ट्रंप ने साझा किया नस्लवादी वीडियो, बराक और मिशेल ओबामा को दिखाया गया वनमानुष; सोशल मीडिया पोस्ट पर बवाल

वीडियो में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और पूर्व प्रथम महिला मिशेल ओबामा को आपत्तिजनक तरीके से वनमानुष के रूप में दर्शाया गया था। इस पोस्ट को लेकर नागरिक अधिकार संगठनों, विपक्षी नेताओं और कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने भी आपत्ति जताई।

Update: 2026-02-07 04:37 GMT
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अपने सोशल मीडिया खाते पर साझा किए गए एक वीडियो ने गुरुवार रात राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी। वीडियो में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और पूर्व प्रथम महिला मिशेल ओबामा को आपत्तिजनक तरीके से वनमानुष के रूप में दर्शाया गया था। इस पोस्ट को लेकर नागरिक अधिकार संगठनों, विपक्षी नेताओं और कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने भी आपत्ति जताई। बढ़ते विवाद के बीच यह वीडियो बाद में ट्रंप के अकाउंट से हटा दिया गया।

2020 चुनाव से जुड़ी साजिश का दोहराव

यह वीडियो ट्रंप के 2020 के राष्ट्रपति चुनाव से जुड़े उन दावों का हिस्सा बताया जा रहा है, जिनमें उन्होंने चुनाव परिणामों में कथित हेराफेरी का आरोप लगाया था। ट्रंप लगातार यह कहते रहे हैं कि चुनाव में वोटिंग मशीनों के साथ छेड़छाड़ हुई और उन्हें जानबूझकर हराया गया। हालांकि, इन दावों की जांच विभिन्न अदालतों, राज्य अधिकारियों और ट्रंप प्रशासन के तत्कालीन अटॉर्नी जनरल द्वारा की गई थी। जांच में चुनाव परिणामों में व्यापक गड़बड़ी के कोई प्रमाण नहीं मिले थे। इसके बावजूद ट्रंप और उनके समर्थक समय-समय पर चुनाव से जुड़े सवाल उठाते रहे हैं।

वीडियो में क्या था?

करीब 62 सेकंड के इस वीडियो में एक लोकप्रिय दक्षिणपंथी मीम-निर्माता के पुराने कंटेंट के अंश शामिल किए गए थे। वीडियो में दावा किया गया कि 2020 के चुनाव में वोटिंग मशीनों में गड़बड़ी की गई थी। विवाद का मुख्य कारण वीडियो का वह हिस्सा बना, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और मिशेल ओबामा को जंगल के वनमानुष के रूप में दिखाया गया था। ओबामा के मुस्कुराते चेहरे को कथित रूप से एक वनमानुष के शरीर पर संपादित कर लगाया गया था। वीडियो में ट्रंप को “जंगल का राजा” के रूप में प्रस्तुत किया गया था, जबकि कई डेमोक्रेट नेताओं को जानवरों के रूप में दर्शाया गया। पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन को भी एक वनमानुष के रूप में दिखाया गया, जो केला खाते हुए दिखाई दे रहे थे। आलोचकों का कहना है कि यह प्रस्तुति न केवल राजनीतिक व्यंग्य की सीमा पार करती है, बल्कि नस्लीय संवेदनशीलता के मुद्दों को भी छूती है, क्योंकि बराक ओबामा अमेरिका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति रहे हैं।

व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया

विवाद बढ़ने के बाद व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा कि वीडियो इंटरनेट पर पहले से मौजूद एक मीम का हिस्सा था। उन्होंने कहा कि इसमें ट्रंप को “जंगल का राजा” और डेमोक्रेट्स को “लायन किंग” के पात्रों के रूप में दिखाया गया है। लीविट ने मीडिया से कहा कि “झूठी नाराजगी” को बढ़ावा देने के बजाय उन मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए जो अमेरिकी जनता के लिए अधिक महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, आलोचनाएं थमने का नाम नहीं ले रही थीं। नागरिक अधिकार समूहों और राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे राष्ट्रपति पद की गरिमा के अनुरूप नहीं बताया।

