लोकसभा में हंगामे के कारण बार-बार स्थगन; स्पीकर ने कांग्रेस-भाजपा सांसदों के साथ बैठक की
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्षी सांसदों को स्पष्ट शब्दों में कहा कि नारेबाजी संसदीय नियमों के खिलाफ है और इससे सदन की गरिमा को ठेस पहुंचती है। इसके बावजूद विपक्षी सदस्य अपनी सीटों से खड़े होकर नारे लगाते रहे। हालात को देखते हुए स्पीकर को बार-बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के पांचवें दिन लोकसभा की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ गई। सदन की बैठक सुबह 11 बजे शुरू हुई, लेकिन विपक्षी नारेबाजी के कारण महज आठ मिनट में ही 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। दोपहर में कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, लेकिन दूसरी बार भी सदन केवल 13 मिनट ही चल सका। लगातार शोर-शराबे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बैठक को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
स्पीकर की सख्ती
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्षी सांसदों को स्पष्ट शब्दों में कहा कि नारेबाजी संसदीय नियमों के खिलाफ है और इससे सदन की गरिमा को ठेस पहुंचती है। इसके बावजूद विपक्षी सदस्य अपनी सीटों से खड़े होकर नारे लगाते रहे। हालात को देखते हुए स्पीकर को बार-बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। सूत्रों के अनुसार, सदन में गतिरोध खत्म करने के लिए स्पीकर ने कांग्रेस और भाजपा के वरिष्ठ सांसदों के साथ बैठक भी की, ताकि आगे की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाई जा सके।
ट्रेड डील पर सियासी टकराव
इधर, अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। मंगलवार सुबह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया गया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस समझौते को “अद्भुत और ऐतिहासिक” बताया। उनका कहना था कि यह डील भारत के लिए वैश्विक व्यापार में नई संभावनाएं खोलेगी। वहीं विपक्ष ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस तरह सीजफायर (ऑपरेशन सिंदूर) की घोषणा पहले अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से की गई थी, उसी तरह ट्रेड डील की जानकारी भी पहले अमेरिका से आई। कांग्रेस का आरोप है कि प्रधानमंत्री मोदी इस मुद्दे पर दबाव में नजर आते हैं।
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा जारी
बजट सत्र के तहत दोनों सदनों में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा चल रही है। पहले दिन चर्चा की शुरुआत के दौरान कर्नाटक से भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने सरकार की उपलब्धियों पर जोर दिया। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बोलने के लिए खड़े हुए। अपने भाषण में राहुल ने कुछ ऐसे तथ्यों और संदर्भों का उल्लेख किया, जिन पर सत्तापक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। सदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी के दौरान करीब 45 मिनट तक तीखा हंगामा हुआ।
राहुल के बयान पर सत्ता पक्ष की आपत्ति
राहुल गांधी के भाषण के दौरान गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उनके बयानों पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। सत्तापक्ष का कहना था कि राहुल ने जिन स्रोतों का हवाला दिया, वे संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं थे। इस पर स्पीकर ओम बिरला ने भी हस्तक्षेप किया और कहा कि किसी भी मैगजीन, किताब या अखबार में प्रकाशित सामग्री को सीधे सदन में चर्चा का आधार नहीं बनाया जा सकता। स्पीकर ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की, लेकिन गतिरोध बना रहा।
शाम तक नहीं थमा विवाद
लगातार हंगामे और आरोप-प्रत्यारोप के बीच सदन की कार्यवाही सामान्य रूप से नहीं चल सकी। अंततः शाम करीब पांच बजे लोकसभा की बैठक दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई। यह बजट सत्र का ऐसा दिन रहा, जिसमें कार्यवाही का अधिकांश समय व्यवधानों की भेंट चढ़ गया।
संसद के बाहर भी गरमाई राजनीति
संसद के भीतर जहां नियमों और प्रक्रियाओं को लेकर टकराव दिखा, वहीं बाहर भी राजनीतिक बयानबाजी जारी रही। एनडीए नेताओं ने ट्रेड डील को भारत की आर्थिक मजबूती की दिशा में बड़ा कदम बताया। उनका कहना है कि इससे निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति मजबूत होगी। दूसरी ओर, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सरकार से स्पष्ट जवाब की मांग की है। उनका कहना है कि इतने महत्वपूर्ण समझौते की जानकारी पहले विदेश से आना चिंता का विषय है।
रणनीति पर नजर
स्पीकर द्वारा दोनों दलों के नेताओं के साथ की गई बैठक से उम्मीद की जा रही है कि अगले दिन सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चल सकेगी। बजट सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों और वित्तीय प्रस्तावों पर चर्चा होनी है। ऐसे में लगातार स्थगन से विधायी कामकाज प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संवाद नहीं बढ़ा तो सत्र के शेष दिनों में भी व्यवधान देखने को मिल सकते हैं।
राजनीतिक टकराव और हंगामा
बजट सत्र का पांचवां दिन राजनीतिक टकराव और हंगामे के नाम रहा। जहां एक ओर सरकार अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील को ऐतिहासिक उपलब्धि बता रही है, वहीं विपक्ष पारदर्शिता और जवाबदेही के सवाल उठा रहा है। संसद की गरिमा बनाए रखने और महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए अब दोनों पक्षों पर जिम्मेदारी है कि वे संवाद और सहयोग का रास्ता अपनाएं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सदन सामान्य रूप से चल पाता है या सियासी तकरार जारी रहती है।