विश्वविद्यालय तोड़ने का बेतुका फैसला
भाजपा सरकार के बुलडोजर न्याय का ताजा शिकार अब एक विश्वविद्यालय होने जा रहा है। उत्तर प्रदेश के रामपुर में स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय पर अवैध निर्माण का आरोप लगाते हुए प्रशासन ने सख्ती दिखाई है;
भाजपा सरकार के बुलडोजर न्याय का ताजा शिकार अब एक विश्वविद्यालय होने जा रहा है। उत्तर प्रदेश के रामपुर में स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय पर अवैध निर्माण का आरोप लगाते हुए प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने विश्वविद्यालय परिसर में बिना स्वीकृत नक्शे के बने 38 भवनों को अवैध मानते हुए उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया है। गौरतलब है कि इस विश्वविद्यालय को दिग्गज समाजवादी पार्टी नेता और पूर्व मंत्री आजम खान ने 2006 में स्थापित किया था और 2012 को इसका उद्घाटन हुआ। इस समय आजम खान पर अवैध निर्माण और जमीन पर कब्जे को लेकर पहले से कानूनी शिकंजे कसे हैं, अब एक और बड़ी कार्रवाई उनके खिलाफ होने जा रही है। 2017 में राज्य में भाजपा सरकार आने के बाद से जौहर विश्वविद्यालय के खिलाफ कई और मामले खड़े किए जा चुके हैं, लेकिन अब इसे तोड़ने के आदेश से सियासत तेज हो चुकी है। क्योंकि इसमें राजनैतिक बदले की बू आ रही है।
प्रशासन ने अवैध निर्माण के आरोप विश्वविद्यालय पर लगाए हैं, तो उसके खिलाफ कार्रवाई के कई और तरीके हो सकते हैं। चाहे तो भाजपा इसे अपने अधीन कर ले, या फिर विश्वविद्यालय पर बड़ा जुर्माना लगा दिया जाए, या कोई और सख्ती बरत ले। लेकिन बनी-बनाई इमारतों को तोड़ने की तुक समझ से परे है। और ये इमारतें केवल रेत-सीमेंट का ढांचा भर नहीं हैं, न इन इमारतों के भीतर से कोई गंभीर अपराध संचालित किए जाते हैं। यहां कई अहम विषयों की पढ़ाई होती है। ज्ञानार्जन के लिए रामपुर और आसपास के गांवों के ऐसे कितने बच्चे यहां पढ़ते होंगे, जिनके लिए दिल्ली क्या लखनऊ भी दूर होगा। अगर विश्वविद्यालय ने अवैध निर्माण किया है, तो इसमें छात्रों का क्या कसूर, उन्हें क्यों पढ़ाई से वंचित कराया जा रहा है।
इसी उत्तरप्रदेश में न जाने और कितने अवैध निर्माण हुए होंगे, या गैरकानूनी काम चल रहे होंगे। अभी राम मंदिर में ही करोड़ों का चढ़ावा चुरा लिया गया है, तो क्या इस मामले में सरकार बुलडोजर कार्रवाई की पहल करेगी। क्या आजम खान नाम जुड़ा होना ही बुलडोजर का फैसला लेने के लिए पर्याप्त है। एक विश्वविद्यालय को तोड़ने का मूर्खतापूर्ण फैसला लेने वाली भाजपा सरकार यकीनन शिक्षा की महत्ता से परिचित नहीं है। वैसे केंद्र सरकार का हाल भी ऐसा ही है। अभी शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर ही जंतर-मंतर पर धरने से लेकर छात्रों की गूंज जैसे आंदोलन खड़े हुए हैं। इधर हफ्ते भर पहले शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट आई है, जिसके अनुसार, पिछले एक साल में देशभर में लगभग 8,077 सरकारी स्कूल बंद हो गए हैं। 2024-25 में देशभर में 10.13 लाख सरकारी स्कूल थे, जिनकी संख्या 2025-26 में घटकर 10.05 लाख रह गई। वहीं इसी अवधि में निजी स्कूलों की संख्या में 2,106 की बढ़ोतरी हुई (यानी रोजाना औसतन 6 नए निजी स्कूल खुले)। नीति आयोग की भी एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 10 सालों में देशभर में करीब 94,000 सरकारी स्कूल बंद हुए या उनका विलय किया गया है।
