ललित सुरजन की कलम से आम जनता पर इंटरनेट की खुफिया निगाह
'विगत सप्ताह कैम्ब्रिज एनालिटिका का जो स्कैण्डल सामने आया है उसके बाद से स्कूल के दिनों में निबंध लिखने का एक प्रचलित विषय बारंबार याद आ रहा है।;
'विगत सप्ताह कैम्ब्रिज एनालिटिका का जो स्कैण्डल सामने आया है उसके बाद से स्कूल के दिनों में निबंध लिखने का एक प्रचलित विषय बारंबार याद आ रहा है। विज्ञान वरदान है या अभिशाप। यह कैसे कहें कि विज्ञान अभिशाप है!
मनुष्य सभ्यता की हजारों वर्ष की यात्रा आखिरकार विज्ञान की ही तो देन है। अगर आदिमानव ने अग्नि का आविष्कार न किया होता, अगर उसके बाद चक्के का आविष्कार न हुआ होता तो क्या हम वहां पहुंच पाते जहां आज हैं?
छपाई मशीन, टेलीफोन, बिजली, भाप का इंजन, एक्स-रे- ये तमाम वैज्ञानिक आविष्कार ही तो हैं जिन्होंने मनुष्य जीवन को सुखद बनाने में भूमिका निभाई। ऐसे में यही कहना पड़ता है कि आविष्कार तो मूल्यनिरपेक्ष है।
उसका अच्छा या बुरा होना, वरदान या अभिशाप होना उपयोगकर्ता पर निर्भर करता है। जिस माचिस की तीली से रोटी पकाने के लिए चूल्हा जलता है उसी से घर भी जलाया जा सकता है।
यही बात चाकू से लेकर नाभिकीय ऊर्जा तक पर लागू होती है।'
(देशबन्धु में 29 मार्च 2018 को प्रकाशित)
https://lalitsurjan.blogspot.com/2018/03/blog-post_31.html