T20 World Cup 2026: पाकिस्तान खेलेगा टूर्नामेंट, लेकिन भारत से मुकाबले का बहिष्कार, ICC कर सकता है कार्रवाई

सरकार ने कहा, “पाकिस्तान क्रिकेट टीम को आईसीसी टी-20 विश्व कप 2026 में भाग लेने की अनुमति दी जाती है, हालांकि 15 फरवरी 2026 को भारत के खिलाफ निर्धारित मैच में टीम हिस्सा नहीं लेगी।” इस फैसले ने न सिर्फ क्रिकेट जगत, बल्कि अंतरराष्ट्रीय खेल प्रशासन में भी नई बहस छेड़ दी है।

Update: 2026-02-01 21:47 GMT

नई दिल्ली/कोलंबो। सात फरवरी से शुरू हो रहे आईसीसी टी-20 विश्व कप 2026 को लेकर बड़ी राजनीतिक और कूटनीतिक हलचल के बीच पाकिस्तान सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि उसकी टीम टूर्नामेंट में हिस्सा लेगी, लेकिन 15 फरवरी को भारत के खिलाफ निर्धारित मैच में मैदान पर नहीं उतरेगी। करीब एक सप्ताह तक चली अनिश्चितता और अटकलों के बाद रविवार को ‘एक्स’ पर जारी आधिकारिक बयान में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान की सरकार ने यह घोषणा की। सरकार ने कहा, “पाकिस्तान क्रिकेट टीम को आईसीसी टी-20 विश्व कप 2026 में भाग लेने की अनुमति दी जाती है, हालांकि 15 फरवरी 2026 को भारत के खिलाफ निर्धारित मैच में टीम हिस्सा नहीं लेगी।” इस फैसले ने न सिर्फ क्रिकेट जगत, बल्कि अंतरराष्ट्रीय खेल प्रशासन में भी नई बहस छेड़ दी है।

अनिश्चितता और कूटनीतिक हलचल

पाकिस्तान की भागीदारी को लेकर पिछले कई दिनों से स्थिति स्पष्ट नहीं थी। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के अध्यक्ष और देश के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की थी, जिसके बाद निर्णय को कुछ समय के लिए टाल दिया गया था। यह घटनाक्रम उस समय और जटिल हो गया जब आईसीसी ने बांग्लादेश को टूर्नामेंट से बाहर कर स्कॉटलैंड को शामिल करने का फैसला किया। बांग्लादेश ने भारत में खेलने को लेकर सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए अपने मैच श्रीलंका में कराने की मांग की थी, जिसे आईसीसी ने अस्वीकार कर दिया। आईसीसी ने स्वतंत्र सुरक्षा आकलनों का हवाला देते हुए कहा था कि भारत में खिलाड़ियों, अधिकारियों या प्रशंसकों के लिए किसी प्रकार का सत्यापित खतरा नहीं पाया गया है।

भारत-पाकिस्तान मैच: टूर्नामेंट का केंद्र बिंदु

भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबला किसी भी आईसीसी टूर्नामेंट का सबसे ज्यादा प्रतीक्षित मैच माना जाता है। यह न केवल खेल के लिहाज से महत्वपूर्ण होता है, बल्कि वैश्विक दर्शक संख्या, प्रायोजन और प्रसारण राजस्व का प्रमुख स्रोत भी है। मार्केटिंग रणनीति, प्रसारण अधिकारों की कीमत और विज्ञापन दरें अक्सर इसी हाई-प्रोफाइल मुकाबले के इर्द-गिर्द तय की जाती हैं। ऐसे में पाकिस्तान के बहिष्कार से आईसीसी के सामने गंभीर लॉजिस्टिक और वित्तीय चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

पाकिस्तान का शेड्यूल और आगे की अनिश्चितता

पाकिस्तान टीम अपना अभियान 7 फरवरी को नीदरलैंड्स के खिलाफ शुरू करेगी। इसके बाद 10 फरवरी को अमेरिका और 18 फरवरी को नामीबिया से उसका मुकाबला होगा। पाकिस्तान के सभी ग्रुप मैच कोलंबो के एसएससी ग्राउंड में खेले जाएंगे। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यदि भारत और पाकिस्तान नॉकआउट चरण में आमने-सामने आते हैं तो पाकिस्तान का रुख क्या होगा। इस अनिश्चितता ने टूर्नामेंट के भविष्य और संभावित विवादों को लेकर सवाल और बढ़ा दिए हैं।

