अखिलेश यादव ने भारत-अमेरिका समझौते पर उठाए सवाल, डेयरी आयात को लेकर जताई चिंता, कहा-व्रत 'सनातन' कैसे रहेगा?

अखिलेश यादव ने विशेष रूप से अमेरिका से संभावित डेयरी उत्पादों के आयात को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने इसे सनातन धर्म की परंपराओं और व्रत-उपवास की शुद्धता से जोड़ते हुए सवाल उठाए।

Update: 2026-02-04 08:04 GMT
नई दिल्ली। भारत-अमेरिका के बीच हुए हालिया व्यापार समझौते को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने इस समझौते को ‘डील’ नहीं बल्कि ‘ढीलापन’ करार देते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि इस समझौते के जरिए भारत ने अपना बाजार अमेरिका के लिए खोल दिया है और इसके दूरगामी परिणाम देश की अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक परंपराओं पर पड़ सकते हैं।

डेयरी आयात पर जताई धार्मिक-सांस्कृतिक चिंता

अखिलेश यादव ने विशेष रूप से अमेरिका से संभावित डेयरी उत्पादों के आयात को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने इसे सनातन धर्म की परंपराओं और व्रत-उपवास की शुद्धता से जोड़ते हुए सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “अगर डेयरी प्रोडक्ट्स अमेरिका से आएंगे, तो सनातनियों और भारतीय लोगों का व्रत कैसे ‘सनातन’ रहेगा? यह सोचने का विषय है। यह चिंता की बात है कि हमारी धार्मिक परंपराओं पर इसका क्या असर पड़ेगा।” यादव का कहना है कि भारत में व्रत-उपवास और धार्मिक अनुष्ठानों में इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थों की शुद्धता और स्थानीय उत्पादन का विशेष महत्व है। ऐसे में बाहरी डेयरी उत्पादों के आयात से धार्मिक आस्थाओं पर असर पड़ सकता है।

‘भारत का बाजार सौंपने’ का आरोप

सपा प्रमुख ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि व्यापार समझौते के नाम पर भारत का बाजार अमेरिकी कंपनियों के लिए खोल दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह कदम घरेलू उद्योगों, किसानों और छोटे व्यापारियों के लिए चुनौती खड़ी कर सकता है। यादव ने कहा, “हम सिर्फ जमीन ही नहीं, अब अपना बाजार भी गंवा रहे हैं। सवाल यह है कि हम किस दिशा में जा रहे हैं?” उनका संकेत चीन के साथ सीमा विवाद और व्यापारिक प्रतिस्पर्धा की ओर था।

संसद में चर्चा से बचने का आरोप

अखिलेश यादव ने भाजपा पर संसद में महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष चीन के साथ सीमा विवाद, राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यापार से जुड़े संवेदनशील विषयों पर जानकारी मांगता है, तो सरकार स्पष्ट जवाब देने से बचती है। उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर संसद में खुलकर चर्चा होनी चाहिए। देश को यह जानने का अधिकार है कि सशस्त्र बलों की क्या राय है और हमारी सीमाओं की स्थिति क्या है।”

यादव ने यह भी कहा कि चीन के साथ भारत के संबंध समय-समय पर बदलते रहे हैं, लेकिन देश को यह पारदर्शिता मिलनी चाहिए कि वास्तविक स्थिति क्या है और सरकार किस रणनीति पर काम कर रही है।

चीन और बाजार को लेकर सवाल

सपा सांसद ने चीन के संदर्भ में कहा कि भारत ने अपनी जमीन खोई है और अब व्यापारिक मोर्चे पर भी दबाव में है। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर भारत अपने बाजार को बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के खोल देता है, तो इससे घरेलू उत्पादन और रोजगार पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। हालांकि, उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई विशिष्ट आंकड़े या आधिकारिक दस्तावेज पेश नहीं किए, लेकिन यह स्पष्ट किया कि विपक्ष इस मुद्दे को संसद और सार्वजनिक मंचों पर उठाता रहेगा।

अलग-अलग प्रतिक्रियाएं


भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर पहले ही विभिन्न राजनीतिक दलों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ चुकी हैं। केंद्र सरकार इसे आर्थिक दृष्टि से लाभकारी और निर्यात को बढ़ावा देने वाला कदम बता रही है, जबकि विपक्षी दल इसके संभावित प्रभावों को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

अखिलेश यादव की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब संसद का बजट सत्र हंगामे के बीच चल रहा है। विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, वहीं सरकार का दावा है कि समझौते में किसानों, डेयरी क्षेत्र और एमएसएमई के हितों की रक्षा की गई है।

बहस को नया आयाम

 

व्यापार समझौते के पूर्ण विवरण और क्रियान्वयन की रूपरेखा सामने आने के बाद ही इसके वास्तविक प्रभावों का आकलन किया जा सकेगा। फिलहाल, राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह मुद्दा आर्थिक के साथ-साथ सांस्कृतिक और धार्मिक विमर्श का भी हिस्सा बन गया है। अखिलेश यादव के बयान ने इस बहस को नया आयाम दे दिया है, जिसमें व्यापार नीति, धार्मिक परंपराएं और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषय एक साथ जुड़ते दिखाई दे रहे हैं। आने वाले दिनों में इस पर संसद और राजनीतिक मंचों पर और तीखी बहस की संभावना है।

Tags:    

Similar News