नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार सुबह दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर मलेशिया के लिए रवाना हुए। यह यात्रा मलेशिया के प्रधानमंत्री दातो सेरी अनवर इब्राहिम के निमंत्रण पर हो रही है। करीब आठ वर्षों बाद प्रधानमंत्री मोदी का यह मलेशिया दौरा दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। इससे पहले वह 2018 में मलेशिया गए थे। विदेश मंत्रालय के सचिव (पूर्व) पी. कुमरन ने बताया कि यह यात्रा न केवल भारत-मलेशिया द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने के उद्देश्य से है, बल्कि व्यापक तौर पर भारत और आसियान (ASEAN) देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने के लिए भी महत्वपूर्ण है।
द्विपक्षीय वार्ता में व्यापक एजेंडा
दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के बीच विस्तृत द्विपक्षीय वार्ता होगी। दोनों नेता भारत और मलेशिया के बीच स्थापित ‘कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ की प्रगति की समीक्षा करेंगे और आगे की दिशा तय करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, बातचीत में व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा सहयोग, सेमीकंडक्टर निर्माण, डिजिटल तकनीक, नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और लोगों के बीच संपर्क जैसे कई अहम मुद्दे शामिल होंगे।
रेलवे सहित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सहयोग, हरित ऊर्जा परियोजनाओं में साझेदारी और तकनीकी आदान-प्रदान को भी प्राथमिकता दी जाएगी। दोनों देश छात्रों के लिए छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) की संख्या बढ़ाने और मलेशिया में ‘थिरुवल्लुवर सेंटर फॉर इंडियन स्टडीज’ स्थापित करने के प्रस्ताव पर भी विचार कर रहे हैं।
सीईओ फोरम की 10वीं बैठक
8 फरवरी को कुआलालंपुर में भारत–मलेशिया सीईओ फोरम की 10वीं बैठक आयोजित होगी। इस मंच पर दोनों देशों के प्रमुख उद्योगपति और कारोबारी प्रतिनिधि भाग लेंगे। प्रधानमंत्री मोदी इस अवसर पर भारतीय और मलेशियाई उद्योग जगत के नेताओं से मुलाकात करेंगे। उम्मीद है कि इस बैठक के जरिए निवेश, विनिर्माण, डिजिटल अर्थव्यवस्था और स्टार्टअप सेक्टर में नई साझेदारियों को बढ़ावा मिलेगा। भारत और मलेशिया के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने के लिए ‘कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक कॉर्पोरेशन एग्रीमेंट’ (CECA) की समीक्षा भी की जा रही है, ताकि व्यापार को अधिक संतुलित और टिकाऊ बनाया जा सके।
जाकिर नाइक का मुद्दा भी एजेंडे में
विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया है कि मलेशिया में रह रहे भगोड़े जाकिर नाइक का मुद्दा भी वार्ता में उठ सकता है। जाकिर नाइक पिछले लगभग दस वर्षों से मलेशिया में रह रहा है और भारत सरकार समय-समय पर उसके प्रत्यर्पण का मुद्दा उठाती रही है। हालांकि इस विषय पर किसी औपचारिक घोषणा की संभावना कम है, लेकिन दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग और कानूनी मामलों पर चर्चा के दौरान यह मुद्दा सामने आ सकता है।
प्रवासी भारतीयों से संवाद
प्रधानमंत्री मोदी अपने दौरे के दौरान मलेशिया में रह रहे भारतीय समुदाय से भी मुलाकात करेंगे और उन्हें संबोधित करेंगे। मलेशिया में लगभग 29 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो विश्व में तीसरा सबसे बड़ा भारतीय प्रवासी समुदाय है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत और मलेशिया के संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत जुड़ाव पर आधारित हैं। मलेशिया में भारतीयों की उपस्थिति का इतिहास काफी पुराना है और उन्होंने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में भी योगदान दिया था। प्रवासी भारतीय समुदाय दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभाता है। आर्थिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक क्षेत्रों में उनकी सक्रिय भागीदारी द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देती है।
आसियान के संदर्भ में दौरे का महत्व
मलेशिया दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन (ASEAN) का एक प्रमुख सदस्य है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा भारत-आसियान संबंधों को नई ऊर्जा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ में आसियान देशों की केंद्रीय भूमिका रही है। मलेशिया को इस समूह में भारत का एक भरोसेमंद और रणनीतिक साझेदार माना जाता है। वर्तमान समय में भारत आसियान के साथ अपने मुक्त व्यापार समझौते—आसियान-इंडिया ट्रेड इन गुड्स एग्रीमेंट (AITIGA)—को अपडेट करने की प्रक्रिया में है। भारत लंबे समय से इस समझौते की समीक्षा की मांग करता रहा है, क्योंकि मौजूदा ढांचे के तहत व्यापार घाटा बढ़ने की चिंता जताई गई है।
व्यापार घाटा और संतुलन की कोशिश
आंकड़ों के अनुसार, 2022-23 में भारत का आसियान देशों के साथ व्यापार घाटा लगभग 43 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। भारत का मानना है कि मौजूदा व्यापार व्यवस्था से भारतीय उद्योगों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री मोदी का मलेशिया दौरा AITIGA को अधिक संतुलित, पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए समर्थन जुटाने की दिशा में अहम हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समझौते में सुधार होता है, तो भारतीय विनिर्माण, कृषि और सेवा क्षेत्रों को आसियान बाजारों में बेहतर अवसर मिल सकते हैं।
रणनीतिक और भू-राजनीतिक परिप्रेक्ष्य
भारत और मलेशिया के बीच सहयोग केवल आर्थिक दायरे तक सीमित नहीं है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन, समुद्री सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखलाओं की स्थिरता जैसे मुद्दे भी दोनों देशों के लिए अहम हैं। सेमीकंडक्टर और डिजिटल तकनीक जैसे उभरते क्षेत्रों में साझेदारी भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में सहायक हो सकती है, जबकि मलेशिया को भी एक बड़े और तेजी से बढ़ते बाजार का लाभ मिलेगा।
भारत और मलेशिया के रिश्ते
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दो दिवसीय मलेशिया दौरा बहुआयामी महत्व रखता है। द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा, व्यापार संतुलन, निवेश सहयोग, प्रवासी भारतीयों से संवाद और आसियान के साथ संबंधों को नई दिशा देना इन सभी आयामों के कारण यह यात्रा खास मानी जा रही है। आने वाले दिनों में इस दौरे से निकलने वाले समझौते और घोषणाएं यह तय करेंगी कि भारत और मलेशिया के रिश्ते किस नई ऊंचाई तक पहुंचते हैं। फिलहाल, नजरें दोनों देशों के नेताओं की वार्ता और संभावित समझौतों पर टिकी हैं।