ललित सुरजन की कलम से इस चेतावनी को सुनें

By :  DB Desk
Update: 2026-06-03 22:00 GMT

'यह व्यापार ही तो है जिसके चलते दुनिया के भूगोल में कई बार परिवर्तन हुए हैं और राजनीतिक इतिहास में नए-नए मोड़ आए हैं। अमेरिका ने लैटिन अमेरिकी देशों को हमेशा अपने अंगूठे के नीचे रखना चाहा, जिसका सफल प्रतिकार सबसे पहले फिदेल कास्त्रो के क्यूबा ने किया। कास्त्रो की राह पर ही वेनेजुएला के ह्यूगो शावेज, ब्राजील के जेवियर लूला, बोलेविया के इवो मोरालेस आदि चले, अर्जेन्टीना के नेस्टर किर्चनर ने भी काफी हद तक उसी रास्ते को अपनाया। यह सब अमेरिका को पसंद नहीं आया, परिणाम सामने है। ब्राजील में राष्ट्रपति दिलमा रूसेफ को संसद में महाभियोग लाकर हटाकर एक कार्पोरेट मुखिया को राष्ट्रपति बना दिया गया। वेनेजुएला में राष्ट्रपति निकोलस मदुरो को हटाने की कोशिशें हो रही हैं। अर्जेन्टीना में पूर्व राष्ट्रपति क्रिस्टीना किर्चनर के ऊपर मुकदमे की तैयारी चल रही है। इधर रूस और चीन की निकटता बढ़ी है। पाकिस्तान के साथ भी रूस ने संबंध बढ़ाए हैं। चीन ने भारत को ''वन बेल्ट वन रोड' परियोजना में भागीदार बनने के लिए आमंत्रित किया है। भारत अभी तय नहीं कर पा रहा है कि वह समयसिद्ध मित्र रूस के साथ कहां तक संबंध निभाए, पाकिस्तान के प्रति उसकी नीति क्या हो और चीन से रिश्तों की शक्ल क्या बने।'

(अक्षर पर्व फरवरी 2017 अंक की प्रस्तावना)

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