मादुरो की विरोधी मचाडो ने वेनेजुएला लौटने का किया एलान, चुनाव लड़ेंगी, ट्रंप ने बनाई चार सदस्यीय टीम

मारिया कोरीना मचाडो ने कहा कि वेनेजुएला के लोग अब बदलाव चाहते हैं और उनका आंदोलन इसके लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा, “हम चुनाव जीतने के लिए तैयार हैं। देश को लोकतंत्र की राह पर वापस लाने के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव जरूरी हैं। मैं जल्द से जल्द वेनेजुएला लौटूंगी।”

Update: 2026-01-06 23:04 GMT
काराकास/वॉशिंगटन। वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक और कूटनीतिक घटनाक्रम तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश की प्रमुख विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अपदस्थ किए जाने के बाद वेनेजुएला लौटने का एलान करते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की मांग तेज कर दी है। मचाडो ने कहा है कि उनका आंदोलन चुनाव जीतने के लिए पूरी तरह तैयार है और वे जल्द से जल्द देश वापस जाकर जनता के बीच उतरेंगी।

दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला को लेकर आगे की रणनीति तय करने के लिए चार सदस्यीय उच्चस्तरीय टीम का गठन किया है। इस बीच रूस, चीन, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय और लैटिन अमेरिकी देशों की प्रतिक्रियाओं ने इस संकट को वैश्विक कूटनीतिक टकराव में बदल दिया है।

मचाडो का ऐलान: देश लौटूंगी
फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में मारिया कोरीना मचाडो ने कहा कि वेनेजुएला के लोग अब बदलाव चाहते हैं और उनका आंदोलन इसके लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा, “हम चुनाव जीतने के लिए तैयार हैं। देश को लोकतंत्र की राह पर वापस लाने के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव जरूरी हैं। मैं जल्द से जल्द वेनेजुएला लौटूंगी।” मचाडो ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने वेनेजुएला संकट को वैश्विक एजेंडे पर मजबूती से रखा है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मादुरो सरकार की वरिष्ठ नेता और अब अंतरिम सत्ता व्यवस्था में शामिल डेल्सी रोड्रिग्ज पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

मचाडो के अनुसार, “डेल्सी रोड्रिग्ज मादुरो सरकार के दमन की मुख्य योजनाकार रही हैं। उन्होंने वर्षों तक नागरिक अधिकारों को कुचला है। ऐसे में उनसे लोकतांत्रिक बदलाव की उम्मीद नहीं की जा सकती।”

ट्रंप की प्राथमिकता: मचाडो नहीं, रोड्रिग्ज?
हालांकि मचाडो अमेरिकी मीडिया में वेनेजुएला के लोकतांत्रिक चेहरे के तौर पर उभरी हैं, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप का रुख उन्हें लेकर पूरी तरह स्पष्ट नहीं दिखता। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप का मानना है कि मारिया कोरीना मचाडो के पास देश के भीतर शासन करने के लिए पर्याप्त घरेलू समर्थन नहीं है।

रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन को आशंका है कि विपक्ष का खुला समर्थन वेनेजुएला को और ज्यादा अस्थिर कर सकता है। इसी कारण ट्रंप अब तक मचाडो के बजाय डेल्सी रोड्रिग्ज के साथ काम करने के संकेत देते रहे हैं, जो मादुरो की करीबी सहयोगी मानी जाती हैं। इस विरोधाभास ने अमेरिकी नीति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्या वॉशिंगटन वास्तव में लोकतांत्रिक विपक्ष को सत्ता में लाना चाहता है या वह केवल एक नियंत्रित संक्रमण की रणनीति अपना रहा है।

चार सदस्यीय अमेरिकी टीम गठित, रूबियो करेंगे नेतृत्व
एनबीसी न्यूज को दिए बयान में राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि वेनेजुएला में आगे की रणनीति और कदमों की निगरानी के लिए एक विशेष टीम गठित की गई है। इस चार सदस्यीय टीम में  विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (विशेष भूमिका में) शामिल हैं।

ट्रंप ने स्पष्ट किया कि इस टीम का नेतृत्व विदेश मंत्री मार्को रुबियो करेंगे, जो लंबे समय से लैटिन अमेरिकी मामलों पर सख्त रुख के लिए जाने जाते हैं। टीम का उद्देश्य वेनेजुएला में राजनीतिक संक्रमण, सुरक्षा हालात और अमेरिकी हितों की रक्षा से जुड़े फैसलों को समन्वित करना बताया गया है।

