नई दिल्ली। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने संसद में स्पष्ट किया कि इस डील में दोनों देशों के हितों का संतुलन साधा गया है और इससे भारतीय किसानों, डेयरी क्षेत्र तथा एमएसएमई को कोई नुकसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत के निर्यात को नई गति देगा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में देश की स्थिति मजबूत करेगा। लोकसभा में वक्तव्य देते हुए गोयल ने कहा, “यह समझौता भारत के एक्सपोर्ट्स के हित में है। इससे हमारे उद्योग, छोटे-बड़े व्यवसायी और विशेष रूप से एमएसएमई क्षेत्र को लाभ मिलेगा। खाद्य और कृषि क्षेत्र में भारत की संवेदनशीलता का पूरा ध्यान रखा गया है।”
कृषि और डेयरी क्षेत्र की सुरक्षा पर जोर
वाणिज्य मंत्री ने विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि सरकार ने कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा किसानों और डेयरी क्षेत्र के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और इस समझौते में भी उनके हितों से कोई समझौता नहीं किया गया। गोयल ने कहा, “भारत अपने कृषि और दुग्ध क्षेत्रों के हितों की रक्षा करने में सफल रहा है। किसानों को इस समझौते से कोई नुकसान नहीं होगा, बल्कि निर्यात के नए अवसर खुलेंगे।” उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने उन क्षेत्रों में सावधानी बरती है, जहां घरेलू उत्पादकों पर असर पड़ सकता था।
भारत पर लगाया कम टैरिफ
मंत्री ने जानकारी दी कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत पर अन्य कई देशों की तुलना में कम टैरिफ लगाया है। उन्होंने कहा कि यह भारत के लिए एक सकारात्मक संकेत है और इससे भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी। गोयल के मुताबिक, यह समझौता प्रधानमंत्री मोदी की फरवरी 2025 की अमेरिका यात्रा के बाद तेजी से आगे बढ़ा। उस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय बातचीत हुई और उसके बाद विभिन्न स्तरों पर वार्ताकारों ने विस्तृत और गहन चर्चा की। उन्होंने कहा, “दोनों देशों के हितों और अपनी-अपनी अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए यह समझौता तैयार किया गया है। हमने यह सुनिश्चित किया कि भारत के संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा हो और हमारे निर्यातकों को लाभ मिले।”
प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी दी थी विस्तृत जानकारी
संसद में वक्तव्य देने से पहले मंगलवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी गोयल ने समझौते का विस्तृत ब्योरा साझा किया था। उन्होंने कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा टैरिफ को लेकर किए गए एलान और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद यह डील भारत की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने वाली साबित होगी। गोयल ने कहा, “यह हमारे सभी पड़ोसी देशों और प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले सबसे अच्छी डील है। हमें जो शर्तें मिली हैं, वे भारत के लिए अनुकूल हैं और देशवासियों के लिए शुभ संकेत लेकर आई हैं।” उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच व्यक्तिगत संबंधों का भी उल्लेख किया और कहा कि दोनों नेताओं की मित्रता ने इस समझौते को अंतिम रूप देने में अहम भूमिका निभाई।
MSME और उद्योग जगत के लिए अवसर
वाणिज्य मंत्री ने कहा कि यह साझेदारी विशेष रूप से एमएसएमई, उद्योग और छोटे-बड़े व्यवसायियों के हित में है। अमेरिकी बाजार तक बेहतर पहुंच मिलने से भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ेगी, जिससे रोजगार के अवसर सृजित होंगे और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि निर्यात को प्रोत्साहन मिलने से विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा और भारत की आर्थिक वृद्धि दर को समर्थन मिलेगा।
लोकसभा में हंगामा, विपक्ष का विरोध जारी
हालांकि गोयल के वक्तव्य के दौरान लोकसभा में विपक्ष का हंगामा जारी रहा। विपक्षी दल इस समझौते को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि इससे किसानों और घरेलू उद्योगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। विपक्ष के विरोध के बीच गोयल ने कहा कि सरकार पारदर्शिता के साथ काम कर रही है और समझौते के सभी पहलुओं को सार्वजनिक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश को भ्रमित करने की कोशिशों से बचना चाहिए और तथ्यों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए।
महत्वपूर्ण कदम
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को सरकार एक रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम मान रही है। सरकार का दावा है कि इससे निर्यात में वृद्धि, निवेश में तेजी और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा। वहीं विपक्ष इस पर विस्तृत चर्चा और संसदीय बहस की मांग कर रहा है। आने वाले दिनों में इस समझौते के प्रभाव और इसके क्रियान्वयन की रूपरेखा पर और स्पष्टता सामने आने की संभावना है। फिलहाल, सरकार इसे भारत की आर्थिक कूटनीति की बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है, जबकि राजनीतिक गलियारों में इस पर बहस तेज बनी हुई है।