ललित सुरजन की कलम से - दिल्ली में गुजरात !
'यूं देखा जाए तो गुजराती भोजनालय भारत के कोने-कोने में मिल जाएंगे। देश में जो प्रमुख पर्यटन स्थल हैं, खासकर तीर्थस्थान, वहां गुजराती भोजनालय होना मानों अनिवार्य ही है।;
'यूं देखा जाए तो गुजराती भोजनालय भारत के कोने-कोने में मिल जाएंगे। देश में जो प्रमुख पर्यटन स्थल हैं, खासकर तीर्थस्थान, वहां गुजराती भोजनालय होना मानों अनिवार्य ही है। मुझे याद है कि बरसों पहिले 1987 में पहलगाम में एक समय का भोजन हमने एक गुजराती भोजनालय में ही किया था।
इसका कारण शायद यही है कि गुजराती लोग पर्यटनप्रिय तो हैं, लेकिन खानपान में वे प्रयोग पसंद नहीं करते। इसीलिए इधर कुछ बरसों से भारतीयों में विदेश भ्रमण के प्रति बढ़ती रुझान के साथ-साथ गुजराती शाकाहारी अथवा जैन शाकाहारी भोजन की गारंटी भी टूर आपरेटर देने लगे हैं।
बहरहाल, गुजराती भोजनालय का मुद्दा इसलिए उठा क्योंकि दो दिन पूर्व टीवी के जाने-माने पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने ट्विटर पर लिखा कि दिल्ली में कोई अच्छा गुजराती भोजनालय क्यों नहीं है? श्री सरदेसाई लंबे समय से दिल्ली में निवासरत हैं और अनुमान लगाया जा सकता है कि नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें चिंता हुई होगी कि आने वाले दिनों में दिल्ली आने वाले गुजराती भाई-बहनों को भोजन में किसी तरह की असुविधा न हो!'
(देशबन्धु में 5 जून 2014 को प्रकाशित)
https://lalitsurjan.blogspot.com/2014/06/blog-post.html