विकास के लिये उत्तर प्रदेश का विभाजन जरूरी: आप

 लोकसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में अपनी जड़े तलाश रही आम आदमी पार्टी (आप) ने विकास के लिये छोटे राज्यों की अवधारणा पर जोर दिया है

Update: 2018-09-18 17:46 GMT

लखनऊ।  लोकसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में अपनी जड़े तलाश रही आम आदमी पार्टी (आप) ने विकास के लिये छोटे राज्यों की अवधारणा पर जोर दिया है।

अाप प्रवक्ता संजय सिंह ने मंगलवार को कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल एवं घनी आबादी वाले राज्य के विकास के लिए जरूरी है कि इसे चार भागों में बांट दिया जाये। उत्तराखंड इसका बेहतरीन उदाहरण है। उत्तर प्रदेश से अलग होने के बाद पर्वतीय राज्य ने खासी तरक्की की है। जीडीपी के मामले में उत्तर प्रदेश देश में 16वें स्थान पर है वहीं उत्तराखंड की रैंक पांचवी है।

उन्होने कहा कि उत्तर प्रदेश को पूर्वांचल,बुंदेलखंड,पश्चिमांचल और अवध राज्य के तौर पर बांट देना चाहिये। इस बारे में 2011 में तत्कालीन मायावती सरकार के शासनकाल में एक प्रस्ताव पारित हो चुका है। चार भागों में विभक्त होने पर प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार आयेगा और राज्यों की आर्थिक रफ्तार तेजी पकड सकेगी।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ विपक्षी दलों के महागठबंधन की वकालत करते हुये आप प्रवक्ता ने कहा कि देश को महंगाई और भ्रष्टाचार के गर्त में ढकेलने वाली भाजपा को रोकने की हरसंभव कोशिश की जानी चाहिये। हालांकि उनकी पार्टी गठबंधन का हिस्सा फिलहाल नही बनेगी और लोकसभा चुनाव में 80 से 100 सीटों पर अपने प्रत्याशी खडा करेगी। दिल्ली की सभी सीटों पर पार्टी किस्मत आजमायेगी जबकि उत्तर प्रदेश और बिहार की चुनिंदा सीटों पर आप प्रत्याशी मैदान में होंगे।

पेट्रोलियम पदार्थो की बढती कीमतों के लिये सीधे तौर पर केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुये श्री सिंह ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान छू रही है जिसका कारण है कि पिछली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के मुकाबले मौजूद केन्द्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में डीजल के लिये 443 फीसदी और पेट्रोल पर 213 फीसदी तक की बढोत्तरी की है।

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