वॉकओवर से भारत को मिलेंगे पूरे अंक

आईसीसी नियमों के अनुसार यदि कोई टीम निर्धारित मैच में नहीं उतरती है, तो विरोधी टीम को वॉकओवर के तहत पूरे अंक दिए जाते हैं। ऐसे में पाकिस्तान के हटने पर भारत को तीन अंक मिलेंगे, बशर्ते भारतीय टीम मैच स्थल पर निर्धारित समय पर उपस्थित रहे। नियम यह भी कहते हैं कि कम से कम एक टीम का मैदान पर मौजूद होना अनिवार्य है। इस मामले में आईसीसी के पास पीसीबी पर आर्थिक जुर्माना लगाने और अनुबंध उल्लंघन की कार्रवाई करने का अधिकार है।

त्रिपक्षीय समझौता और संभावित उल्लंघन

भारत, पाकिस्तान और आईसीसी के बीच पहले एक त्रिपक्षीय समझौता हुआ था, जिसके तहत 2027 तक दोनों टीमों के मुकाबले तटस्थ स्थान पर कराए जाने थे। ऐसे में बहिष्कार का यह फैसला समझौते के उल्लंघन के रूप में देखा जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, आईसीसी बोर्ड इस मुद्दे पर सोमवार को वर्चुअल बैठक करेगा।

पहले भी हुए हैं बहिष्कार

विश्व कप इतिहास में यह पहला मौका नहीं है जब किसी टीम ने मैच खेलने से इनकार किया हो।

1996 विश्व कप में कोलंबो में सुरक्षा कारणों से ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज ने श्रीलंका जाने से मना कर दिया था। उन मैचों के अंक श्रीलंका को मिले और टीम बाद में चैंपियन बनी।

2003 वनडे विश्व कप में राजनीतिक तनाव के चलते इंग्लैंड ने जिंबाब्वे के खिलाफ मैच नहीं खेला था, जबकि मोंबासा आतंकी हमले के बाद न्यूजीलैंड ने केन्या से नैरोबी में खेलने से इनकार किया था। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि मौजूदा परिस्थितियां उन उदाहरणों से भिन्न हैं।

पीसीबी पर संभावित सख्त कार्रवाई

आईसीसी पाकिस्तान के इस कदम को गंभीर अनुबंध उल्लंघन मान सकता है। सूत्रों के अनुसार संभावित कार्रवाइयों में आर्थिक जुर्माना, वार्षिक राजस्व हिस्सेदारी रोकना और भविष्य के टूर्नामेंट से प्रतिबंध तक शामिल हो सकते हैं। यह भी आशंका जताई जा रही है कि आईसीसी सदस्य बोर्ड पाकिस्तान का दौरा करने से मना कर सकते हैं या द्विपक्षीय सीरीज के नतीजों को आईसीसी रैंकिंग में शामिल न किया जाए। यहां तक कि विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) अंकों पर भी असर पड़ सकता है।

पीएसएल और ब्रॉडकास्ट राजस्व पर असर

सबसे बड़ा आर्थिक झटका पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल) को लग सकता है। संभावना है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय विदेशी खिलाड़ियों को पीएसएल में खेलने से रोका जाए। भारत-पाकिस्तान मैच के दौरान 10 सेकंड के विज्ञापन स्लॉट की दर 25 से 40 लाख रुपये तक होती है। केवल विज्ञापन राजस्व में 200 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान का अनुमान है। आईसीसी के ब्रॉडकास्टर जियो स्टार को होने वाले नुकसान की भरपाई का दबाव भी पीसीबी पर डाला जा सकता है।

आईसीसी बोर्ड की बैठक के बाद फैसला


यदि आईसीसी पाकिस्तान को टूर्नामेंट से बाहर करने का निर्णय लेता है, तो युगांडा को उसकी जगह शामिल किया जा सकता है। हालांकि अंतिम फैसला आईसीसी बोर्ड की बैठक के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल, टी-20 विश्व कप 2026 खेल से ज्यादा कूटनीतिक और प्रशासनिक विवादों के कारण सुर्खियों में है। आने वाले दिनों में आईसीसी का रुख यह तय करेगा कि यह मामला खेल के दायरे में सुलझता है या अंतरराष्ट्रीय खेल राजनीति का बड़ा विवाद बनता है।

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