प्रयागराज पुलिस के वाराणसी काशी पहुंचने पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बोले- कहीं भाग नहीं रहा हूं, आरोपों की निष्पक्ष जांच हो
ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपने ऊपर लगे गंभीर आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि उन पर कोई आरोप लगाया गया है तो पुलिस उसकी गहन जांच कराए और वे पूरी तरह सहयोग करने को तैयार हैं, ताकि उन पर लगे “कलंक” का शीघ्र निस्तारण हो सके।
वाराणसी। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपने ऊपर लगे गंभीर आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि उन पर कोई आरोप लगाया गया है तो पुलिस उसकी गहन जांच कराए और वे पूरी तरह सहयोग करने को तैयार हैं, ताकि उन पर लगे “कलंक” का शीघ्र निस्तारण हो सके। सोमवार को केदारघाट स्थित श्रीविद्या मठ में मीडिया से बातचीत के दौरान शंकराचार्य ने कहा कि उनके खिलाफ “कहानी गढ़कर” झूठे आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि सच सामने आने के लिए पारदर्शी जांच जरूरी है और वे स्वयं चाहते हैं कि मामले की सच्चाई जल्द उजागर हो।
गैर भाजपा शासित राज्यों की पुलिस से जांच की मांग
शंकराचार्य ने उत्तर प्रदेश पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता का विश्वास राज्य पुलिस पर कम हो गया है। उन्होंने मांग की कि उनके खिलाफ लगे आरोपों की जांच ऐसे राज्यों की पुलिस से कराई जाए, जहां गैर-भाजपा सरकार हो। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि जांच निष्पक्ष हो। यदि अन्य प्रदेशों की पुलिस जांच करेगी तो निष्पक्षता पर कोई सवाल नहीं उठेगा।” उनके इस बयान को राजनीतिक रंग भी दिया जा रहा है, क्योंकि उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने “कालनेमि” शब्द का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए।
पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज है मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रयागराज पुलिस ने माघ मेले के दौरान कथित यौन शोषण के आरोप में शंकराचार्य के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। पॉक्सो (POCSO) एक्ट बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से संबंधित मामलों में कड़े प्रावधानों वाला कानून है। इस कानून के तहत दर्ज मामलों में पुलिस को विशेष संवेदनशीलता और तत्परता से कार्रवाई करनी होती है। हालांकि, शंकराचार्य ने इन आरोपों को पूरी तरह असत्य बताया है और कहा है कि जांच में सच्चाई सामने आ जाएगी।
वाराणसी मठ में दिनभर गहमागहमी
सोमवार सुबह से ही वाराणसी के केदारघाट स्थित श्रीमठ में हलचल देखी गई। प्रयागराज पुलिस के वाराणसी पहुंचने और संभावित गिरफ्तारी की चर्चाएं तेज रहीं। हालांकि स्थानीय पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रयागराज पुलिस के आने की खबर तो है, लेकिन सोमवार देर शाम तक वह वाराणसी नहीं पहुंची थी। मठ परिसर के बाहर समर्थकों और अधिवक्ताओं की आवाजाही भी देखी गई। इस बीच शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि जो अधिवक्ता मठ पहुंचे हैं, वे अपनी श्रद्धा और व्यक्तिगत इच्छा से आए हैं।
‘गिरफ्तारी का प्रश्न नहीं बनता, फिर भी तैयार हूं’
मीडिया से बातचीत में शंकराचार्य ने कहा कि गिरफ्तारी का प्रश्न नहीं बनता क्योंकि उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं है। उन्होंने कहा, “जब आरोप ही झूठे हैं तो गिरफ्तारी किस आधार पर होगी?” हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि पुलिस कानूनी प्रक्रिया के तहत गिरफ्तारी करती है, तो वे उसके लिए भी तैयार हैं। “हम पुलिस का पूरा सहयोग करेंगे। किसी प्रकार का विरोध नहीं करेंगे,”। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि यदि गिरफ्तारी होती है तो वह केवल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की दृष्टि से हो सकती है, न कि दोष सिद्ध होने के आधार पर।
सीसीटीवी जांच की उठाई मांग
शंकराचार्य ने माघ मेले में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की मांग की। उनका कहना है कि मेले के दौरान व्यापक स्तर पर निगरानी व्यवस्था थी और कैमरों की फुटेज से घटनाक्रम स्पष्ट हो सकता है। उन्होंने कहा, “माघ मेले में तमाम सीसीटीवी लगे थे। उनकी जांच की जाए। कैमरों की जद में जो कुछ भी हुआ होगा, वह सामने आ जाएगा।” उनका दावा है कि यदि तकनीकी साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच की जाए तो उन पर लगे आरोप स्वतः निराधार सिद्ध हो जाएंगे।
‘हम कहीं भाग नहीं रहे’
शंकराचार्य ने कहा कि शिकायतकर्ता की ओर से घटना के काफी समय बाद मामला उठाया गया है। उन्होंने कहा, “इतने दिन बीत गए, हम कहीं भागे नहीं जा रहे हैं। हम यहीं हैं और जांच में पूरा सहयोग देंगे।” उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग समाज के सामने उन्हें दोषी सिद्ध करना चाहते हैं, जबकि अभी जांच पूरी भी नहीं हुई है। उनके अनुसार, बिना साक्ष्यों के सार्वजनिक चर्चा और गिरफ्तारी की अटकलें उनके सम्मान को ठेस पहुंचा रही हैं।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया की संभावना
यह मामला धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से संवेदनशील माना जा रहा है। शंकराचार्य का पद हिंदू धार्मिक परंपरा में अत्यंत प्रतिष्ठित है। ऐसे में आरोपों और जांच की प्रक्रिया को लेकर व्यापक चर्चा की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच अत्यंत आवश्यक होती है, ताकि न तो किसी निर्दोष को क्षति पहुंचे और न ही किसी शिकायतकर्ता के साथ अन्याय हो। पुलिस की ओर से अब तक केवल प्राथमिकी दर्ज होने की पुष्टि की गई है। आगे की जांच और संभावित कार्रवाई पर आधिकारिक बयान का इंतजार है।
पुलिस और प्रशासन की गतिविधियों पर नजर
ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपने ऊपर लगे आरोपों को झूठा बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है और पुलिस को पूरा सहयोग देने की बात कही है। मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज होने से स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। वाराणसी और प्रयागराज दोनों स्थानों पर पुलिस और प्रशासन की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। अब आगे की कार्रवाई और जांच के निष्कर्ष इस प्रकरण की दिशा तय करेंगे।