खनिज फाउण्डेशन में पक्षपात, कांग्रेस का बहिर्गमन
रायपुर ! जिला खनिज फाउण्डेशन में निर्वाचित जन प्रतिनिधियों की उपेक्ष व जिलाधीश पर मनमानी का आरोप लगाते हुए कांग्रेस सदस्यों ने मंगलवार को विधानसभा में हंगामा किया। फांऊडेशन
रायपुर ! जिला खनिज फाउण्डेशन में निर्वाचित जन प्रतिनिधियों की उपेक्ष व जिलाधीश पर मनमानी का आरोप लगाते हुए कांग्रेस सदस्यों ने मंगलवार को विधानसभा में हंगामा किया। फांऊडेशन में विधायकों को शामिल करने व कलेक्टर की जगह प्रभारी मंत्री या सांसद को इसका अध्यक्ष बनाने मांग की। मुख्यमंत्री ने सभी विधायकों को शामिल करने से इंकार कर दिया उनके जवाब से असंतुष्ट होकर कांग्रेसी सदस्य नारेबाजी करते हुए बर्हिगर्मन कर गए।
प्रश्नकाल में कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक धनेन्द्र साहू ने यह मामला उठाया था। उन्होंने कहा जन प्रतिनिधियों की अनुशंसा पर इस मद से कोई कार्य स्वीकृत नहीं किया जाता है, कलेक्टर अपनी मर्जी से कार्यों की घोषणा करते हैं। अधिकारियों को इतनी छूट दी गई है कि वे घूम-घूमकर काम कर रहे हैं, इस पर मुख्यमंत्री ने प्रति प्रश्न करते हुए जानना चाहा क्या उन्होंने इस मद के लिए कोई कार्य करने आवेदन दिया है। श्री साहू ने कहा उन्होंने कलेक्टर व सीईओ को अपने क्षेत्र में एक स्टापडेम मरम्मत के लिए राशि स्वीकृत करने 10 लाख मांग की थी उन्हें यह कहा गया कि विकास कार्य के लिए राशि नहीं है। मुख्यमंत्री ने अपने जवाब में कहा अच्छे कार्यों के लिए इस मद से राशि दी जाती है वे आवेदन करे तो। इस पर निर्णय लिया जाएगा। श्री साहू के तेवर को देखते हुए मुख्यमंत्री ने कहा वे वरिष्ठ सदस्य है शालीनता से अपनी बात रखते है आज भी नाराज नहीं है।
श्री साहू ने कहा इस मद के तहत 24 सौ करोड़ रुपये की अनुशंसा कलेक्टर को सौंपना कहां तक उचित है। समिति में कांग्रेस विधायकों को सदस्य बनाए जाने में पक्षपात का आरोप लगाया । जवाब में खनिज मंत्री डॉ. रमन सिंह ने बताया कि रायपुर जिले में जिला खनिज न्यास समिति का गठन 2 जनवरी 2016 को किया गया है। जिसमें 26 लोगों की समिति है। इस समिति के नामांकित सदस्यों में सरपंच, सांसद, विधायक, कर्मचारी सभी शामिल है। समिति के माध्यम से उच्च श्रेणी के 60 फीसदी तथा अन्य कार्य 40 फीसदी कराये जाते है। मुख्यमंत्री के जवाब से कांग्रेसी सदस्य संतुष्ट नहीं हुए। धनेन्द्र साहू नेे सरकार को घेरते हुए कहा इस मद के तहत सभी कार्य बाउंड्रीवाल कराए जा रहे हैं। समिति में सरपंच को सदस्य सरकार बना सकती है लेकिन जिले के विधायक को सदस्य नहीं बनाया गया है। इसमें कांग्रेस विधायकों के साथ पक्षपात हुआ है। मुख्यमंत्री ने अपने जवाब में आरोप को निराधार बताते हुए कहा समिति में क्षेत्र के विधायक को सदस्य बनाया जाता है जिसमें नेता प्रतिपक्ष समेत कांग्रेस के अन्य विधायकों को समिति में लिया गया है। कांग्रेस सदस्य धनेंद्र साहू ने दलील देते हुए बताया कि समिति का कार्य कलेक्टर के मर्जी के हिसाब से चल रहा है। जो घूम-घूमकर नेतागिरि कर रहे है। इस पर सरकार के बचाव में सत्तापक्ष के शिवरतन शर्मा व अन्य सदस्य सामने आए। इस पर जवाबी हमला करते हुए पूछा कि क्या डीएमएफ के लिये कोई अनुशंसा भेजी है? उनका कहना था कि न्यास में 30 से 40 विधायकों को शामिल किया गया है। श्री साहू सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं हुए।
सरकार पर पक्षपात का आरोप में जवाब देते हुए सत्तापक्ष के सदस्य शिवरतन शर्मा ने कहा कि पूर्व सरकार ने विधायक निधि समाप्त कर दी थी। इस पर कांग्रेस की वरिष्ठ सदस्य रेणु जोगी ने श्री शर्मा द्वारा उन पर आक्षेप लगाने की बात कहते हुए कहा कि उन्होंने निधि समाप्त नहीं की थी। इसी मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने सरकार को घेरा और समिति का कार्य अप्रजातांत्रिक तरीके से संचालित होने का आरोप लगाते हुए जिलेवार विधायकों को समिति का सदस्य बनाये जाने मांग की।. उनका कहना था कि 24 सौ करोड़ रुपये की राशि अकेले कलेक्टर खर्च कर रहे हैं। जिसमें जिले के विधायक या सांसद को समिति का अध्यक्ष बनाए जाए। जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा फिलहाल सरकार का ऐसा कोई इरादा नहीं है। उनके जवाब से असंतुष्ट होकर कांग्रेसी सदस्य नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर चले गए।