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अटूट बंधन

अटूट बंधन

महेन्द्र तिवारी सुबह के साढ़े चार बजे थे। रात का अंधियारा अभी पूरी तरह से हटा नहीं था और आसमान में तारे भी अपनी चमक खो चुके थे, मानो वे भी थककर सो गए...

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