देश में बड़े बदलाव की शुरुआत

नरेन्द्र मोदी के सामने इस समय राहुल गांधी ने फिर से एक बड़ी चुनौती पेश कर दी है। भाजपा, नरेंद्र मोदी, अमित शाह और ज्ञानेश कुमार ने चुनाव में धांधली की है।;

By :  DB Desk
Update: 2026-09-30 21:43 GMT

नरेन्द्र मोदी के सामने इस समय राहुल गांधी ने फिर से एक बड़ी चुनौती पेश कर दी है। भाजपा, नरेंद्र मोदी, अमित शाह और ज्ञानेश कुमार ने चुनाव में धांधली की है। हम इसे चुपचाप बर्दाश्त नहीं करेंगे। भारतीय लोकतंत्र को नष्ट करने वालों को दंडित किया जाएगा, चाहे वे कितने भी वरिष्ठ पद पर क्यों न हों। भारत के लोकतंत्र से बड़ा कोई नहीं है। यह बातें जब बुधवार को इंडिया गठबंधन की बैठक के बाद प्रेस को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कही, तो उनके शब्दों की गंभीरता को नजरंदाज करना मुश्किल था। राहुल गांधी पहले भी कह चुके हैं कि साल भर के भीतर मोदी सरकार चली जाएगी। उन्होंने दावा किया है कि अब मोदी सरकार की बनाई व्यवस्था दरक रही है और भीतर से ही जानकारियां बाहर आ रही हैं। यह बात पहले से मोदी सरकार के लिए परेशानी का सबब थी और अब इंडिया गठबंधन की बैठक ने भाजपा और चुनाव आयोग को और ज्यादा डरा दिया है।

पिछले हफ्ते द इंडियन एक्सप्रेस ने चुनाव आयोग के भीतर ज्ञानेश कुमार के फैसलों से असहमति का सनसनीखेज खुलासा किया था। इसके बाद से देश भर में विपक्ष ने चुनाव आयोग और मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल लिया। कांग्रेस ने तो देश के तमाम राज्यों में विरोध-प्रदर्शन किए और भाजपा सरकारों ने उन्हें कुचलने की आदतन कोशिश की। इसके बाद जब यह तय हुआ कि 30 सितंबर को इंडिया गठबंधन की बैठक होने वाली है, फिर से चुनाव आयोग को बचाने की कोशिशें शुरु हो गईं। भाजपा और एनडीए नेता तो चुनाव चोरी को नकारते हुए ज्ञानेश कुमार का बचाव कर ही रहे थे, अब बैनर-पोस्टर भी लगाए गए। दिल्ली में राहुल गांधी, अखिलेश यादव जैसे नेताओं पर चुनाव में हार पर तंज कसते हुए पोस्टर लगाए गए। इन पोस्टर्स में लगाने वालों का नाम नहीं लिखा है, जाहिर है जो कोई भी इनके पीछे है वो डरपोक है और छिप कर वार करने में यकीन रखता है। पाठकों को याद होगा कि इससे पहले आठ जून को इंडिया की एक अहम बैठक हुई थी, तब बंगाल चुनाव में धांधली का मामला ताजा था। तब भी राहुल गांधी के खिलाफ ऐसे ही पोस्टर लगे थे। उस बैठक में राहुल गांधी ने प्रतिरोध की राजनीति करने का आह्वान विपक्ष से किया था। विपक्ष के बाकी दल तो खैर अपने एजेंडे और सुविधाओं के हिसाब से ही राहुल गांधी की बात पर आगे बढ़ते हैं, लेकिन इस देश के युवा ने जरूर कहे-अनकहे तरीके से राहुल गांधी की बात पर अमल करना शुरु किया।

जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के कहने पर युवा एकत्र हुए, लेकिन उसके बाद सीजेपी की बनाई लकीर से आगे बढ़ते हुए अपना प्रतिरोध मोदी सरकार के खिलाफ दर्ज किया। सोनम वांगचुक ने अनशन तोड़ा या सीजेपी के लोगों ने सरकारी नुमांइदों से मिलकर आंदोलन खत्म करने का ऐलान किया, इन बातों से युवाओं के प्रतिरोध के जज्बे में कोई कमी नहीं आई। पिछले दिनों देश के कई राज्यों में अलग-अलग मुद्दों पर युवा जिस तरह गलत के विरोध में आंदोलनरत हो रहे हैं, वह इसकी मिसाल है। इन युवाओं को एक बार फिर साथ आने का आह्वान इंडिया गठबंधन ने 30 सितंबर की बैठक में किया है। ममता बनर्जी ने तो साफ कहा है कि ज्ञानेश कुमार तुरंत इस्तीफा दें वर्ना लंबा आंदोलन चलाया जाएगा। उन्होंने विपक्षी दलों के अलावा युवाओं, महिलाओं, एनजीओ के साथियों और पत्रकारों समेत समाज के हरेक तबके से लोकतंत्र बचाने की लड़ाई में साथ आने की अपील की है।

दो अक्टूबर से इंडिया गठबंधन देश के हर जिले में लोकतंत्र बचाओ मार्च निकालने जा रहा है, जो आठ अक्टूबर तक निकाला जाएगा। छह तारीख को सारे सांसद चुनाव आयोग तक मार्च निकालेंगे। राष्ट्रपति मुर्मू से मिलने का समय भी मांगा जाएगा। इसके अलावा पांच बड़ी रैलियां देश भर में अगले महीने होंगी और एक नवंबर को दिल्ली में विशाल रैली करने का फैसला बैठक में लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट में लंबित एसआईआर और चुनावी मामलों से संबंधित सभी मामलों के शीघ्र निपटारे की अपील भी इंडिया के नेता करेंगे। यानी मोदी सरकार के खिलाफ प्रतिरोध हर तरीके से तेज किया जाएगा, यह तय हो चुका है। शायद यही वजह है कि अब भाजपा और चुनाव आयोग की घबराहट सामने नजर आ रही है। इंडिया की बैठक के बाद केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान तंज कस रहे हैं कि इस बैठक में अखिलेश यादव, उद्धव ठाकरे, हेमंत सोरेन जैसे नेता नहीं आए क्योंकि इंडिया गठबंधन के लोग राहुल को अपना नेता नहीं मान रहे हैं। ऐसे बयान खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे जैसे लगते हैं। उधर जिस फॉर्म 6 में बदलाव के जरिए 18 बरस की आयु पूरी कर चुके युवाओं का वोटर लिस्ट में नाम दर्ज होने से रोका जा रहा था, उस मनमाने नियम पर भी इंडिया की बैठक से पहले चुनाव आयोग ने यू टर्न ले लिया। पहले फॉर्म 6 में एक अलग घोषणापत्र भरवाया जा रहा था, जिसमें एसआईआर वाले प्रावधान के तहत नए मतदाताओं को यह बताना पड़ रहा था कि वे या उनके माता-पिता पिछली एसआईआर की मतदाता सूची में शामिल थे या नहीं। इस पर चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आपत्ति जाहिर की थी। फिर सीजेपी और कांग्रेस ने भी इस पर सवाल उठाए कि ऐसे नियम से कई युवाओं का नाम वोटर लिस्ट में दर्ज नहीं हो पा रहा है। लेकिन अब चुनाव आयोग ने इस अतिरिक्त घोषणापत्र को हटाने का फैसला कर लिया है। यानी विपक्ष का दबाव रंग ला रहा है।

अब 2 अक्टूबर से किस तरह देश भर में इंडिया ब्लॉक लोकतंत्र बचाने की लड़ाई शुरु करता है और इसमें क्या मोदी सरकार की विदाई की इबारत लिखी जाएगी, यह देखना होगा।

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