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ममता कालिया को साहित्य अकादमी पुरस्कार का ऐलान, ‘जीते जी इलाहाबाद’ के लिए सम्मान

हिंदी की वरिष्ठ कथाकार ममता कालिया को साल 2025 का साहित्य अकादमी पुरस्कार देने की घोषणा हुई है। ममता कालिया को यह पुरस्कार उनके संस्मरण ‘जीते जी इलाहाबाद’ के लिए दिया गया है।

ममता कालिया को साहित्य अकादमी पुरस्कार का ऐलान, ‘जीते जी इलाहाबाद’ के लिए सम्मान
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नई दिल्ली। हिंदी की वरिष्ठ कथाकार ममता कालिया को साल 2025 का साहित्य अकादमी पुरस्कार देने की घोषणा हुई है। ममता कालिया को यह पुरस्कार उनके संस्मरण ‘जीते जी इलाहाबाद’ के लिए दिया गया है। साहित्य अकादमी की तरफ से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक अकादमी द्वारा मान्यता प्राप्त 24 भारतीय भाषाओं में वार्षिक साहित्य अकादमी पुरस्कार दिए जाएंगे।

इन पुरस्कारों में आठ कविता संग्रह, चार उपन्यास, छह कहानी संग्रह, दो निबंध, एक साहित्यिक आलोचना, एक आत्मकथा और दो संस्मरण पुस्तकें शामिल हैं। साहित्य अकादमी पुरस्कार 2025 की प्रक्रिया जनवरी 2025 में शुरू हुई और 30 जनवरी 2025 को एक विज्ञापन जारी किया गया।

ममता कालिया की प्रतिक्रिया

साहित्य अकादमी पुरस्कार की घोषणा के बाद लेखिका ममता कालिया ने फेसबुक पर पोस्ट किया है। उन्होंने लिखा है कि दोस्तो धन्यवाद,शुक्रिया। ऐसा बहुत कम होता है कि हमारे फोन पर ट्रैफिक जाम हो। माफी। आपका प्यार अब प्यार देने से ही पूर्ण होगा। ममता कालिया ने आगे लिखा है कि आप सब की दुआएं मुझे अगली किताब लिखने के लिए उकसाती हैं। साहित्य अकादमी से पुरस्कृत लेखकों के लिए 31 मार्च 2026 को नई दिल्ली में एक भव्य समारोह का आयोजन होगा। इस दौरान एक उत्कीर्ण ताम्रफलक, शॉल और एक लाख रुपए की राशि पुरस्कृत लेखकों को दी जाएगी।

जीते जी इलाहाबाद किताब में क्या

जीते जी इलाहाबाद किताब ममता कालिया का संस्मरण है। इसमें लेखिका ने इलाहाबाद में बिताए गए अपने शुरुआती दिनों को याद किया है। इस किताब में उन्होंने अपने रानीमंडी के मकान, लोकनाथ के स्वाद और चौक समेत पुराने शहर के बारे में अलग-अलग अंदाज में लिखा है। इसके अलावा ममता कालिया ने उस दौर के लेखकों और उनके तौर-तरीकों को भी अपनी किताब में विस्तार दिया है।

एक दिलचस्प किस्सा

जीते जी इलाहाबाद किताब में ममता कालिया ने एक दिलचस्प किस्सा साझा किया है। वह लिखती हैं, हिन्दुस्तानी अकादमी की एक गोष्ठी में मार्कण्डेय काटजू अध्यक्षता कर रहे थे। वे जाने-माने न्यायमूर्ति थे और शहर में उनका दबदबा था। अध्यक्षीय भाषण में उन्होंने कहा, ‘वैसे देखा जाए तो प्रेमचंद इतने बड़े कथाकार नहीं थे कि...’ भैरव जी हॉल में चिंघाड़े, ‘आप प्रेमचंद के बारे में क्या जानते हो, क्या समझते हो। किसने आपको जज बना दिया। भागो यहां से।’ भैरव जी उन्हें मंच से धकेलने के लिए लपके तो मार्कण्डेय काटजू तपाक से कूदकर मंच से उतरे और नंगे पैरों बाहर भागे। उनका अर्दली जूते उठाकर पीछे-पीछे दौड़ा। भैरव जी के रौद्र रूप के आगे सब सहम गए।


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