पाकिस्तान : चिकित्सकों ने मदद के लिए राष्ट्रपति से लगाई गुहार
पाकिस्तान में कोरोना वायरस के खिलाफ अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर मोर्चा संभालने वाले चिकित्सक समुदाय ने अब अपनी समस्याओं के समाधान और महामारी के प्रति सरकार की नीतियों के खिलाफ राष्ट्रपति से लगाईगुहार
इस्लामाबाद । पाकिस्तान में कोरोना वायरस के खिलाफ अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर मोर्चा संभालने वाले चिकित्सक समुदाय ने अब अपनी समस्याओं के समाधान और महामारी के प्रति सरकार की नीतियों के खिलाफ राष्ट्रपति आरिफ अल्वी से गुहार लगाई है। पाकिस्तानी मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारियों व देश के शीर्ष चिकित्सकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से मुलाकात कर कहा कि कोरोना महामारी लगातार बढ़ रही है, ऐसे में सरकार को मीडिया के विभिन्न माध्यमों का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान छेड़ना चाहिए।
गौरतलब है कि लॉकडाउन में ढील, मस्जिदों में सामूहिक नमाजों के आयोजन की अनुमति जैसे मुद्दों पर देश के चिकित्सक समुदाय ने खुलकर इमरान सरकार की नीतियों को गलत बताया है। एक तरफ प्रधानमंत्री इमरान खान गरीबों के रोजगार का हवाला देकर लगातार लॉकडाउन में ढील की बात कर रहे हैं, वहीं चिकित्सकों का कहना है कि पाकिस्तान में कोरोना तेजी से बढ़ रहा है, ऐसे में लॉकडाउन और सख्त होना चाहिए।
चिकित्सकों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण नहीं मिलने की वजह से भी संघीय व प्रांत की सरकारों और चिकित्साकर्मियों में टकराव हो रहा है।
प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने राष्ट्रपति से कहा कि यह नहीं भूलना चाहिए कि कोरोना महामारी के फैलने के पहले 65 दिन के अंदर अमेरिका में कुल 250 मौतें हुई थीं जबकि इतनी ही अवधि में पाकिस्तान में 367 लोगों की इससे मौत हुई। अमेरिका में बाद के दिनों की तबाही सभी के सामने है। ऐसे में पाकिस्तान को और एहतियात की जरूरत है।
चिकित्सकों ने कहा कि सबसे ज्यादा खतरा चिकित्सा सेवा में लगे लोगों को है। ऐसे में उन्हें सुरक्षा उपकरण मुहैया कराया जाना चाहिए। जिन आठ डॉक्टरों की कोरोना से लड़ते हुए जान गई है, उनके परिजनों के लिए तुरंत मुआवजा पैकेज का ऐलान किया जाए। डॉक्टरों के वेतन में से किसी तरह की कटौती नहीं की जानी चाहिए और उन्हें अलग से जोखिम भत्ता दिया जाना चाहिए।
डॉक्टरों ने राष्ट्रपति से कहा कि वायरस के प्रसार को रोकना पूरी तरह से सरकार की जिम्मेदारी है। ऐसे में संघीय और प्रांतीय सरकारें अलग-अलग बात ना कर एकीकृत नीति बनाएं।
उन्होंने देश में कोरोना जांच की संख्या बढ़ाने का भी आग्रह किया। चिकित्सकों ने कहा कि आज तक देश में केवल 182,000 लोगों के टेस्ट हुए हैं। देश में कोरोना पॉजिटिव केस और अधिक हो सकते हैं जो पर्याप्त संख्या में जांच नहीं होने के कारण सामने नहीं आए होंगे। यह बहुत घातक हो सकता है।