ईरान के विश्वविद्यालयों में दूसरे दिन भी सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी, अमेरिका से तनाव के बीच बिगड़े हालात

ईरान के दो बड़े शहरों तेहरान और मशहद में विश्वविद्यालय परिसरों में लगातार दूसरे दिन सरकार विरोधी प्रदर्शन हुए। छात्र समूहों और मानवाधिकार संगठनों के अनुसार कम से कम सात विश्वविद्यालयों में छात्र इकट्ठा हुए और नारेबाजी की। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी होने के बावजूद छात्रों ने परिसर में प्रदर्शन जारी रखा।

Update: 2026-02-23 05:18 GMT

तेहरान। ईरान के दो प्रमुख शहरों तेहरान और मशहद में विश्वविद्यालय परिसरों के भीतर सरकार विरोधी प्रदर्शन लगातार दूसरे दिन भी जारी रहे। छात्र समूहों और मानवाधिकार संगठनों के अनुसार कम से कम सात विश्वविद्यालयों में छात्रों ने एकत्र होकर नारेबाजी की और हालिया राजनीतिक हालात पर अपनी नाराजगी जताई। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी होने के बावजूद छात्रों ने परिसर के भीतर शांतिपूर्ण विरोध जारी रखा। यह नया विरोध ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव चरम पर है। बढ़ते क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच विश्वविद्यालयों में छात्रों की सक्रियता को देश की आंतरिक राजनीति के लिए अहम संकेत माना जा रहा है।

नए शैक्षणिक सत्र के साथ तेज हुए प्रदर्शन

रिपोर्टों के मुताबिक, नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के साथ ही शनिवार से विरोध प्रदर्शनों ने गति पकड़ी। रविवार को कई छात्रों ने काले कपड़े पहनकर पहले हुए आंदोलनों में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी। तेहरान यूनिवर्सिटी ऑफ आर्ट, ईरान यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी और मशहद के अन्य प्रमुख संस्थानों में छात्रों की बड़ी संख्या देखी गई। सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में छात्रों को परिसर के भीतर समूहों में नारे लगाते और बैनर थामे हुए देखा गया। हालांकि सरकार की ओर से इन प्रदर्शनों पर औपचारिक टिप्पणी नहीं की गई है, लेकिन सरकारी मीडिया ने परिसरों में तनाव की स्थिति का उल्लेख किया है।

सुरक्षा बलों की बढ़ी मौजूदगी

विश्वविद्यालय परिसरों के आसपास सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। छात्र संगठनों का कहना है कि सादी वर्दी में भी सुरक्षाकर्मी कैंपस के भीतर नजर आए। तेहरान विश्वविद्यालय के एक अधिकारी हुसैन गोलदानसाज ने छात्रों को “उग्र नारे” और किसी भी तरह की हिंसक गतिविधि से दूर रहने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का माहौल शैक्षणिक गतिविधियों के लिए है और किसी भी अव्यवस्था को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हालांकि, छात्रों का कहना है कि उनका विरोध शांतिपूर्ण है और वे अपने संवैधानिक अधिकारों के तहत अपनी बात रख रहे हैं।

जनवरी के प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि

ईरान में इससे पहले जनवरी में देशव्यापी प्रदर्शन हुए थे, जिन्हें सुरक्षा बलों ने सख्ती से दबा दिया था। अधिकार समूहों के अनुसार, उस समय हजारों लोगों की मौत हुई और करीब 40 हजार लोगों को गिरफ्तार किया गया। दूसरी ओर, ईरानी सरकार ने आधिकारिक तौर पर कहा था कि 3 हजार से अधिक लोगों की मौत हुई। सरकार ने इन घटनाओं के लिए इस्राइल और अमेरिका समर्थित तत्वों को जिम्मेदार ठहराया था। जनवरी के प्रदर्शनों के दौरान कई स्थानों पर सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई के शासन को समाप्त करने की मांग उठी थी। इन घटनाओं के बाद देशभर में कड़ी निगरानी और सुरक्षा प्रबंध लागू कर दिए गए थे।

विश्वविद्यालय बने असंतोष का केंद्र

ईरान में विश्वविद्यालय परिसर लंबे समय से राजनीतिक बहस और असहमति की आवाजों का केंद्र रहे हैं। छात्र समुदाय अक्सर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय व्यक्त करता रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा प्रदर्शन सिर्फ शैक्षणिक या कैंपस संबंधी मुद्दों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यापक राजनीतिक और आर्थिक असंतोष को दर्शाते हैं। देश में आर्थिक प्रतिबंधों, महंगाई और बेरोजगारी जैसी चुनौतियों के कारण युवाओं में असंतोष बढ़ा है। नए शैक्षणिक सत्र के साथ छात्रों का एक बार फिर संगठित होकर सामने आना सरकार के लिए एक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच आंदोलन

इन प्रदर्शनों का समय भी खास महत्व रखता है। ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर वार्ता जारी है। ओमान की मध्यस्थता में दोनों देशों के प्रतिनिधि स्विट्जरलैंड में फिर से बातचीत शुरू करने वाले हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में कहा कि कूटनीतिक समाधान संभव है, लेकिन ईरान यूरेनियम संवर्धन के अपने अधिकार से पीछे नहीं हटेगा। दूसरी ओर, अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा दी है। इस बढ़ते तनाव ने देश के भीतर राजनीतिक माहौल को और संवेदनशील बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आंतरिक असंतोष और बाहरी दबाव का यह संयोजन ईरान की राजनीति को जटिल बना सकता है।

सरकार की रणनीति पर नजर

हालिया प्रदर्शनों पर सरकार ने फिलहाल औपचारिक बयान देने से परहेज किया है। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था को सख्त करना और विश्वविद्यालय प्रशासन के माध्यम से चेतावनी जारी करना यह संकेत देता है कि प्रशासन स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है। यह देखना अहम होगा कि क्या सरकार संवाद का रास्ता अपनाती है या जनवरी जैसी सख्ती दोहराई जाती है।

परिसरों में विरोध जारी

फिलहाल विश्वविद्यालय परिसरों में विरोध जारी है, लेकिन स्थिति व्यापक आंदोलन का रूप लेगी या सीमित दायरे में रहेगी, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। ईरान की आंतरिक राजनीति, युवाओं की आकांक्षाएं और अंतरराष्ट्रीय दबाव इन तीनों कारकों का संगम मौजूदा हालात को निर्णायक बना सकता है। विश्वविद्यालयों में उठ रही आवाजें इस बात का संकेत हैं कि देश के युवा वर्ग के भीतर राजनीतिक और सामाजिक बदलाव की मांग अभी भी जीवित है।

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