कोटद्वार के ‘मोहम्मद दीपक’ से राहुल गांधी की मुलाकात, वायरल वीडियो के बाद चर्चा में आए जिम संचालक को मिला समर्थन

दीपक 26 जनवरी को कोटद्वार के एक बाजार क्षेत्र में हुई एक बहस के बाद सुर्खियों में आए। वायरल वीडियो में दिख रहा था कि एक बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार पर कथित तौर पर अपनी दुकान के नाम से ‘बाबा’ शब्द हटाने का दबाव बनाया जा रहा था। इसी दौरान दीपक ने हस्तक्षेप करते हुए आपत्ति जताई।

Update: 2026-02-23 09:44 GMT

नई दिल्‍ली/कोटद्वार। उत्तराखंड के कोटद्वार में जिम संचालक दीपक कुमार उर्फ ‘मोहम्मद दीपक’ से कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुलाकात की है। हाल में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के बाद राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए दीपक को लेकर राहुल गांधी पहले भी सार्वजनिक रूप से समर्थन जता चुके थे। अब मुलाकात की तस्वीर साझा करते हुए राहुल गांधी ने एकता और समानता का संदेश दिया है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “उत्तराखंड के भाई ‘मोहम्मद दीपक’ से मुलाकात। एकता और साहस की ऐसी ही लौ हर भारतीय युवा में जलनी चाहिए। हर इंसान, एक समान। यही है भारतीयता, यही है मोहब्बत की दुकान।”




 



मनोबल और मजबूत हुआ

 

इस मुलाकात के बाद दीपक ने कहा कि उन्हें पहले भी अपने कदम पर भरोसा था, लेकिन अब उनका मनोबल और मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा, “हिम्मत तो पहले भी थी, अब चार गुना और बढ़ गई है। जब राहुल गांधी ने फोन करके बुलाया, तो दिल को खुशी हुई कि कोई हमें समझ रहा है कि हमने आवाज गलत के लिए नहीं, बल्कि सही के लिए उठाई थी।”

कैसे चर्चा में आए ‘मोहम्मद दीपक’


दीपक 26 जनवरी को कोटद्वार के एक बाजार क्षेत्र में हुई एक बहस के बाद सुर्खियों में आए। वायरल वीडियो में दिख रहा था कि एक बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार पर कथित तौर पर अपनी दुकान के नाम से ‘बाबा’ शब्द हटाने का दबाव बनाया जा रहा था। इसी दौरान दीपक ने हस्तक्षेप करते हुए आपत्ति जताई।

बहस के दौरान जब उनसे उनका नाम पूछा गया, तो उन्होंने जवाब दिया कि “मेरा नाम मोहम्मद दीपक है।” यही बयान तेजी से सोशल मीडिया पर फैल गया। कुछ लोगों ने इसे सांप्रदायिक सद्भाव और साझा पहचान का प्रतीक बताया, जबकि कुछ संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई। देखते ही देखते यह मामला स्थानीय स्तर से निकलकर राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बन गया। सोशल मीडिया पर समर्थन और विरोध, दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

31 जनवरी के बाद बदला माहौल

दीपक का कहना है कि 31 जनवरी को कुछ संगठनों के सदस्य उनके जिम के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली और किसी बड़े टकराव को टाल दिया। हालांकि, इसके बाद माहौल में बदलाव आ गया। दीपक के अनुसार, घटना से पहले उनके जिम में प्रतिदिन लगभग 150 सदस्य आते थे। विवाद के बाद यह संख्या घटकर 12 से 15 रह गई। उनका कहना है कि कई पुराने सदस्य फोन कर यह कहते हैं कि हालात सामान्य होने के बाद वे वापस आएंगे। दीपक ने कहा कि लोगों में डर बैठ गया है। जो नियमित आते थे, वे भी अब दूरी बनाए हुए हैं। स्थानीय स्तर पर इस घटना ने सामाजिक माहौल को भी प्रभावित किया है। जहां कुछ लोग दीपक के रुख को साहसिक मानते हैं, वहीं कुछ वर्ग इसे अनावश्यक विवाद बताते हैं।

आर्थिक दबाव की चुनौती

सदस्यों की संख्या में आई भारी गिरावट का सीधा असर दीपक की आय पर पड़ा है। उनका जिम किराए की इमारत की दूसरी मंजिल पर संचालित होता है, जिसका मासिक किराया 40 हजार रुपये है। इसके अलावा उन्होंने छह महीने पहले नया घर बनाया है, जिसकी 16 हजार रुपये की मासिक ऋण किश्त चुकानी होती है। दीपक बताते हैं कि जिम ही उनके परिवार की एकमात्र आय का स्रोत है। “मशीनें चलती हैं तो घर चलता है,” उन्होंने कहा। आमदनी घटने से वे आर्थिक दबाव में हैं। नियमित खर्चों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना अब कठिन होता जा रहा है।

कानूनी समुदाय का प्रतीकात्मक समर्थन

विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट के करीब 12 वरिष्ठ वकीलों ने दीपक के जिम की एक साल की सदस्यता लेकर समर्थन जताया। इसे प्रतीकात्मक कदम माना गया। दीपक का कहना है कि इस समर्थन ने उन्हें मानसिक मजबूती दी। “जब देश के बड़े वकील इस तरह साथ खड़े होते हैं, तो लगता है कि हम अकेले नहीं हैं,”। हालांकि यह समर्थन प्रतीकात्मक है, लेकिन इससे उन्हें सामाजिक और नैतिक हौसला मिला है।

परिवार पर भी पड़ा असर

विवाद का असर केवल व्यवसाय तक सीमित नहीं रहा। दीपक के अनुसार, तनाव का प्रभाव उनके परिवार पर भी पड़ा। घटना के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। उनकी बेटी ने कुछ दिनों तक स्कूल जाना बंद कर दिया था, हालांकि अब वह दोबारा स्कूल जाने लगी है। दीपक कहते हैं कि वे किसी राजनीतिक या सामाजिक विवाद का हिस्सा नहीं बनना चाहते। “मैं सिर्फ अपना काम करना चाहता हूं। जिम चलाना ही मेरा पेशा है,” उन्होंने स्पष्ट किया। परिवार के लिए स्थिरता और सामान्य जीवन बहाल करना उनकी प्राथमिकता है।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं

राहुल गांधी की मुलाकात ने इस मुद्दे को फिर राष्ट्रीय चर्चा में ला दिया है। कांग्रेस के कुछ नेताओं ने इसे सामाजिक एकता का उदाहरण बताया है। वहीं अन्य राजनीतिक दलों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति के बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक पहचान, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और स्थानीय संवेदनशीलताओं जैसे व्यापक सवालों को भी छूता है।पुलिस ने अब तक किसी बड़े कानूनी विवाद की पुष्टि नहीं की है, लेकिन स्थानीय प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

एक प्रतीक के रूप में उभरे


दीपक का कहना है कि वह कानून का पालन करते हुए अपना व्यवसाय जारी रखना चाहते हैं। उनका उद्देश्य किसी विवाद को बढ़ाना नहीं, बल्कि सामान्य जीवन में लौटना है। वायरल वीडियो से शुरू हुई यह कहानी अब सामाजिक और राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन चुकी है। एक ओर उन्हें समर्थन मिल रहा है, तो दूसरी ओर आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां भी सामने हैं। फिलहाल, कोटद्वार का यह जिम संचालक अपने व्यवसाय को फिर से पटरी पर लाने और परिवार के साथ सामान्य जीवन जीने की कोशिश में जुटा है, जबकि राष्ट्रीय राजनीति में उसका नाम एक प्रतीक के रूप में उभर आया है।

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