड़ी पूंजी है। यदि माता-पिता नियमित रूप से बच्चों से संवाद करेंगे, तो उनके व्यक्तित्व का विकास भी बेहतर होगा और पारिवारिक संबंध भी मजबूत होंगे।

भारतीय संस्कृति पर जताया भरोसा

अपने संबोधन में मोहन भागवत ने भारतीय संस्कृति और परंपराओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक औपनिवेशिक प्रभाव के कारण लोगों के मन में अपनी परंपराओं को लेकर संदेह पैदा हुआ, लेकिन भारत की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध और मजबूत है।

उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे बिना सोचे-समझे पश्चिमी जीवनशैली का अनुसरण करने के बजाय भारतीय मूल्यों और परंपराओं को समझें तथा उन्हें अपने जीवन में अपनाएं।

मातृत्व और परिवार को बताया समाज की आधारशिला

भागवत ने कहा कि मातृत्व केवल परिवार का नहीं, बल्कि पूरे समाज के निर्माण और निरंतरता का मूल आधार है। उनके अनुसार, परिवार, विवाह और मातृत्व जैसी संस्थाएं सामाजिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया के कई देशों में परिवार व्यवस्था और सामाजिक मूल्यों पर नए सिरे से चर्चा हो रही है। ऐसे समय में भारत की पारिवारिक परंपराएं समाज को दिशा देने का काम कर सकती हैं।

विज्ञान और परंपरा पर भी रखे विचार

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि विज्ञान मानव जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन उसकी भी अपनी सीमाएं हैं। उन्होंने कहा कि हर प्रश्न का उत्तर केवल विज्ञान से नहीं मिल सकता। भारत की अनेक परंपराएं लंबे सामाजिक अनुभव और व्यावहारिक ज्ञान पर आधारित हैं, इसलिए आधुनिकता और परंपरा के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

उन्होंने अपने संबोधन के अंत में कहा कि यदि परिवारों में संवाद, संस्कार और आपसी विश्वास मजबूत होंगे, तो समाज भी अधिक सशक्त और संतुलित बनेगा।

Tags:    

Similar News