संसद के बाहर राहुल गांधी और रवनीत सिंह बिट्टू के बीच तीखी नोकझोंक, ‘गद्दार’ और ‘देश का दुश्मन’ तक पहुंचे बयान

बुधवार को बजट सत्र के छठे दिन कांग्रेस सांसदों ने संसद के गेट के बाहर प्रदर्शन किया। राहुल गांधी अन्य सांसदों के साथ हाथों में पोस्टर लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान ही यह अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया।

Update: 2026-02-04 07:31 GMT

नई दिल्ली। बजट सत्र की कार्यवाही में लगातार जारी हंगामे के बीच बुधवार को संसद परिसर के बाहर एक अलग ही राजनीतिक टकराव देखने को मिला। कांग्रेस सांसदों के प्रदर्शन के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच तीखी जुबानी जंग हो गई। दोनों नेताओं के बीच ‘गद्दार’ और ‘देश का दुश्मन’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल हुआ, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

बजट सत्र में गतिरोध, बाहर प्रदर्शन

बजट पेश होने के बाद से ही संसद के दोनों सदनों में विपक्ष और सरकार के बीच तीखी नोकझोंक जारी है। विपक्ष विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार पर हमला बोल रहा है, जबकि सत्ता पक्ष विपक्ष पर अनावश्यक हंगामे का आरोप लगा रहा है। इसी क्रम में बुधवार को बजट सत्र के छठे दिन कांग्रेस सांसदों ने संसद के गेट के बाहर प्रदर्शन किया। राहुल गांधी अन्य सांसदों के साथ हाथों में पोस्टर लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान ही यह अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया।

lang="en" dir="ltr">

‘गद्दार दोस्त’ से शुरू हुई तकरार

बताया जा रहा है कि जब केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू संसद के मकर द्वार से गुजर रहे थे, तभी राहुल गांधी की नजर उन पर पड़ी। राहुल ने दूर से इशारा करते हुए कहा, “देखो, एक गद्दार यहीं से गुजर रहा है। इसका चेहरा देखो।” बिट्टू जब प्रदर्शन कर रहे सांसदों के करीब पहुंचे, तो राहुल गांधी ने हाथ बढ़ाकर कहा, “नमस्ते भाई, मेरे गद्दार दोस्त। चिंता मत करो, तुम वापस (कांग्रेस में) आ जाओगे।”

इस पर रवनीत सिंह बिट्टू ने हाथ मिलाने से इनकार कर दिया और पलटवार करते हुए राहुल गांधी को “देश का दुश्मन” कह दिया। उन्होंने कहा कि उनका “देश के दुश्मनों” से कोई वास्ता नहीं है। दोनों नेताओं के बीच यह संक्षिप्त लेकिन तीखी बहस कुछ ही पलों में चर्चा का विषय बन गई।

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है। राजनीतिक हलकों में इसे कांग्रेस और भाजपा के बीच बढ़ती तल्खी का प्रतीक माना जा रहा है। हालांकि, दोनों पक्षों की ओर से इस पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। संसद के भीतर जहां बहस और आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं, वहीं बाहर इस तरह की व्यक्तिगत टिप्पणियां राजनीतिक माहौल को और गर्माने वाली साबित हो रही हैं।

रवनीत सिंह बिट्टू पंजाब की राजनीति का जाना-पहचाना नाम हैं। वह तीन बार कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा सांसद रह चुके हैं। पहली बार 2009 में आनंदपुर साहिब से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। इसके बाद 2014 और 2019 में लुधियाना से सांसद चुने गए।

हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। 2024 के चुनाव में वह लुधियाना से भाजपा उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे, लेकिन पंजाब कांग्रेस प्रमुख अमरिंदर सिंह राजा वाडिंग से करीब 20 हजार वोटों से हार गए। चुनाव हारने के बावजूद केंद्र सरकार में उन्हें रेल तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री बनाया गया।

बिट्टू का राजनीतिक जीवन व्यक्तिगत त्रासदियों से भी जुड़ा रहा है। वह महज 11 साल के थे जब उनके पिता का निधन हो गया। 20 वर्ष की आयु में उन्होंने अपने दादा और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह को भी खो दिया, जिनकी 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ में एक बम विस्फोट में हत्या कर दी गई थी। बताया जाता है कि वर्ष 2007 में राहुल गांधी से मुलाकात के बाद बिट्टू ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा था। कांग्रेस में लंबी पारी खेलने के बाद उनका भाजपा में शामिल होना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना गया।

विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी द्वारा ‘गद्दार दोस्त’ कहे जाने के पीछे बिट्टू का कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होना मुख्य कारण है। वहीं बिट्टू का ‘देश का दुश्मन’ कहना राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता की तीखी अभिव्यक्ति के रूप में देखा जा रहा है। इस घटनाक्रम ने संसद के भीतर चल रहे टकराव को और तेज कर दिया है। विपक्ष जहां सरकार पर लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने का आरोप लगा रहा है, वहीं सत्ता पक्ष विपक्ष पर गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाने का आरोप लगा रहा है।

राजनीतिक माहौल हुआ तल्ख


बजट सत्र के दौरान पहले ही कई मुद्दों पर सदन की कार्यवाही बाधित हो चुकी है। ऐसे में यह घटना राजनीतिक माहौल को और तल्ख बना सकती है। आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव कम होगा या और बढ़ेगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल, संसद परिसर के बाहर हुई इस तीखी जुबानी जंग ने बजट सत्र के बीच राजनीतिक तापमान को और बढ़ा दिया है।

Tags:    

Similar News