राम मंदिर प्रबंधन में बड़ा बदलाव, CA नरपत डुकिया को मिली अहम जिम्मेदारी; CEO पद के लिए आज इंटरव्यू

नई व्यवस्था में प्रशासनिक प्रबंधन, धार्मिक अनुष्ठान और विभागीय समन्वय के लिए अलग-अलग जिम्मेदारियां तय की जा रही हैं। नरपत डुकिया को जहां समग्र संचालन और प्रशासनिक समन्वय की जिम्मेदारी दी गई है, वहीं आचार्य इंद्रदेव मिश्र धार्मिक गतिविधियों से जुड़े कार्यों में सहयोग करेंगे।;

Update: 2026-08-11 05:57 GMT

अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के प्रशासन और संचालन को लेकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने व्यवस्थाओं में बदलाव की प्रक्रिया तेज कर दी है। मंदिर प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित करने के लिए CA नरपत डुकिया को मंदिर संचालन एवं प्रबंधन इकाई की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO पद के लिए मंगलवार को इंटरव्यू आयोजित किया जा रहा है। यह बदलाव ऐसे समय में हो रहे हैं, जब मंदिर से जुड़े दान और प्रबंधन को लेकर हाल में विवाद सामने आए थे। ट्रस्ट अब प्रशासनिक कामकाज, धार्मिक गतिविधियों और अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय को अधिक स्पष्ट तरीके से व्यवस्थित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

नरपत डुकिया संभालेंगे मंदिर संचालन की जिम्मेदारी

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से 8 अगस्त 2026 को जारी पत्र के मुताबिक, CA नरपत डुकिया को मंदिर संचालन एवं प्रबंधन इकाई का प्रमुख नियुक्त किया गया है। ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन ने इस संबंध में आदेश जारी किया। डुकिया को मंदिर की समग्र प्रशासनिक व्यवस्था के समन्वय की जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें विभिन्न विभागों के बीच तालमेल बनाए रखने, व्यवस्थाओं की निगरानी करने और ट्रस्ट के निर्णयों को प्रभावी तरीके से लागू कराने का काम देखना होगा।

आचार्य इंद्रदेव मिश्र भी निभाएंगे अहम भूमिका

ट्रस्ट ने आचार्य इंद्रदेव मिश्र को भी नरपत डुकिया का सहयोगी नियुक्त किया है। इंद्रदेव मिश्र अयोध्या स्थित राम वेद विद्यालय के प्रधानाचार्य हैं। उनकी यह अतिरिक्त जिम्मेदारी फिलहाल दिसंबर 2026 तक रहेगी। उनके जिम्मे मंदिर की धार्मिक व्यवस्थाओं से जुड़े काम होंगे। इसमें नित्य पूजन, यज्ञ, वैदिक अनुष्ठान और धार्मिक समिति के निर्देश के अनुसार विभिन्न पर्वों एवं आयोजनों का संचालन शामिल है। इस व्यवस्था के जरिए प्रशासनिक और धार्मिक कार्यों की जिम्मेदारियों को अलग-अलग रखने की कोशिश की जा रही है।

जगदीश आफले को बनाया गया था पहला सचिव

मंदिर प्रबंधन में बदलाव की प्रक्रिया के तहत पिछले महीने जगदीश शंकर आफले को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला सचिव नियुक्त किया गया था। आफले मंदिर निर्माण परियोजना में प्रोजेक्ट मैनेजर की भूमिका निभा चुके हैं। उनकी नियुक्ति के बाद ट्रस्ट की प्रशासनिक संरचना को और मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। अब मंदिर संचालन के लिए अलग व्यवस्था और CEO की नियुक्ति को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

CEO पद के लिए आज होगा इंटरव्यू

ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पद के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब चयन प्रक्रिया अहम चरण में पहुंच गई है। जानकारी के मुताबिक, 5 हजार से ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से डेढ़ दर्जन से अधिक उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए चुना गया है। इन उम्मीदवारों का इंटरव्यू मंगलवार को होने की बात सामने आई है। चयन प्रक्रिया के दौरान मंदिर परिसर में सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं। CEO की नियुक्ति को मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्रवक्ता की नियुक्ति भी जल्द

CEO के अलावा ट्रस्ट की ओर से प्रवक्ता की नियुक्ति की प्रक्रिया भी अंतिम दौर में बताई जा रही है। ट्रस्ट के स्तर पर जल्द ही इस पद के लिए नाम की घोषणा किए जाने की संभावना है। मंदिर प्रबंधन की नई व्यवस्था में प्रशासनिक कामकाज के साथ संचार व्यवस्था को भी अधिक स्पष्ट और संस्थागत बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

चंदा विवाद के बाद व्यवस्था में बदलाव

मंदिर से जुड़े दान और चंदा व्यवस्था को लेकर सामने आए विवादों के बाद ट्रस्ट की प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे थे। इसके बाद प्रबंधन में जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। नई व्यवस्था में प्रशासनिक प्रबंधन, धार्मिक अनुष्ठान और विभागीय समन्वय के लिए अलग-अलग जिम्मेदारियां तय की जा रही हैं। नरपत डुकिया को जहां समग्र संचालन और प्रशासनिक समन्वय की जिम्मेदारी दी गई है, वहीं आचार्य इंद्रदेव मिश्र धार्मिक गतिविधियों से जुड़े कार्यों में सहयोग करेंगे। इन नियुक्तियों और CEO के चयन के बाद राम मंदिर के प्रबंधन की नई प्रशासनिक संरचना को अंतिम रूप मिलने की उम्मीद है।

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