Congress on Trade Deal: भारत-US ट्रेड डील पर कांग्रेस हमलावर, जयराम रमेश ने कहा-वॉशिंगटन में मोगैम्बो खुश है

जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई बातचीत की जानकारी भारतीय पक्ष की ओर से नहीं, बल्कि भारत में अमेरिका के राजदूत की ओर से दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह अब एक “रूटीन” बनता जा रहा है कि भारत को अपनी ही सरकार के फैसलों की जानकारी ट्रम्प या उनके प्रतिनिधियों से मिलती है।

Update: 2026-02-03 04:54 GMT
नई दिल्‍ली। भारत और अमेरिका के बीच नई ट्रेड डील की घोषणा के बाद कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि “वॉशिंगटन में मोगैम्बो खुश है” और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने दबाव में दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि क्या इस समझौते के तहत भारत ने रूस से तेल खरीद बंद करने पर सहमति दे दी है और क्या अमेरिका से बड़े पैमाने पर सामान खरीदने की प्रतिबद्धता ‘मेक इन इंडिया’ नीति के खिलाफ जाएगी।

“जानकारी ट्रंप से मिलती है”

जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई बातचीत की जानकारी भारतीय पक्ष की ओर से नहीं, बल्कि भारत में अमेरिका के राजदूत की ओर से दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह अब एक “रूटीन” बनता जा रहा है कि भारत को अपनी ही सरकार के फैसलों की जानकारी ट्रम्प या उनके प्रतिनिधियों से मिलती है। रमेश ने लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी ट्रंप के सामने दबाव में नजर आते हैं और पहले की तरह सार्वजनिक रूप से सहज दिखाई नहीं देते। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि यह “फादर ऑफ ऑल डील्स” नहीं हो सकती। कांग्रेस ने यह भी कहा कि सीजफायर (ऑपरेशन सिंदूर) की तरह इस ट्रेड डील की घोषणा भी पहले ट्रंप की ओर से की गई, जबकि भारतीय सरकार की ओर से स्पष्ट विवरण सामने नहीं आया। पार्टी ने कहा कि अमेरिका के खिलाफ टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को 'शून्य' तक कम करने से भारत पर 'प्रभाव' पड़ेगा और यह भी सवाल उठाया कि कृषि क्षेत्र को खोलने से 'किसानों की सुरक्षा' कैसे सुनिश्चित होगी।





 


व्यापार समझौते पर पूरे विवरण की मांग


कांग्रेस ने कहा, 'बयान में कृषि क्षेत्र को अमेरिका के लिए खोलने की भी बात कही गई है। आखिर यह समझौता क्या है? हमारे किसानों की सुरक्षा और हितों को कैसे सुनिश्चित किया गया है? यह भी कहा गया है कि मोदी सरकार रूस से तेल नहीं खरीदेगी, बल्कि अमेरिका और वेनेजुएला से खरीदेगी। क्या मोदी सरकार इस शर्त पर सहमत हो गई है? इसके अलावा, अमेरिका से अधिक सामान खरीदने की बात हो रही है। अगर ऐसा है तो 'मेक इन इंडिया' का क्या हुआ? भारत को व्यापार समझौते का विवरण जानने का अधिकार है। मोदी सरकार को संसद और पूरे देश को विश्वास में लेकर सभी विवरण साझा करने चाहिए।'

कांग्रेस के प्रमुख सवाल

कांग्रेस ने अपने पोस्ट में कई सवाल उठाए:

-क्या ट्रेड डील में भारत ने रूस का साथ छोड़ने पर सहमति दी है?
-क्या भारत अब अमेरिका और वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदेगा?
-यदि भारत 500 अरब डॉलर से ज्यादा का सामान अमेरिका से खरीदेगा, तो ‘मेक इन इंडिया’ का क्या होगा? 
-पार्टी का कहना है कि अगर अमेरिकी उत्पादों की बड़े पैमाने पर खरीद की प्रतिबद्धता दी गई है, तो इससे घरेलू उद्योगों पर असर पड़ सकता है।

ट्रंप का ऐलान: 50% से घटाकर 18% टैरिफ

सोमवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर भारत-अमेरिका ट्रेड डील की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने भारत पर लगाया गया 50% टैरिफ घटाकर 18% कर दिया है। पहले अप्रैल में 25% ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ लगाया गया था। इसके बाद रूस से तेल खरीद जारी रखने के कारण 25% अतिरिक्त पेनल्टी टैरिफ लगाया गया, जिससे कुल टैरिफ 50% तक पहुंच गया था। अब व्हाइट हाउस के अधिकारियों के अनुसार रूस से तेल खरीद पर लगाया गया अतिरिक्त 25% टैरिफ हटा दिया जाएगा और भारत पर कुल 18% टैरिफ ही लागू रहेगा। ट्रंप ने इसे दोनों देशों के रिश्तों में बड़ा कदम बताया।

रूस से तेल खरीद बंद करने का दावा

ट्रंप ने अपने पोस्ट में दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने रूस से तेल खरीद बंद करने पर सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि भारत अब अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदेगा और जरूरत पड़ने पर वेनेजुएला से भी तेल आयात कर सकता है। ट्रंप के मुताबिक, यह कदम रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के प्रयासों में मददगार होगा। हालांकि भारतीय सरकार की ओर से रूस से तेल आयात को लेकर विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यही मुद्दा कांग्रेस की आलोचना का केंद्र बना हुआ है।

‘बाय अमेरिकन’ और 500 अरब डॉलर की खरीद

ट्रंप ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने ‘बाय अमेरिकन’ नीति के तहत अमेरिका से 500 अरब डॉलर से अधिक के ऊर्जा, तकनीक, कृषि, कोयला और अन्य उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। अगर यह प्रतिबद्धता लागू होती है तो यह भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में बड़ा बदलाव होगा। कांग्रेस ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतनी बड़ी खरीद से घरेलू विनिर्माण पर असर पड़ सकता है। वहीं ट्रंप ने भरोसा जताया कि यह समझौता दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करेगा।

राजनीतिक और आर्थिक असर

ट्रेड डील को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। जहां सरकार इसे टैरिफ में बड़ी राहत और द्विपक्षीय संबंधों में मजबूती का संकेत बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे पारदर्शिता की कमी और राष्ट्रीय हितों से समझौते के रूप में पेश कर रही है। आर्थिक दृष्टि से देखें तो टैरिफ घटने से भारतीय निर्यातकों को राहत मिल सकती है। दूसरी ओर अमेरिका से बड़े पैमाने पर आयात की स्थिति में व्यापार संतुलन और घरेलू उद्योग पर असर का सवाल भी उठेगा। ऊर्जा नीति के संदर्भ में रूस, अमेरिका और वेनेजुएला के बीच संतुलन साधना भारत के लिए रणनीतिक चुनौती हो सकती है।

पारदर्शिता की मांग

फिलहाल इस डील के तकनीकी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर होने बाकी हैं। विस्तृत शर्तें सार्वजनिक होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि भारत ने किन शर्तों पर सहमति दी है और इसका वास्तविक आर्थिक प्रभाव क्या होगा। कांग्रेस ने सरकार से पारदर्शिता की मांग की है और कहा है कि संसद में इस समझौते पर स्पष्ट बयान दिया जाए। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और नीतिगत बहस का केंद्र बना रह सकता है।

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