नई दिल्ली। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर राजनीतिक हलकों में तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। कांग्रेस ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर अमेरिकी प्रशासन के दबाव में ‘समर्पण’ करने का आरोप लगाया, जबकि सरकार ने विपक्ष के रुख को गैरजिम्मेदाराना और राष्ट्रहित के खिलाफ बताया। संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे पर जोरदार हंगामा देखने को मिला।
राहुल गांधी का सीधा हमला
लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए भारत-अमेरिका ट्रेड डील को “एकतरफा समझौता” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारी दबाव में आकर इस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। राहुल गांधी ने कहा, “प्रधानमंत्री ने इस ट्रेड डील में देश के किसानों की मेहनत और खून-पसीने की कमाई को बेच दिया है। देश को समझना चाहिए कि प्रधानमंत्री समझौता कर चुके हैं।” उन्होंने दावा किया कि पिछले चार महीनों से यह डील लंबित थी और अचानक सोमवार को इसे अंतिम रूप दिया गया।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि अमेरिका में उद्योगपति गौतम अदाणी से जुड़े एक मामले और तथाकथित ‘एपस्टीन फाइल्स’ के खुलासों के कारण प्रधानमंत्री दबाव में हैं। राहुल गांधी ने कहा, “जो मैं जानता हूं और जो प्रधानमंत्री भी जानते हैं, उसी वजह से यह डील साइन हुई है।” हालांकि उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेजी प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया।
‘वाशिंगटन से ही क्यों मिलती है जानकारी?’
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की आधिकारिक विस्तृत जानकारी सार्वजनिक होने से पहले ही राजनीतिक विवाद तेज हो गया। राज्यसभा में कांग्रेस ने कटाक्ष करते हुए कहा कि हर महत्वपूर्ण जानकारी वाशिंगटन से ही क्यों मिलती है? पार्टी ने मांग की कि इस द्विपक्षीय समझौते पर संसद में विस्तृत चर्चा कराई जाए और सरकार स्थिति स्पष्ट करे। राज्यसभा में उपनेता प्रतिपक्ष प्रमोद तिवारी और सांसद जयराम रमेश ने कार्यवाही शुरू होते ही यह मुद्दा उठाया। सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने आश्वासन दिया कि सरकार का पक्ष सदन में रखा जाएगा और मामले को नोट कर लिया गया है। इसके बाद शून्यकाल की कार्यवाही शुरू हुई। हालांकि शून्यकाल समाप्त होते ही कांग्रेस सदस्य अपनी सीटों से उठकर नारेबाजी करने लगे। अन्य विपक्षी दलों के सदस्य भी हंगामे में शामिल हो गए। स्थिति बिगड़ती देख विपक्षी सदस्य वाकआउट कर गए।
सरकार का जवाब: चर्चा के लिए तैयार
हंगामे के बीच नेता सदन और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्ष को आश्वस्त किया कि सरकार इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि संबंधित मंत्री सदन में समझौते की पूरी जानकारी देंगे। नड्डा ने कहा, “कल रात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर व्यापार समझौते की जानकारी साझा की और प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की। विपक्ष को इसमें भी बुराई नजर आ रही है।” उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष की हताशा स्पष्ट दिख रही है।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि पहले जब अमेरिकी टैरिफ 50 प्रतिशत तक था, तब विपक्ष सरकार से सवाल कर रहा था कि भारत क्या कर रहा है। अब जब टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है, तब भी विपक्ष सवाल उठा रहा है। नड्डा ने कहा, “असल में विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है।”
टैरिफ में कमी पर सरकार का दावा
सरकार का दावा है कि इस व्यापार समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ घटाया है, जिससे भारतीय निर्यातकों को फायदा होगा। हालांकि समझौते की विस्तृत शर्तें अभी सार्वजनिक रूप से पूरी तरह स्पष्ट नहीं की गई हैं। विपक्ष का आरोप है कि किसानों और घरेलू उद्योगों पर इस डील का प्रतिकूल असर पड़ सकता है। कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार समझौते की शर्तें सदन के पटल पर रखे और संभावित प्रभावों पर चर्चा कराए।
राजनीतिक टकराव गहराया
इस मुद्दे ने संसद के भीतर और बाहर सियासी तापमान बढ़ा दिया है। जहां कांग्रेस इसे “देश के हितों से समझौता” बता रही है, वहीं सरकार इसे भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत करने वाला कदम बता रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी द्विपक्षीय व्यापार समझौते के प्रभाव का आकलन उसकी विस्तृत शर्तों के आधार पर ही किया जा सकता है। ऐसे समझौते आमतौर पर निर्यात, आयात, कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र पर व्यापक असर डालते हैं।
विस्तृत चर्चा के लिए तैयार
सरकार ने संकेत दिया है कि वह जल्द ही संसद में औपचारिक बयान देगी और विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। विपक्ष ने स्पष्ट किया है कि जब तक पूरी जानकारी सामने नहीं आती, वह इस मुद्दे को उठाता रहेगा। भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर शुरू हुआ यह राजनीतिक टकराव आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है, खासकर तब जब समझौते की शर्तें सार्वजनिक होंगी और उनके आर्थिक प्रभावों पर बहस होगी। फिलहाल, संसद के भीतर यह मुद्दा सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक का केंद्र बना हुआ है।