मणिपुर में सरकार गठन की तैयारी, वाई. खेमचंद सिंह चुने गए भाजपा विधायक दल के नेता
भाजपा विधायक दल की बैठक में वाई. खेमचंद सिंह के नाम पर सहमति बनी। पार्टी की ओर से सोशल मीडिया पर पोस्ट कर उन्हें विधायक दल का नेता चुने जाने पर बधाई दी गई। माना जा रहा है कि अब राज्य में सरकार गठन की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
इंफाल। मणिपुर में करीब एक वर्ष से लागू राष्ट्रपति शासन के बीच नई सरकार गठन की प्रक्रिया तेज होती नजर आ रही है। मंगलवार को वाई. खेमचंद सिंह को भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया। सूत्रों के अनुसार, मणिपुर भाजपा विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से उनके नाम पर मुहर लगाई गई। इस फैसले को राज्य में राजनीतिक स्थिरता की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
राष्ट्रपति शासन की पृष्ठभूमि
मणिपुर में 13 फरवरी 2025 से राष्ट्रपति शासन लागू है। तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने जातीय हिंसा की पृष्ठभूमि में इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद राज्य की 60 सदस्यीय विधानसभा को निलंबित कर दिया गया। तब से राज्य प्रत्यक्ष केंद्रीय प्रशासन के अधीन है। राज्य में मई 2023 से मैतेयी और कुकी समुदायों के बीच जारी जातीय हिंसा ने गंभीर हालात पैदा कर दिए थे। इंफाल घाटी में रहने वाले मैतेयी और पहाड़ी क्षेत्रों में बसे कुकी समुदाय के बीच हुए टकराव में अब तक 260 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि हजारों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। इस हिंसा ने राज्य की सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था को गहरे स्तर पर प्रभावित किया है।
भाजपा विधायक दल की बैठक में चयन
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा विधायक दल की बैठक में वाई. खेमचंद सिंह के नाम पर सहमति बनी। पार्टी की ओर से सोशल मीडिया पर पोस्ट कर उन्हें विधायक दल का नेता चुने जाने पर बधाई दी गई। माना जा रहा है कि अब राज्य में सरकार गठन की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। भाजपा के पास वर्तमान में 37 विधायक हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 32 सीटें जीती थीं। जदयू के छह विधायकों में से पांच बाद में भाजपा में शामिल हो गए, जिससे पार्टी की संख्या बढ़ी। इसके अलावा विधानसभा में नेशनल पीपुल्स पार्टी (6), नगा पीपुल्स फ्रंट (5), कांग्रेस (5), कुकी पीपुल्स अलायंस (2), जदयू (1) और तीन निर्दलीय विधायक हैं। एक सीट वर्तमान में रिक्त है।
कौन हैं वाई. खेमचंद सिंह?
62 वर्षीय वाई. खेमचंद सिंह का राजनीतिक और सामाजिक जीवन विविध अनुभवों से भरा रहा है। वह ताइक्वांडो खिलाड़ी रहे हैं और भाजपा के उम्मीदवार के रूप में सिंगजामेई विधानसभा क्षेत्र से 2017 और 2022 में निर्वाचित हुए। उन्होंने 2017 से 2022 तक मणिपुर विधानसभा के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। 2022 में बीरेन सिंह सरकार में वह कैबिनेट मंत्री बने और नगर प्रशासन एवं आवास विकास (एमएएचयूडी), ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज तथा शिक्षा विभागों की जिम्मेदारी संभाली।
खेमचंद सिंह ने दिसंबर 2024 में कुकी समुदाय के आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों के राहत शिविरों का दौरा किया था। मैतेयी समुदाय से आने वाले किसी विधायक द्वारा ऐसा कदम उठाने को सामाजिक समरसता की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया था। उनके इस कदम को राज्य में शांति बहाली के प्रयासों के रूप में देखा गया।
संतुलन और समावेशन की चुनौती
मणिपुर में नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती जातीय तनाव को कम करना और विश्वास बहाली की प्रक्रिया को मजबूत करना होगी। पिछले दो वर्षों की घटनाओं ने समुदायों के बीच गहरी खाई पैदा कर दी है। ऐसे में नई नेतृत्व टीम से उम्मीद की जा रही है कि वह संवाद, पुनर्वास और विकास के माध्यम से स्थिति को सामान्य बनाने की दिशा में काम करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक स्थिरता राज्य में प्रशासनिक और सामाजिक संतुलन बहाल करने के लिए जरूरी है। राष्ट्रपति शासन के दौरान कई प्रशासनिक कदम उठाए गए, लेकिन स्थायी समाधान के लिए निर्वाचित सरकार की भूमिका अहम मानी जा रही है।
खेमचंद के घर पर भी हुआ था हमला
मई में 2023 मणिपुर हिंसा शुरू होने के बाद, केंद्र सरकार ने खेमचंद सिंह समेत मणिपुर के कैबिनेट मंत्रियों को दिल्ली बुलाया था और उनसे हालात सामान्य करने के लिए विशेष पहल करने को कहा। लेकिन हिंसक भीड़ ने बाद में सिंगजामेई विधानसभा क्षेत्र में यमनाम खेमचंद सिंह के घर पर भी धावा बोल दिया था। अक्तूबर 2023 में खेमचंद के घर के गेट पर ग्रेनेड भी फेंका। इस हमले में सीआरपीएफ के एक जवान और खेमचंद के रिश्तेदार भी घायल हो गए थे।
सरकार गठन का दावाभाजपा विधायक दल के नेता चुने जाने के बाद अब राज्यपाल को औपचारिक रूप से सरकार गठन का दावा पेश किया जा सकता है। इसके बाद मुख्यमंत्री पद की शपथ और मंत्रिमंडल गठन की प्रक्रिया शुरू होगी। हालांकि विधानसभा निलंबित होने की स्थिति में आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पर अंतिम निर्णय केंद्र और राज्यपाल के स्तर पर लिया जाएगा।
राजनीतिक और सामाजिक संकेत
वाई. खेमचंद सिंह का चयन ऐसे समय हुआ है जब राज्य को स्थिर और समावेशी नेतृत्व की आवश्यकता है। उनके राजनीतिक अनुभव और हालिया सामाजिक पहल को देखते हुए पार्टी ने उन्हें जिम्मेदारी सौंपी है। मणिपुर में लंबे समय से जारी अस्थिरता के बाद यह निर्णय राज्य की राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत का संकेत माना जा रहा है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नई नेतृत्व टीम शांति, पुनर्निर्माण और विकास की दिशा में किस तरह ठोस कदम उठाती है।