नरेन्द्र मोदी छात्रों से परीक्षा पर चर्चा तो खूब करते हैं, क्या कभी वे इस बात की चर्चा कर पाएंगे कि 94 हजार स्कूल क्यों बंद किए गए। क्यों गरीबों को शिक्षा से वंचित करने की राह पर सरकार चल रही है।
यही सवाल मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी से है कि उन्होंने कितने सरकारी उच्च शिक्षण संस्थानों को खोला है, वे सत्ता के 9 सालों में कितनी दफा मंदिरों में गए हैं और कितनी बार उन्होंने स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालयों का दौरा किया है। आजम खान की राजनीति, उनकी विचारधारा, तौर-तरीकों से बेशक योगी सरकार या सपा विरोधियों को तकलीफ हो सकती है, लेकिन इससे विश्वविद्यालय खोलने का उनका महत्वपूर्ण काम कम करके नहीं आंका जा सकता।
वैसे इस आदेश पर रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि जिले में अवैध निर्माण के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है और इसी क्रम में जौहर विश्वविद्यालय की भी जांच की गई। 15 जुलाई को सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से कहा गया कि ग्राम सिंगनखेड़ा, जहां विश्वविद्यालय स्थित है, 27 सितंबर 2024 से पहले रामपुर विकास प्राधिकरण के विकास क्षेत्र में शामिल नहीं था। इसलिए आरडीए से नक्शा स्वीकृत कराने की आवश्यकता नहीं थी। साथ ही यह भी दलील दी गई कि अधिकांश निर्माण पुराने हैं और वर्तमान नियमों के आधार पर उन्हें अवैध नहीं ठहराया जा सकता। हालांकि, रामपुर विकास प्राधिकरण ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया। आदेश में कहा गया कि भले ही यह क्षेत्र बाद में विकास प्राधिकरण की सीमा में शामिल हुआ हो, लेकिन निर्माण के समय भी संबंधित सक्षम प्राधिकारी से भवन निर्माण की अनुमति लेना अनिवार्य था।
बता दें कि विश्वविद्यालय में करीब 2,500 से अधिक छात्र विभिन्न स्नातक, स्नातकोत्तर और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत हैं, जिनमें दूसरे जिलों और राज्यों के विद्यार्थी भी शामिल हैं। बुलडोजर चलाने के फैसले से ढाई हजार से अधिक विद्यार्थियों की पढ़ाई, परीक्षाओं और डिग्री को लेकर चिंता खड़ी हो गई है। छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि यदि शैक्षणिक भवन प्रभावित होते हैं तो कक्षाएं, प्रयोगशालाएं और अन्य शैक्षणिक गतिविधियां बाधित हो सकती हैं। इससे परीक्षाओं, डिग्री और आगामी शैक्षणिक सत्र पर भी असर पड़ने की आशंका है। उन्होंने प्रशासन से स्पष्ट दिशा-निर्देश और वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। बता दें कि जौहर विवि एक निजी विश्वविद्यालय है जो रामपुर में मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की ओर से संचालित होता है। इसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से मान्यता प्राप्त है। बीटेक, एमटेक, इंजीनियरिंग डिप्लोमा, पॉलीटेक्निक, बीसीए, एमबीए, बीबीए, एमकॉम, एमए, मास्टर ऑफ टूरिज्म एवं ट्रेवल, बीए, विधि संकाय, बीएएलएलबी, एमएससी, बीएससी, एम फार्मा, बी फार्मा, डीफार्मा, बीएड, डिप्लोमा इन नर्सिंग जैसे तमाम पाठ्यक्रमों में यहां पढ़ाई होती है। लेकिन अब कब तक हो पाएगी, कहा नहीं जा सकता।