झारखंड में सोरेन सरकार की सही पहल
नरेन्द्र मोदी जिस काम को नहीं कर सके, वो काम राहुल गांधी ने कर दिखाया। झारखंड में छात्र आंदोलन में राहुल गांधी के सार्थक हस्तक्षेप ने सकारात्मक राजनीति का रास्ता तैयार किया है;
नरेन्द्र मोदी जिस काम को नहीं कर सके, वो काम राहुल गांधी ने कर दिखाया। झारखंड में छात्र आंदोलन में राहुल गांधी के सार्थक हस्तक्षेप ने सकारात्मक राजनीति का रास्ता तैयार किया है। गौरतलब है कि झारखंड में 24 दिनों लंबा छात्र आंदोलन चला। आंदोलनकारियों की मांग थी कि झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा को रद्द किया जाए, क्योंकि इसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है। छात्रों ने पेपर लीक के साथ-साथ ओएमआर शीट में धांधली, अयोग्य एजेंसियों को परीक्षा का ठेका देना और कट-ऑफ जारी न करने के आरोप भी लगाए। छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो समेत कुछ आंदोलनकारियों ने अनशन भी किया था। जंतर-मंतर पर हुए सफल आंदोलन के ठीक बाद झारखंड में आंदोलन खड़ा हुआ तो जाहिर तौर पर देश की निगाहें वहां गईं। देखते ही देखते आंदोलन ने बड़ा रूप ले लिया। झारखंड में चूंकि झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस की गठबंधन सरकार है, तो दिल्ली में मात खाई भाजपा को एक बड़ा अवसर मिल गया कि वह रांची में हिसाब-किताब बराबर कर ले। लेकिन राहुल गांधी की सूझबूझ और दूरदृष्टि ने भाजपा के इस खेल को भी खराब कर दिया।
राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से प्रदर्शनकारियों से 'व्यक्तिगत रूप से मिलने' का सुझाव देते हुए एक पत्र लिखा। इसमें राहुल गांधी ने उल्लेख किया कि राज्य सरकार द्वारा समिति का गठन कर बातचीत शुरू करना सराहनीय है, लेकिन फिर भी कुछ छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। ऐसे में सरकार को छात्रों के साथ खड़े होना चाहिए। राहुल गांधी ने 14 अगस्त को लिखे अपने पत्र में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अपील की कि वे प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करें ताकि उनकी बची हुई समस्याओं का समाधान हो सके। राहुल ने कहा था कि संविधान में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार लोकतंत्र का एक मुख्य स्तंभ है। झारखंड के युवाओं का यह आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण है और उनकी मांगें जायज हैं।
यह पत्र 17 तारीख को सार्वजनिक चर्चा में आया और उसी रात मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने घोषणा की कि झारखंड कर्मचारी चयन आयोग यानी जेएसएससी की संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा को रद्द कर दिया गया है। इसके साथ ही परीक्षा कराने वाली एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्रा.लि. (टीडीपीएल) के माध्यम से हुई सभी भर्तियां और उनके परिणाम भी निरस्त कर दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी ऐलान किया कि 2014 से टीडीपीएल के जरिए आयोजित सभी परीक्षाओं की सीआईडी जांच कराई जाएगी, जबकि परीक्षा में हुई गड़बड़ियों की जांच के लिए एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में अलग जांच समिति बनाई जाएगी। इस फैसले के बाद देवेंद्रनाथ महतो ने अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है। हेमंत सोरेन ने माना कि सरकार के पास परीक्षा कराने के लिए पहले से स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर यानी एसओपी मौजूद था, लेकिन उसका सही तरीके से पालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा, 'हमारे पास एसओपी पहले से था, लेकिन उसका पालन नहीं हुआ। इसी वजह से हाल के वर्षों में परीक्षाओं में गड़बड़ियां आईं।' उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में परीक्षा प्रणाली को पूरी पारदर्शिता के साथ सुधारा जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि सरकार ने छात्रों की शिकायतें दर्ज करने के लिए एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया है। इस पोर्टल पर आने वाली शिकायतों को जांच कर रही विशेषज्ञ समिति के साथ साझा किया जाएगा ताकि परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार किए जा सकें। हेमंत सोरेन ने कहा कि छात्रों के हित में उनकी सरकार पहले ही पेपर लीक रोकने के लिए कानून बना चुकी है। उन्होंने कहा कि अब परीक्षा व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए और भी सुधार किए जाएंगे ताकि भविष्य में इस तरह की शिकायतें दोबारा सामने न आएं।
किसी भी सरकार के मुखिया को व्यवस्था में सुधार की जो बातें कहना चाहिए, वही सब हेमंत सोरेन ने कही हैं। हालांकि परीक्षा माफिया देश की व्यवस्था में इतने गहरे तक जड़ें जमा चुका है कि उसे एकदम से खत्म करना आसान नहीं होगा। इस भ्रष्टाचार में करोड़ों-अरबों का हेर-फेर होता है, और एक साथ कई लोग इसमें संलिप्त रहते हैं। इसलिए इससे वही सरकार सख्ती से निपट सकती है जो बिल्कुल दबाव में न आए और अपने सख्त फैसलों पर कायम रहे। निकट भविष्य में हेमंत सोरेन इस कसौटी पर कितने खरे उतरते हैं, यह देखना होगा। लेकिन अभी कम से कम उन्होंने राहुल गांधी की बात सुनकर सही फैसला लिया है।
आंदोलनकारी छात्र सरकार से लगातार अपनी नाराजगी दिखा रहे थे। इस आग में घी डालने का काम भाजपा उसके सहयोगी संगठन और साथी मीडिया अच्छे से कर रहा था। आंदोलन के शुरु से राहुल गांधी का नाम लेकर पूछा जा रहा था कि वे रांची क्यों नहीं आते और क्यों आंदोलनकारियों का साथ नहीं देते। हालांकि राहुल गांधी ने आंदोलनकारी छात्रों से फोन पर बात की थी और जब झारखंड पुलिस ने उन पर लाठी चार्ज किया तो उसकी निंदा भी की थी। राहुल गांधी ने लगातार छात्रों के हक में बात की और उनका चि_ी लिखना भी यह जाहिर करता है कि उनका रवैया दिल्ली से लेकर रांची तक एक ही रहा, उसमें बदलाव नहीं आया। मगर भाजपा ने दिखा दिया कि उसके लिए छात्र आंदोलन भी केवल राजनीति का जरिया है, इसलिए जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर लाठी बरसाने वाली भाजपा रांची में इसी बात पर सवाल उठा रही थी।
बहरहाल, जनता भी देख रही है कि कौन असल में छात्र हितों की बात करता है और उस पर अमल भी करता है और कौन केवल जुबानी जमाखर्च करता है।