राम मंदिर चढ़ावा मामला: 8 आरोपियों पर FIR, चंपत राय का नाम नहीं; विपक्ष ने जांच पर उठाए सवाल

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले में 8 लोगों के खिलाफ BNS की गंभीर धाराओं में FIR दर्ज की गई है। चंपत राय का नाम शामिल न होने पर विपक्ष ने जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।;

Update: 2026-06-26 02:22 GMT

अयोध्या। अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे और दान में मिले आभूषणों की कथित अनियमितताओं के मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर अयोध्या पुलिस ने आठ नामजद और कई अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की है।

पुलिस ने सभी नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उन्हें अदालत में पेश करने की तैयारी की जा रही है। हालांकि, इस कार्रवाई के बाद विपक्ष ने जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों को जांच के दायरे में लाने की मांग की है।

आठ लोगों के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर

एफआईआर में रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अविनाश, मनीष यादव, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, सुभाष चंद्र, करुणेश पांडे और रमाशंकर मिश्रा को नामजद किया गया है। पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर इन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

इनमें रमाशंकर यादव का नाम सबसे अधिक चर्चा में है। जांच एजेंसियां अब सभी आरोपियों की भूमिका, आपसी संबंधों और कथित वित्तीय लेनदेन की गहराई से जांच कर रही हैं।

गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ मामला

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इनमें कर्मचारी द्वारा संपत्ति की चोरी, आपराधिक विश्वासघात, चोरी की संपत्ति को छिपाने या रखने तथा आपराधिक साजिश जैसे आरोप शामिल हैं।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जांच के दौरान आरोप सिद्ध होते हैं तो संबंधित धाराओं के तहत कठोर सजा का प्रावधान है। फिलहाल पुलिस मामले से जुड़े दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।

विपक्ष ने उठाए बड़े सवाल

एफआईआर दर्ज होने के बाद विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि जांच में केवल निचले स्तर के कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया है, जबकि ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों के नाम शामिल नहीं किए गए। विपक्ष का कहना है कि एसआईटी गठन के बाद एफआईआर दर्ज किए जाने और आरोपियों के चयन को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए। वहीं आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि कथित वित्तीय अनियमितताओं के सभी पहलुओं की जांच होनी चाहिए।

ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर भी लगाए जा रहे आरोप

राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कुछ लोगों और शिकायतकर्ता संतोष दुबे ने ट्रस्ट के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों पर भी आरोप लगाए हैं। हालांकि, पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर में उनके नाम शामिल नहीं हैं। इसको लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है कि क्या जांच का दायरा आगे बढ़ाया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने चढ़ावे की गिनती, दान में मिले आभूषणों के रिकॉर्ड, संपत्ति प्रबंधन और जमीन से जुड़े दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच की है। हालांकि, पूरी जांच रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।

आगे की जांच पर टिकी नजरें

पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और यदि आगे साक्ष्य सामने आते हैं तो कानून के अनुसार अन्य लोगों को भी जांच के दायरे में लाया जा सकता है। फिलहाल पूरे मामले पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और सभी की नजरें एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे इस बहुचर्चित मामले में आगे की तस्वीर साफ हो सकेगी।

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