नई दिल्ली । टी-20 विश्व कप से ठीक पहले भारतीय ऑलराउंडर शिवम दुबे ने ऐसी पारी खेली, जिसने न सिर्फ मैच का रुख बदला बल्कि उनके खेल में आए बदलाव को भी साफ कर दिया। बुधवार रात खेले गए मुकाबले में दुबे ने न्यूजीलैंड के खिलाफ विस्फोटक बल्लेबाजी करते हुए महज 15 गेंदों में अर्धशतक जड़ दिया। यह भारत की ओर से तीसरा सबसे तेज टी-20 अर्धशतक है। हालांकि लेग स्पिनर ईश सोढ़ी के एक ओवर में 29 रन बटोरना इस पारी का सबसे चर्चित क्षण रहा, लेकिन तेज गेंदबाज जैकब डफी और मैट हेनरी के खिलाफ लगाए गए उनके तीन छक्कों ने यह स्पष्ट कर दिया कि अब दुबे सिर्फ स्पिन के खिलाफ आक्रामक बल्लेबाज नहीं रह गए हैं। वह अब पेस अटैक को भी उसी आत्मविश्वास के साथ निशाना बना सकते हैं।
मुश्किल हालात में आया असली इम्तिहान
इस मुकाबले का संदर्भ समझना जरूरी है। भारत पहले ही श्रृंखला में 3-0 की अजेय बढ़त ले चुका था। ऐसे में टीम प्रबंधन ने इस मैच को प्रयोग के तौर पर लिया। कप्तान सूर्यकुमार यादव ने खुलासा किया कि जानबूझकर छह बल्लेबाजों के साथ उतरने का फैसला किया गया, ताकि दबाव की स्थिति में खिलाड़ियों की मानसिकता और कौशल की परीक्षा हो सके। मैच में भारत की शुरुआत बेहद खराब रही। अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, सूर्यकुमार यादव और हार्दिक पांड्या जल्दी पवेलियन लौट गए। स्कोरबोर्ड पर दबाव साफ दिख रहा था और जीत की संभावना क्षीण लग रही थी। ऐसे समय में शिवम दुबे क्रीज पर आए। दुबे ने परिस्थिति की गंभीरता को समझते हुए आक्रामक लेकिन नियंत्रित बल्लेबाजी की। उन्होंने केवल 15 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया और विपक्षी गेंदबाजों की रणनीति को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।
ईश सोढ़ी का ओवर: 29 रन और मैच का टर्निंग पॉइंट
दुबे की पारी का सबसे यादगार क्षण वह ओवर रहा, जिसमें उन्होंने लेग स्पिनर ईश सोढ़ी पर 29 रन बटोरे। इस ओवर में उन्होंने लगातार बड़े शॉट खेले और गेंद को मैदान के हर कोने में पहुंचाया। सोढ़ी, जो आमतौर पर मध्य ओवरों में रन गति पर नियंत्रण रखते हैं, पूरी तरह बेबस नजर आए। दुबे ने स्पिन के खिलाफ अपनी पुरानी ताकत का प्रदर्शन किया, लेकिन इस बार कहानी यहीं तक सीमित नहीं रही।
तेज गेंदबाजों के खिलाफ भी दिखा आत्मविश्वास
अतीत में दुबे को स्पिन के खिलाफ आक्रामक बल्लेबाज माना जाता था, लेकिन तेज गेंदबाजों के सामने वह कभी-कभी संघर्ष करते दिखे थे। विशाखापत्तनम की पारी ने इस धारणा को बदल दिया। उन्होंने जैकब डफी और मैट हेनरी के खिलाफ 14 गेंदों में 29 रन बनाए, जिसमें तीन दर्शनीय छक्के शामिल थे। इन शॉट्स में टाइमिंग, पावर और आत्मविश्वास का संतुलन साफ दिखा। न्यूजीलैंड की टीम किसी एक रणनीति पर टिक नहीं सकी। अगर वे स्पिन लाते, तो दुबे हमला करते; अगर पेस लाते, तो भी वही अंजाम होता। यह बहुआयामी आक्रमण ही उनकी पारी की असली खूबी थी।
बदलाव की बुनियाद: पिछले बड़े टूर्नामेंटों का अनुभव
यह प्रदर्शन अचानक नहीं आया। इसके संकेत पिछले एक वर्ष में कई बार दिख चुके थे। 2024 टी-20 विश्व कप फाइनल में 16 गेंदों पर 27 रन की तेज पारी, एशिया कप फाइनल में 22 गेंदों पर 33 रन।
हार्दिक पांड्या की अनुपस्थिति में नई गेंद से गेंदबाजी