‘रिपब्लिकंस अगेंस्ट ट्रंप’ ने कहा—यह नस्लवादी

ट्रंप की पार्टी से जुड़े कुछ आलोचक समूहों ने भी इस पोस्ट की निंदा की। ‘रिपब्लिकंस अगेंस्ट ट्रंप’ नामक समूह ने वीडियो को “नस्लवादी” करार दिया। समूह ने सोशल मीडिया पर लिखा कि इस तरह की सामग्री देश के राजनीतिक माहौल को और विभाजित करती है। डेमोक्रेट नेताओं ने भी इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदारी और सम्मान की भावना बनाए रखना जरूरी है।

पोस्ट हटाया गया

विवाद बढ़ने के बाद संबंधित वीडियो ट्रंप के सोशल मीडिया अकाउंट से हटा दिया गया। प्रारंभिक तौर पर व्हाइट हाउस ने पोस्ट का बचाव किया था, लेकिन बाद में यह कहा गया कि वीडियो एक स्टाफ सदस्य द्वारा गलती से साझा कर दिया गया था। हालांकि, इस स्पष्टीकरण के बावजूद राजनीतिक बहस जारी है। आलोचकों का कहना है कि राष्ट्रपति के आधिकारिक या व्यक्तिगत खाते से साझा की गई सामग्री की जिम्मेदारी अंततः उन्हीं पर आती है।

ओबामा की ओर से प्रतिक्रिया नहीं

इस मामले पर पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा या मिशेल ओबामा की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। दोनों ही सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं और अक्सर लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक एकता की बात करते रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं अमेरिका की पहले से ध्रुवीकृत राजनीति को और तीखा कर सकती हैं।

ओबामा की आलोचना करते रहे ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप और बराक ओबामा के बीच राजनीतिक मतभेद लंबे समय से सार्वजनिक रहे हैं। जब ओबामा राष्ट्रपति थे, तब ट्रंप ने उनके जन्मस्थान को लेकर विवाद खड़ा किया था। ट्रंप ने दावा किया था कि ओबामा का जन्म हवाई में नहीं हुआ और इसलिए उन्हें राष्ट्रपति बनने का अधिकार नहीं है। बाद में ओबामा ने अपना जन्म प्रमाण पत्र सार्वजनिक किया, जिसे 2016 में ट्रंप ने स्वीकार किया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि इस विवाद की शुरुआत हिलेरी क्लिंटन के अभियान ने की थी—एक दावा जिसे क्लिंटन खेमे ने खारिज किया था।

सोशल मीडिया और राजनीतिक संवाद

ट्रंप और उनके समर्थक सोशल मीडिया पर मीम, व्यंग्य और एआई-आधारित वीडियो साझा करने के लिए जाने जाते हैं। उनके करीबियों का कहना है कि यह राजनीतिक व्यंग्य और हास्य का हिस्सा है। लेकिन आलोचकों का तर्क है कि राष्ट्रपति पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा साझा की गई सामग्री का असर व्यापक होता है और उसे अधिक जिम्मेदारी के साथ पेश किया जाना चाहिए।

राजनीतिक माहौल पर असर

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका में राजनीतिक ध्रुवीकरण पहले से ही गहरा है। चुनावी प्रक्रियाओं, नस्लीय समानता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मुद्दे लगातार बहस के केंद्र में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर साझा की गई सामग्री केवल डिजिटल दुनिया तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सार्वजनिक धारणा और राजनीतिक विमर्श को भी प्रभावित करती है। फिलहाल, वीडियो हटाए जाने के बाद भी बहस जारी है। यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि सोशल मीडिया के दौर में राजनीतिक नेताओं की हर पोस्ट व्यापक चर्चा और विवाद का कारण बन सकती है।

Tags:    

Similar News