रूस का समर्थन: रोड्रिग्ज का स्वागत, दखल का विरोध

वेनेजुएला संकट पर रूस ने अमेरिका के रुख से बिल्कुल उलट प्रतिक्रिया दी है। रूस के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को बयान जारी कर डेल्सी रोड्रिग्ज को बतौर अंतरिम राष्ट्रपति नियुक्त किए जाने का स्वागत किया। रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि वेनेजुएला को स्वयं अपना भविष्य तय करने का अधिकार है और किसी भी बाहरी शक्ति को इसमें हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। बयान में कहा गया, “हम वेनेजुएला की संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए वहां के प्राधिकारियों के प्रयासों की सराहना करते हैं।” रूस का यह बयान साफ संकेत देता है कि वह अमेरिका की अगुवाई में किसी भी राजनीतिक बदलाव के खिलाफ खड़ा है और मौजूदा सत्ता व्यवस्था को समर्थन देना चाहता है।

चीन का तीखा हमला: अमेरिका दुनिया का जज नहीं
चीन ने वेनेजुएला की राजधानी काराकास पर अमेरिका की सैन्य कार्रवाई को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। बीजिंग ने न केवल इस कार्रवाई की आलोचना की, बल्कि दक्षिण अमेरिका के अन्य देशों पर दबाव या भविष्य में किसी भी हस्तक्षेप के खिलाफ भी चेतावनी दी। मंगलवार को प्रेस ब्रीफिंग में चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा, “कोई भी देश दुनिया का दरोगा या जज बनने का अधिकार नहीं रखता।” उन्होंने जोर देकर कहा कि चीन सभी देशों से यह अपेक्षा करता है कि वे दूसरे देशों के लोगों द्वारा चुने गए विकास के रास्ते का सम्मान करें और अंतरराष्ट्रीय कानून व संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों का पालन करें।

माओ निंग ने कहा कि बड़े देशों को जिम्मेदार आचरण करते हुए उदाहरण पेश करना चाहिए और “जंगल के कानून” को पूरी तरह खारिज किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि चीन अंतरराष्ट्रीय कानून की प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए अन्य देशों के साथ मिलकर काम करने को तैयार है।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की चेतावनी
रॉयटर्स के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने वेनेजुएला में अमेरिका की सैन्य कार्रवाई को लेकर गंभीर चिंता जताई है। यूएन कार्यालय ने कहा है कि इस हस्तक्षेप से दुनिया पहले से ज्यादा असुरक्षित हो गई है। संयुक्त राष्ट्र की प्रवक्ता रवीना शमदासानी ने कहा, “यह कार्रवाई मानवाधिकारों की जीत नहीं है। यह अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे को कमजोर करती है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता और राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ बल प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। यूएन के मुताबिक, इससे यह खतरनाक संदेश जाता है कि ताकतवर देश कुछ भी कर सकते हैं। यूएन ने साफ शब्दों में कहा कि वेनेजुएला का भविष्य केवल और केवल वहां के लोगों को तय करना चाहिए।

कोलंबिया की चेतावनी: संप्रभुता पर हमला बर्दाश्त नहीं
लैटिन अमेरिका में अमेरिका की कार्रवाई को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। कोलंबिया की विदेश मंत्री रोजा विलाविसेंसियो ने कहा कि यदि देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर कोई खतरा आया, तो सेना हर जरूरी कदम उठाएगी। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा, “अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत हर देश को अपनी रक्षा का वैधानिक अधिकार है। किसी भी तरह की आक्रामकता का कड़ा जवाब दिया जाएगा।”

पूर्व एनएसए जॉन बोल्टन की आलोचना
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने भी वेनेजुएला को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप की नीति की तीखी आलोचना की है। इंटरव्यू में बोल्टन ने कहा कि ट्रंप का मौजूदा रुख विरोधाभासी परिणाम दे सकता है। बोल्टन के मुताबिक, “एक ओर ट्रंप लोकतांत्रिक विपक्ष की नेता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मारिया कोरीना मचाडो पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मादुरो की करीबी सहयोगी डेल्सी रोड्रिग्ज के साथ काम करने की बात कर रहे हैं।” उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के विरोधाभासी संदेशों से अमेरिका की नीति की विश्वसनीयता कमजोर होती है और वेनेजुएला में वास्तविक राजनीतिक बदलाव की संभावना कम हो जाती है।

वैश्विक टकराव के बीच वेनेजुएला का भविष्य
वेनेजुएला संकट अब केवल एक देश का आंतरिक राजनीतिक मुद्दा नहीं रह गया है। अमेरिका, रूस, चीन, संयुक्त राष्ट्र और लैटिन अमेरिकी देशों की खुली प्रतिक्रियाओं ने इसे वैश्विक शक्ति संतुलन की लड़ाई में बदल दिया है। एक ओर मचाडो देश लौटकर चुनाव और लोकतंत्र की बात कर रही हैं, तो दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय ताकतें अपने-अपने हितों के अनुसार रणनीति गढ़ रही हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि वेनेजुएला का भविष्य लोकतांत्रिक चुनावों से तय होगा या फिर वह वैश्विक राजनीति के दबावों के बीच और ज्यादा अस्थिरता की ओर बढ़ेगा।

Tags:    

Similar News