इन सभी मौकों पर दुबे ने दबाव में खुद को साबित किया। बड़े मंच पर मिले अनुभव ने उनकी मानसिकता को मजबूत किया है। अब वह परिस्थितियों को बेहतर समझते हैं और गेंदबाजों की योजना भांपने लगे हैं।
‘अब मैं थोड़ा स्मार्ट हो गया हूं’ – दुबे
मैच के बाद शिवम दुबे ने अपनी पारी और बदलाव पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा, “यह सब मेरी कड़ी मेहनत का नतीजा है। लगातार मैच खेलने और ऐसी परिस्थितियों में बल्लेबाजी करने से मेरी मानसिकता बेहतर हो रही है। अब मैं समझने लगा हूं कि आगे क्या होगा और गेंदबाज क्या सोचकर गेंदबाजी करेगा।” दुबे ने यह भी माना कि नियमित रूप से गेंदबाजी करने का मौका मिलने से उनकी क्रिकेट समझ बढ़ी है। “जब आप गेंदबाजी करते हैं, तो आप थोड़ा स्मार्ट हो जाते हैं। मैं गौती भाई और सूर्या भाई का आभारी हूं कि उन्होंने मुझे गेंदबाजी का मौका दिया। इससे मेरी बल्लेबाजी में भी मदद मिली है।” उनका मानना है कि अनुभव किसी भी खिलाड़ी को परिपक्व बनाता है। अनुभव नाम की भी एक चीज होती है और वह मुझे मिल रहा है। मैं हर मैच में थोड़ा बेहतर और स्मार्ट बनने की कोशिश करता हूं।
टी-20 विश्व कप से पहले सकारात्मक संकेत
टी-20 विश्व कप नजदीक है और टीम इंडिया अपने संयोजन को अंतिम रूप देने में जुटी है। ऐसे समय में दुबे का यह प्रदर्शन टीम प्रबंधन के लिए बेहद राहत भरा है। भारत को मध्य क्रम में ऐसे बल्लेबाज की जरूरत है, जो तेज रन बना सके और साथ ही कुछ ओवर गेंदबाजी भी कर सके। दुबे इस भूमिका में फिट बैठते दिख रहे हैं। उनकी पारी ने यह भरोसा दिलाया है कि वह बड़े मंच पर दबाव झेलने की क्षमता रखते हैं।
ऑलराउंडर की भूमिका में परिपक्वता
दुबे का आत्मविश्वास केवल बल्लेबाजी तक सीमित नहीं है। वह गेंदबाजी में भी योगदान दे रहे हैं। सीमित ओवरों के क्रिकेट में एक ऐसे ऑलराउंडर की अहमियत बढ़ जाती है, जो बल्लेबाजी में फिनिशर की भूमिका निभा सके और जरूरत पड़ने पर दो-तीन ओवर निकाल सके। विशाखापत्तनम की पारी ने यह भी दिखाया कि दुबे अब केवल पावर हिटर नहीं, बल्कि परिस्थिति के अनुसार खेलने वाले बल्लेबाज बन चुके हैं। उन्होंने जोखिम और संयम के बीच संतुलन बनाए रखा।
रणनीतिक दृष्टि से अहम प्रदर्शन
न्यूजीलैंड जैसी अनुशासित टीम के खिलाफ इस तरह की पारी रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। विपक्षी टीमों को अब दुबे के खिलाफ नई योजनाएं बनानी होंगी। अगर वे केवल स्पिन पर निर्भर रहेंगे तो दुबे हावी होंगे, और अगर पेस अटैक से उन्हें रोकने की कोशिश करेंगे तो भी उनके पास जवाब मौजूद है। यही अनिश्चितता उन्हें खतरनाक बल्लेबाज बनाती है।
नई पहचान की ओर बढ़ते दुबे
विशाखापत्तनम की यह पारी केवल एक तेज अर्धशतक नहीं थी; यह एक क्रिकेटर के विकास की कहानी थी। शिवम दुबे अब उस दौर में प्रवेश कर चुके हैं, जहां वह अपनी ताकत और सीमाओं दोनों को समझते हैं। तेज गेंदबाजों के खिलाफ सहजता, स्पिन के खिलाफ पुराना आत्मविश्वास और गेंदबाजी में बढ़ती भागीदारी—ये सभी संकेत हैं कि वह भारतीय टीम के लिए टी-20 विश्व कप में अहम भूमिका निभा सकते हैं। अगर यह लय बरकरार रही, तो आने वाले महीनों में दुबे भारतीय टीम के ‘एक्स-फैक्टर’ साबित हो सकते हैं। विशाखापत्तनम की रात शायद उनके करियर का निर्णायक मोड़ बनकर याद की जाएगी।